Litreture

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बहुत गहरी और सच्ची कविता

धीरे धीरे मैने जीवन जान लिया। रंग बदलती दुनियां को पहचान लिया।। सत्ता बदली शासन बदली… बदल गए इंसान। जिसको देव समझ बैठा था वे निकले हैवान।। घोर निराशा हुई मगर पहचान लिया। सब कुछ मेरा भ्रम था मैने जान लिया।। साधु वेष धारण कर रावण आया था। जनक नंदिनी ने भी धोखा खाया था।। […]

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युवा दिवस- विवेकानंद की स्मृति में पर विशेष

युवा दिवस पर, शक्ति उपासक राम कृष्ण के प्यारे शिष्य। अभिनंदन करते विवेक को धर्म सनातन किया प्रतिष्ठ।। सब धर्मो से कही श्रेष्ठ है मानवता का हो सम्मान। करुणा दया मैत्री मुदिता भाव हृदय से बढ़ता मान।। धन्य विवेकानंद युवाओंं के तुम सदा प्रेरणा श्रोत। अभिनंदन करते है हम सब है भारतीय ध्वज किया उदोत।। […]

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जयंती विशेषांक : भाषा, संस्कृति और भारतीय बौद्धिक परंपरा के अप्रतिम आचार्य

वरुण कुमार भारतीय भाषाविज्ञान के इतिहास में आचार्य रघुवीर का नाम उस विद्वान परंपरा का प्रतिनिधि है, जिसने भाषा को केवल व्याकरण या शब्द-संरचना तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत आधार समझा। उनकी जयंती पर उन्हें स्मरण करना, वस्तुतः भारतीय भाषाओं की आत्मा और स्वदेशी ज्ञान-परंपरा को पुनः […]

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अंधी-दौड़ : उपन्यास

अंधी दौड़ उपन्यासकार सूर्य नारायण शुक्ल का पांचवां उपन्यास है। भौतिकी के प्रवक्ता पद से अवकाश ग्रहण के पश्चात अपने लिखे उपन्यासों का प्रकाशन निश्चय ही एक साहस का‌ काम है। मौजूदा ‘लिव इन रिलेशन’ मे रहने वाले युवक और युवतियों की यथार्थ स्थिति का यह एक जीवन्त उदाहरण है। लेखक ने न केवल वासना […]

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पक्ष या विपक्ष में हों राष्ट्रहित ही जिनके जीवन का लक्ष्य रहा ऐसे मुखर वक्ता भारत रत्न‌ महान नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी पर प्रस्तुत है भावांजलि

अटल जी सचमुच अटल थे। राष्ट्रहित चिंतक प्रखर थे।। अमृत जिसके उर बसा था, देश हित जीवन कसा था , संयमित वाणी मुखर था , देश हित जिनमे प्रबल था । हिमालय से वह अचल थे। अटल जी सचमुच अटल थे।।१।। सिंह सा वे गरजते थे। भाव मे वे लरजते थे । संसदी इतिहास मे‌ […]

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शाश्वत सनातन सृष्टि की कथा : माया कुलश्रेष्ठ

नया लुक संवाददाता शाश्वत सनातन सृष्टि की एक कथा है। इस कथा में गति है। लय है। ताल है। छंद हैं। ऊर्जा है। संवाद है। प्रवाह है। प्रकृति है। संयोग है। वियोग है। विरह है। प्रेम है। भक्ति है। भावना है। संवेदना है। क्रोध है। अंगार है। शक्ति है। विरलता भी है और अविरलता भी। […]

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कवियों की ओजस्वी रचनाओं से सजी स्वदेशी महोत्सव की संध्या

नया लुक ब्यूरो देहरादून। परेड ग्राउंड में आयोजित सात दिवसीय स्वदेशी महोत्सव एवं उत्तराखण्ड विकास प्रदर्शनी के छठे दिन साहित्य, संस्कृति और उद्यमिता का संगम देखने को मिला। इसी क्रम में राष्ट्रवादी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना का भाव जागृत किया। […]

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जीवन का कड़वा सच देखना है तो एक बार देख लीजिए जनरल डिब्बा

जनरल मतलब बिना रिजर्वेशन वाला डिब्बा डॉ धनंजय मणि त्रिपाठी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते हुए एक आदमी ने पूछा -“गरीब रथ में जनरल डिब्बा किधर लगता है?” जनरल मतलब बिना रिजर्वेशन वाला डिब्बा। हमने बताया -“गरीब रथ में जनरल डिब्बा नहीं लगता।” फिर हमने बिना मांगे सलाह दी -“टीटी से […]

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अवलोकन, पुनरवलोकन, विलोकन, सिंहावलोकन और विहंगावलोकन में अंतर : भाषा की पाठशाला

अवलोकन का अर्थ है- देखना जिसमें’अव’ उपसर्ग का अर्थ नीचे, हीन आदि है। निकट अथवा नीचे रखी वस्तु, जैसे पुस्तक आदि का अवलोकन किया जाता है। किसी चीज़ को दुबारा देखने के लिए ‘पुनरवलोकन’ शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसे अज्ञानवश ‘पुनरावलोकन’ लिख दिया जाता है। अवलोकन में ‘पुनर्’(अर्थ : दुबारा) उपसर्ग लगकर ‘पुनरवलोकन’ […]

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बालगीत : ठंढी आई ठंढी आई

बंदर,भालू,कुत्ता बिल्ली, सबको तो ठंडी है लगती। गाय भैस हाथी बकरी को, इनको भी तो ठंडी लगती।। पर इनकी मां ख्याल न करती। बिना किसी कपड़े के देखो। बाहर जाने को है कहती।। पर हमको स्वेटर पहना कर। मां बाहर जाने को कहती।। सुबह सांझ को ठंड बढ़ी है। दोपहरी में धूप सजी है।। दिन […]

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