कुछ दिनों में दम तोड़ देगा सेक्स… अब बदलने लगी है इसकी परिभाषा

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  • ये भी पढ़ेआखिर तेजी से क्यों बढ़ रहा है लैब में बच्चा पैदा करने का ट्रेंड
  • गे, लेस्बियन और हेट्रोसेक्सुअल लोगों की तेजी से बढ़ रही है संख्या

नया लुक रिसर्च टीम

लखनऊ। तेजी से बदल रही दुनिया सेक्स के मामले में अब काफी आगे निकल चुकी है। पहले इसकी पूर्ति के लिए दो विपरीत लिंग के लोगों की जरूरत होती थी। लेकिन अब दुनिया भर में गे, लेस्बियन और हेट्रोसेक्सुअल लोगों की संख्या भारी संख्या में बढ़ रही है। क़ुदरती तौर पर सेक्स का मतलब सिर्फ़ बच्चे पैदा करने और परिवार बढ़ाने तक ही सीमित था। लेकिन साइंस की बदौलत अब सेक्स के बिना भी बच्चे पैदा किए जा सकते हैं। IVF और टेस्ट ट्यूब के ज़रिए ये पूरी तरह संभव है। अभी तक टेस्ट ट्यूब और IVF को वही लोग अपना रहे हैं, जो प्राकृतिक तरीक़े से बच्चा पैदा करने में असफल रहते थे। लेकिन अब वो भी अपनाने लगे हैं, जिन्होंने सेक्स का दूसरा नजरिया इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। हो सकता है आने वाले समय में सभी लोग इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दें, क्योंकि समाज में सेक्स के लिए अब गे और लेस्बियन जैसे रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

 

गौरतलब है कि दुनिया का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी साल 1978 में पैदा हुआ था। उसके बाद से अब तक क़रीब 80 लाख बच्चे इस तकनीक के ज़रिए दुनिया में आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरीक़े से पैदा हुए बच्चों की तादाद में भारी इज़ाफ़ा देखने को मिलेगा। हेनरी टी ग्रीली कहती हैं कि आने वाले समय में 20 से 40 साल की उम्र वाले सेहतमंद जोड़े लैब में गर्भ धारण कराना पसंद करेंगे। वो सेक्स बच्चा पैदा करने के लिए नहीं बल्कि ज़िस्मानी ज़रूरत और ख़ुशी के लिए करेंगे।

सवाल भी उठता है कि अगर बच्चे बिना सेक्स के पैदा हो सकते हैं तो फिर सेक्स की क्या ज़रूरत है? सेक्स का काम मर्द, औरत की जिस्मानी ज़रूरत को पूरा करना और उन दोनों का रिश्ता मज़बूत करना है। लेकिन यहां धर्म बड़ा रोड़ा है। हर धर्म सेक्स को लेकर कई तरह की पाबंदियां और नियम-क़ायदे बताता है। ईसाई धर्म में कहा गया है कि मर्द-औरत को सेक्स सिर्फ़ बच्चे पैदा करने के लिए करना चाहिए। अगर शारीरिक सुख और ख़ुशी के लिए सेक्स किया जाए तो वो अनैतिक है।

ईसाई धर्म की भी पुरानी किताब के सोलोमोन सॉन्ग में जोश के साथ सेक्स करने को बेहतरीन बताया गया है। साथ ही यौन संबंध को पति-पत्नी के बीच ही नहीं, बल्कि दो प्यार करने वालों के बीच की निजी चीज़ बताया गया है। ग्रीस के बड़े दार्शनिक अरस्तू इस विषय पर रोशनी डालते हुए कहते हैं कि प्यार कामुक इच्छाओं का अंत है। यानी अगर दो लोगों के बीच मोहब्बत है तो उसका मुकाम शारीरिक संबंध बनाने पर पूरा होता है। इनके मुताबिक़ सेक्स कोई मामूली काम नहीं है। बल्कि, ये किसी को प्यार करने और किसी का प्यार पाने के लिए एक ज़रूरी और सम्मानजनक काम है।

जबकि अमरीकी समाजशास्त्री डेविड हालपेरिन का कहना है कि सेक्स सिर्फ़ सेक्स के लिए होता है। उसमें ज़रूरत पूरी करने या कोई रिश्ता मज़बूत करने जैसी कोई चीज़ शामिल नहीं होती। हो सकता है कि जब इंसान ने सेक्स शुरू किया हो, तब वो सिर्फ़ शारीरिक ज़रूरत पूरी करने का माध्यम भर रहा हो। लेकिन जब परिवार बनने लगे, तो हो सकता है कि इसे रिश्ता मज़बूत करने का भी माध्यम समझा जाने लगा।

आज समाज पूरी तरह बदल गया है। आज सेक्स पैसे देकर भी किया जा रहा है। बहुत से लोग पेशेवर ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए सेक्स को हथियार बनाते हैं। ऐसे हालात में यक़ीनन किसी एक की शारीरिक ज़रूरत तो पूरी हो जाती है। लेकिन, रिश्ता मज़बूत होने या जज़्बाती तौर पर एक दूसरे से जुड़ने जैसी कोई चीज़ नहीं होती। ऐसे में फिर सेक्स का मतलब क्या है? इसका मतलब यही है कि सेक्स सिर्फ़ सेक्स के लिए किया जाए। इसमें बारीकियां ना तलाशी जाएं। जानकारों का कहना है कि भविष्य में सेक्स और भी ज़्यादा डिजिटल और सिंथेटिक हो जाएगा। यही नहीं भविष्य में सेक्स के और भी नए-नए तरीक़े सामने आ सकते हैं।

बच्चा पैदा करने के लिए नर और मादा के अंडों का मिलन ज़रूरी है। लेकिन गे और लेस्बियन के संदर्भ में ये संभव नहीं है। लिहाज़ा ऐसे लोग बच्चे की चाहत पूरी करने के लिए इस तकनीक का ख़ूब इस्तेमाल कर रहे हैं। बॉलीवुड में इसकी कई मिसालें मौजूद हैं। कमिटमेंट और शादी जैसे रिश्तों को लेकर भी बहुत से नए आइडिया अभी सामने आ सकते हैं। बीमारियों पर नियंत्रण के बाद इंसान की उम्र भी बढ़ गई है।

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