डायबिटीज के मरीजों के लिए नई चेतावनी: लिवर बीमारियां बिना लक्षण बढ़ा रहीं खतरा

diabetes effect liver 07 04 2026 1775526698

डायबिटीज को लंबे समय से “साइलेंट किलर” कहा जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च ने इस बीमारी से जुड़े एक और गंभीर खतरे की ओर ध्यान खींचा है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि टाइप-2 डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचाती है, खासकर लिवर को। वडोदरा के एसएसजी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई इस स्टडी में यह सामने आया है कि डायबिटीज के मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा काफी अधिक होता है। इस शोध में 9000 से अधिक मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि लगभग 26% मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस के संकेत थे, जबकि 5% मरीजों में सिरोसिस की स्थिति विकसित हो चुकी थी।

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सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बीमारियों के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसका मतलब है कि मरीज को तब तक इस समस्या का पता नहीं चलता, जब तक लिवर को गंभीर नुकसान नहीं हो जाता। यही कारण है कि इसे “साइलेंट अटैक” कहा जा रहा है। रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे लिवर में सूजन और कठोरता पैदा करती है, जिससे फाइब्रोसिस और बाद में सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह समस्या साधारण ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड में आसानी से पकड़ में नहीं आती।

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इस अध्ययन में शामिल मरीजों में से कई ऐसे थे, जिन्हें लिवर से जुड़ी कोई समस्या महसूस नहीं हो रही थी। लेकिन जब उनका फाइब्रोस्कैन टेस्ट किया गया, तब लिवर डैमेज का खुलासा हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल शुगर लेवल को कंट्रोल करना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज मरीजों को नियमित रूप से लिवर की जांच भी करानी चाहिए, ताकि समय रहते इस खतरे को पहचाना जा सके। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति लिवर फेलियर तक पहुंच सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

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