EMI देश में महंगाई एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। पेट्रोल-डीजल, गैस, बिजली और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब सीधे मिडिल क्लास की जेब पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। इससे EMI से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक सब कुछ महंगा हो सकता है।
42 महीने के उच्च स्तर पर थोक महंगाई
अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई है, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) भी अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई, जो पिछले 13 महीनों का उच्च स्तर है। इससे पहले अक्टूबर 2024 से यह RBI के तय दायरे 2% से 6% के भीतर बनी हुई थी।
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क्यों बढ़ रही है महंगाई?
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस महंगे बने हुए हैं। अगर यह संकट लंबा चलता है तो सरकार को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। इसका असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खेती, फैक्ट्री लागत और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ेगा।
इस साल कितनी रह सकती है महंगाई?
डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के मुताबिक इस वित्त वर्ष में औसत खुदरा महंगाई करीब 4.9% रह सकती है। वहीं पिरामल ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री देबोपम चौधरी का मानना है कि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहा, तो खुदरा महंगाई 5.2% तक पहुंच सकती है।
आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?
रोजमर्रा का खर्च बढ़ेगा : महंगाई बढ़ने का सीधा असर राशन, दूध, सब्जी, बिजली बिल, स्कूल फीस, मेडिकल खर्च और यात्रा पर पड़ेगा। यानी हर महीने का घरेलू बजट बिगड़ सकता है।
EMI हो सकती है महंगी : अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही, तो RBI ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI महंगी हो सकती है।
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निवेश पर भी दबाव : महंगाई बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घटता है। इसका असर शेयर बाजार और निवेश रिटर्न पर भी पड़ सकता है।
मिडिल क्लास को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खर्चों में चला जाता है। सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और फंड मैनेजर शशांक उडुपा के अनुसार लोगों को गैर-जरूरी खर्च कम करने और बचत बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि सिर्फ FD पर निर्भर रहने के बजाय SIP जारी रखें और निवेश को विविध बनाएं। सोना, बॉन्ड और डॉलर आधारित निवेश विकल्प महंगाई के दौर में बेहतर सुरक्षा दे सकते हैं।
क्या आगे और बढ़ सकती है मुश्किल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई 5.5% से 6% के बीच रह सकती है। अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा, मानसून कमजोर रहा और खाद्य संकट गहराया, तो आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में आम लोगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ने की आशंका है।

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