Litreture
ब्वाय फ्रेंड गर्ल फ्रेंड.. लिव इन रिलेशन लगा रहा संबंधो मे पलीता
व्यंग्य : विवाह संस्कार कठिन होता जारहा विवाह कटवा रहे हर युग में नौकरी न मिलना सबसे बड़ा कारण प्रतियोगी परीक्षाओं मे उम्र हो रहा हायल फिर भी तय शादी को काटने वाले हैं तत्पर सबसे बड़ा बैरी बना सोशल साईट शहर बेस्ड लड़की कर रहे लोग नापसंद बलराम कुमार मणि त्रिपाठी सतयुग मे […]
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स्वतंत्रता की 79वी़ वर्षगांठ पर दिल को मोह लेने वाली कविता, जरूर पढ़ें…
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी आया दिन 15अगस्त का। स्मृतियों के द्वार खोलता।। बलिदानों बीरो की गाथा- के पन्ने हर साल खोलता।।1।। नफरत के जब बीज पनपते। धर्म जाति मे हम बंट जाते।। क्षणिक स्वार्थ मे तन्मय होते। तभी गुलामी मे फंस जाते।।2।। रक्त हमारा बहुत बहा है। धोखा बारंबार हुआ है।। कभी मुगल आकर घेरे […]
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Exclusive Poem: महाशक्ति का आह्वान
•बलराम कुमार मणि त्रिपाठी एक बार फिर आओ मां रणचंडी! बढ़े पाप को खा जाओ रणचंडी।। राक्षस कुल बढ़ते जाते हैं, पापी सभी कहर ढाते हैं। सत्य बोलने वाले डरते, ढोंगी अब बढ़ते जाते हैं।। भटक रहे है लोग, इन्हे सन्मार्ग दिखाओ!! महाश्मशान कालिके आओ! अट्टहास कर रोर मचाओ। जो नृशंश […]
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रक्षाबंधन: प्यार की शक्ति का एहसास
•बलराम कुमार मणि त्रिपाठी सावन की पूर्णिमा श्रावणी मनती। मध्य सरोवर खड़े कमर भर जल में।। जड़ीबूटियों से अभिमंत्रित होकर। वेद मंत्र से ऋषिगण पर्व मनाते।।1।। रक्षा बंधन की महिमा है न्यारी। युगों युगों से पुण्य पर्व है भारी।। पहले युग में राजा बलि सुविचारी। भुज बल में त्रिभुवन थी महिमा भारी।।2।। डरे […]
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स्मृति शेष: प्रमिला ताई मेढे मातृशक्ति ही राष्ट्र शक्ति
डॉ अर्चना तिवारी स्त्री ही राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला है। इसी ध्येयवाक्य के साथ देश मे लगभग 90 वर्षों से कार्यरत राष्ट्रसेविका समिति भी ठीक उसी प्रकार से भारत की स्त्रियों के विकास में जुटी है। श्रद्धेय प्रमिला ताई जी इस संगठन की चतुर्थ मूल स्तंभ थीं। जिस प्रकार से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व्यक्ति निर्माण […]
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कविकुल शिरोमणि गोस्वामी जी के मानस का मर्म
आचार्य संजय तिवारी। आज श्रावण शुक्ल षष्ठी और सप्तमी की संधि सन्निहित है, बाबा तुलसी का अवतरण दिवस।बाबा के अवतरण से जगत को मिले मानस के दुर्लभ मोती स्वरूप अमृत फल। श्रीरामचरित मानस केवल एक पुस्तक भर नहीं है। श्रुति, स्मृति , उपनिषद, इतिहास, विज्ञान और जीवन का यह वह दर्शन है जो भगवान शिव […]
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भाषा की पाठशाला : संसद् और परिषद् में अंतर
संस्कृत का शुद्ध शब्द संसद् है, जिसे हिन्दी में तद्भव रूप में ‘संसद’ भी लिखा जाता है। संसद् शब्द का अर्थ है– जहाँ सभी साथ-साथ बैठते हैं। [सम् + सद् = संसद् ] ‘सम्’ का अर्थ है, बराबर और ‘सद्’ का अर्थ है, बैठना, आसीन होना या वास करना। हम जानते हैं कि संसद् वह […]
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