Poetry

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लाईलाज बीमारी: बेरोजगारी पर करारा प्रहार

बदलते समय के साथ जहां एक ओर विकास और समृद्धि के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी और आर्थिक असमानता समाज के बड़े हिस्से के लिए एक गंभीर संकट बनती जा रही है। प्रस्तुत रचना इसी विडंबना को उजागर करती है-जहां कुछ वर्ग ऐश्वर्य में डूबा है, वहीं गरीब तबका रोटी और […]

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बहुत गहरी और सच्ची कविता

धीरे धीरे मैने जीवन जान लिया। रंग बदलती दुनियां को पहचान लिया।। सत्ता बदली शासन बदली… बदल गए इंसान। जिसको देव समझ बैठा था वे निकले हैवान।। घोर निराशा हुई मगर पहचान लिया। सब कुछ मेरा भ्रम था मैने जान लिया।। साधु वेष धारण कर रावण आया था। जनक नंदिनी ने भी धोखा खाया था।। […]

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