Litreture
बहुत गहरी और सच्ची कविता
धीरे धीरे मैने जीवन जान लिया। रंग बदलती दुनियां को पहचान लिया।। सत्ता बदली शासन बदली… बदल गए इंसान। जिसको देव समझ बैठा था वे निकले हैवान।। घोर निराशा हुई मगर पहचान लिया। सब कुछ मेरा भ्रम था मैने जान लिया।। साधु वेष धारण कर रावण आया था। जनक नंदिनी ने भी धोखा खाया था।। […]
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जयंती विशेषांक : भाषा, संस्कृति और भारतीय बौद्धिक परंपरा के अप्रतिम आचार्य
वरुण कुमार भारतीय भाषाविज्ञान के इतिहास में आचार्य रघुवीर का नाम उस विद्वान परंपरा का प्रतिनिधि है, जिसने भाषा को केवल व्याकरण या शब्द-संरचना तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत आधार समझा। उनकी जयंती पर उन्हें स्मरण करना, वस्तुतः भारतीय भाषाओं की आत्मा और स्वदेशी ज्ञान-परंपरा को पुनः […]
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पक्ष या विपक्ष में हों राष्ट्रहित ही जिनके जीवन का लक्ष्य रहा ऐसे मुखर वक्ता भारत रत्न महान नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी पर प्रस्तुत है भावांजलि
अटल जी सचमुच अटल थे। राष्ट्रहित चिंतक प्रखर थे।। अमृत जिसके उर बसा था, देश हित जीवन कसा था , संयमित वाणी मुखर था , देश हित जिनमे प्रबल था । हिमालय से वह अचल थे। अटल जी सचमुच अटल थे।।१।। सिंह सा वे गरजते थे। भाव मे वे लरजते थे । संसदी इतिहास मे […]
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जीवन का कड़वा सच देखना है तो एक बार देख लीजिए जनरल डिब्बा
जनरल मतलब बिना रिजर्वेशन वाला डिब्बा डॉ धनंजय मणि त्रिपाठी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते हुए एक आदमी ने पूछा -“गरीब रथ में जनरल डिब्बा किधर लगता है?” जनरल मतलब बिना रिजर्वेशन वाला डिब्बा। हमने बताया -“गरीब रथ में जनरल डिब्बा नहीं लगता।” फिर हमने बिना मांगे सलाह दी -“टीटी से […]
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बालगीत : ठंढी आई ठंढी आई
बंदर,भालू,कुत्ता बिल्ली, सबको तो ठंडी है लगती। गाय भैस हाथी बकरी को, इनको भी तो ठंडी लगती।। पर इनकी मां ख्याल न करती। बिना किसी कपड़े के देखो। बाहर जाने को है कहती।। पर हमको स्वेटर पहना कर। मां बाहर जाने को कहती।। सुबह सांझ को ठंड बढ़ी है। दोपहरी में धूप सजी है।। दिन […]
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