डायबिटीज को लंबे समय से “साइलेंट किलर” कहा जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च ने इस बीमारी से जुड़े एक और गंभीर खतरे की ओर ध्यान खींचा है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि टाइप-2 डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचाती है, खासकर लिवर को। वडोदरा के एसएसजी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई इस स्टडी में यह सामने आया है कि डायबिटीज के मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा काफी अधिक होता है। इस शोध में 9000 से अधिक मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि लगभग 26% मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस के संकेत थे, जबकि 5% मरीजों में सिरोसिस की स्थिति विकसित हो चुकी थी।
ये भी पढ़ें
ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की हालत गंभीर? बेहोशी की खबरों के बीच कोम में चल रहा इलाज
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बीमारियों के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसका मतलब है कि मरीज को तब तक इस समस्या का पता नहीं चलता, जब तक लिवर को गंभीर नुकसान नहीं हो जाता। यही कारण है कि इसे “साइलेंट अटैक” कहा जा रहा है। रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे लिवर में सूजन और कठोरता पैदा करती है, जिससे फाइब्रोसिस और बाद में सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह समस्या साधारण ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड में आसानी से पकड़ में नहीं आती।
ये भी पढ़ें
टॉप कमांडर्स की शहादत से नहीं डगमगाएंगे ईरानी लड़ाके: सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का सख्त संदेश
इस अध्ययन में शामिल मरीजों में से कई ऐसे थे, जिन्हें लिवर से जुड़ी कोई समस्या महसूस नहीं हो रही थी। लेकिन जब उनका फाइब्रोस्कैन टेस्ट किया गया, तब लिवर डैमेज का खुलासा हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल शुगर लेवल को कंट्रोल करना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज मरीजों को नियमित रूप से लिवर की जांच भी करानी चाहिए, ताकि समय रहते इस खतरे को पहचाना जा सके। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति लिवर फेलियर तक पहुंच सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
