अधिक मास की मासिक दुर्गाष्टमी आज, माँ दुर्गा की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि और शक्ति

Monthly Durgashtami

Monthly Durgashtami मासिक दुर्गाष्टमी माँ दुर्गा को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जो प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा कर माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मई माह में अधिक मास की मासिक दुर्गाष्टमी 23 मई 2026, शनिवार को पड़ रही है। इस दिन भक्त माँ दुर्गा की पूजा कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। चूंकि यह व्रत हर महीने आता है, इसलिए इसकी सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक होता है, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सके। क्योंकि सही विधि और शुभ मुहूर्त में की गई पूजा का फल अधिक मिलता है।

अधिक मास की अष्टमी तिथि का समय

तिथि प्रारंभ: 23 मई 2026 को प्रातः 05:05 बजे

तिथि समाप्त: 24 मई 2026 को प्रातः 04:28 बजे

मासिक दुर्गाष्टमी क्या है?

मासिक दुर्गा अष्टमी माता दुर्गा का त्योहार है जो प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए मनाया जाता है । इस व्रत को करने का अत्यंत महत्त्वपूर्ण विधान है। सभी माह की पूजा का विधान अगल-अलग बताया गया है।

नारद पुराण के अनुसार : चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को माँ भवानी की उत्पत्ति हुई थी। इस दिन पूजन करने के पश्चात भक्त हर्षोल्लास के साथ माता की यात्रा का महान उत्सव मनाते हैं। यह दिन जगदम्बा के दर्शन करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन करुणामयी माँ जगदम्बा के दर्शन मनुष्यों के लिए सर्वथा कल्याण करने वाला होता है। विशेषतः, इस दिन अशोक कलिका खाने का भी विधान है। जो लोग चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को पुनर्वसु नक्षत्र में अशोक की आठ कलिकाओं को ग्रहण करते है, वे ईश्वर की कृपा से सदैव सुख ही प्राप्त करते है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन देवी की पूजा का विधान होने से इस शुभ तिथि को ‘महाष्टमी’ भी कहा जाता है।

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को, व्रत का संकल्प लेकर पहले जल से स्नान करें। फिर शर्करा से बनाया गया नैवेध भोग लगाएं और दूसरे दिन नवमी को, कुंवारी कन्याओं को देवी का शर्करा युक्त प्रसाद और भोजन कराएं। इस प्रकार, देवी की पूजा करने से माता अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती हैं और उनका कल्याण करती है। जो मनुष्य श्रद्धाभाव के साथ ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी की विधिवत पूजा करता है, वह गन्धर्वों और अप्सराओं की भांति सुख प्राप्त करता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को, हल्दी मिश्रित जल से स्नान करने के बाद,मनुष्य को विधिवत तरीके से देवी को भी स्नान कराना चाहिए साथ ही उनका पूजन करना चाहिए।

तत्पश्चात, शुद्ध जल से स्नान कराना चाहिए और कपूर और चन्दन का लेप लगाना चाहिए। फिर शर्करा युक्त भोग को अर्पित करके आचमन करें। ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें अपने सामर्थ के अनुसार दक्षिणा दें और यदि संभव हो तो स्वर्ण का भी दान करें क्योंकि स्वर्ण दान उत्तम माना जाता है। श्रद्धापूर्वक दक्षिणा अर्पित करने के पश्चात उन्हें प्रसन्नचित्त मन से विदा करें और स्वयं भी मौन होकर भोजन करें। इस प्रकार, श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से मनुष्य को देव लोक में शरण मिलती है। इसी प्रकार, हर मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी की पूजा की जाती है। इसलिए इसे मासिक दुर्गाष्टमी कहा जाता है।

मासिक दुर्गा अष्टमी की सामान्य पूजा विधि क्या है?

प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष के अष्टमी के दिन नित्यकर्म आदि क्रियाएं सम्पन्न करके यदि संभव हो तो पूर्ण निष्ठा भाव के साथ माँ दुर्गा के किसी मंदिर में जाकर विधिपूर्वक माता का पूजन करना चाहिए यदि संभव न हो तो आप घर पर ही प्रतिदिन पूजा की जाने वाली मूर्ति के समक्ष बैठकर माता के स्वरूप का ध्यान करें साथ ही धूप दीप आदि जलाकर व्रत का संकल्प लें। व्रत का संकल्प लेने के पश्चात माता दुर्गा की अपने रीति रिवाजों के अनुसार विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजन के दौरान सर्वप्रथम माता शुद्ध घी, दही, फल, फूल, अक्षत (चावल) आदि अर्पित करें। धूप, दीप आदि से माता जी की आरती करें।

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माँ दुर्गा के विशेष मंत्रों का जाप करें और हो सके तो दुर्गा चालीसा व माता दुर्गा की कथा का पाठ करें। माता दुर्गा को नैवेद्य के रूप में मिठाई और फल अर्पित करें। पूजन के पश्चात माता से अपने जीवन का कल्याण करने हेतु प्रार्थना करें व माता के प्रसाद को परिवार के सदस्यों को वितरित करें।  जो भक्त पूर्ण निष्ठा भाव और शुद्ध मन से माँ दुर्गा की उपासना करते हैं, उन्हें जीवन में सुख-समृद्धि एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है। दुर्गा अष्टमी का व्रत मां दुर्गा के आराधना और पूजा का एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन कथा में मां दुर्गा की महिमा और विजय की कथा सुनाई जाती है।

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत के लाभ

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत मनुष्य के जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करता है । भक्तों को माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है जिससे भक्तों को समृद्धि प्राप्त होती हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने से मनुष्य व्यापार में उन्नति, धन में समृद्धि और जीवन में सफलता मिलती है।

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