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ब्रह्मऋषि विश्वामित्र : त्रिवेणी कला संगम में भव्य नाट्य मंचन
- Nayalook
- April 23, 2026
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नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों की गहराई को रंगमंच के माध्यम से प्रस्तुत करने की दिशा में आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन एक भव्य नाट्य प्रस्तुति ‘ब्रह्मऋषि विश्वामित्र’ लेकर आ रहा है।दिल्ली के प्रतिष्ठित त्रिवेणी कला संगम के ओपन थिएटर में आयोजित यह नाटक एक ऐसे असाधारण चरित्र की कथा है, जिसने राजसी […]
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तिरछी नज़र: तवायफ़ी सीजफायर, नमाज़ बख्शवाने निकली थी, रोज़े गले पड़े
(एक लघुकथा बकलम मीर मुंशी जी) लखनऊ में नवाब नसीरुद्दीन हैदर का ज़माना चल रहा था। तवायफ़ी, कबूतरबाज़ी, मुर्ग़बाज़ी आदि अपनी चरम पे थी। लखनऊ की हवा में एक अज़ब सी रवानगी थी। इन्ही दिनों लखनऊ में दो रईस नवाब सलमान अली और नवाब शाहरुख ख़ान के बड़े चर्चे थे। दोनों ही बड़े रईस शौकीन […]
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मजबूत कूटनीति किसी भी सैन्य शक्ति से कम नहीं होती
शाश्वत तिवारी पश्चिम एशिया के उथल-पुथल भरे भू-राजनीतिक परिदृश्य में जब युद्ध, प्रतिबंध और समुद्री असुरक्षा का वातावरण बन रहा है, तब भारत ने एक बार फिर अपनी परिपक्व कूटनीति और संतुलित विदेश नीति का परिचय दिया है। विश्व के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz में भारत के जहाजों […]
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बहुत गहरी और सच्ची कविता
धीरे धीरे मैने जीवन जान लिया। रंग बदलती दुनियां को पहचान लिया।। सत्ता बदली शासन बदली… बदल गए इंसान। जिसको देव समझ बैठा था वे निकले हैवान।। घोर निराशा हुई मगर पहचान लिया। सब कुछ मेरा भ्रम था मैने जान लिया।। साधु वेष धारण कर रावण आया था। जनक नंदिनी ने भी धोखा खाया था।। […]
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जयंती विशेषांक : भाषा, संस्कृति और भारतीय बौद्धिक परंपरा के अप्रतिम आचार्य
वरुण कुमार भारतीय भाषाविज्ञान के इतिहास में आचार्य रघुवीर का नाम उस विद्वान परंपरा का प्रतिनिधि है, जिसने भाषा को केवल व्याकरण या शब्द-संरचना तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत आधार समझा। उनकी जयंती पर उन्हें स्मरण करना, वस्तुतः भारतीय भाषाओं की आत्मा और स्वदेशी ज्ञान-परंपरा को पुनः […]
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