
स्वाइन फ्लू का बढ़ रहा खतरा
swine flu: देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायरल फीवर और इन्फ्लुएंजा के मामलों को लेकर चिंता बढ़ रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर में 60 वर्षीय महिला की H1N1 संक्रमण से मौत की खबर सामने आई है। वहीं, दिल्ली में मामलों में बढ़ोतरी और देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही फ्लू की खबरों ने स्वास्थ्य विभागों को सतर्क किया है। लेकिन इस स्थिति के बीच सबसे बड़ा सवाल है—क्या हर बुखार होने पर स्वाइन फ्लू यानी H1N1 का टेस्ट करवाना चाहिए? विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका जवाब है- जरूरी नहीं। टेस्ट की जरूरत मरीज के लक्षण, बीमारी की गंभीरता, जोखिम वाले कारकों और स्थानीय स्तर पर इन्फ्लुएंजा के प्रसार पर निर्भर करती है।
मौसम बदलते ही क्यों बढ़ते हैं फ्लू के मामले?
मानसून और मौसम में बदलाव के दौरान सांस से जुड़ी कई बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं। H1N1 अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है और हर संक्रमण को महामारी समझना सही नहीं है। भारत के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की वेबसाइट पर भी मौसमी इन्फ्लुएंजा (H1N1) के लिए अलग दिशानिर्देश और निगरानी संबंधी जानकारी उपलब्ध है। AIIMS दिल्ली के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने भी अगस्त 2026 में कहा था कि मानसून के दौरान सामान्य सर्दी-जुकाम, इन्फ्लुएंजा और दूसरी वायरल बीमारियों के मामले देखने को मिलते हैं और इनके लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
H1N1 समेत इन्फ्लुएंजा में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- बुखार या ठंड लगना
- खांसी
- गले में खराश
- नाक बहना या बंद होना
- सिरदर्द
- शरीर और मांसपेशियों में दर्द
- अत्यधिक थकान
हर मरीज में बुखार होना जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में बीमारी हल्की रह सकती है, जबकि कुछ मामलों में गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं।
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क्या हर बुखार में H1N1 टेस्ट करवाना चाहिए?
नहीं। हर बुखार में H1N1 टेस्ट करवाना जरूरी नहीं होता। इन्फ्लुएंजा की जांच का फैसला डॉक्टर मरीज की स्थिति और इस बात के आधार पर करते हैं कि टेस्ट का परिणाम इलाज या आगे की मेडिकल मैनेजमेंट को प्रभावित करेगा या नहीं। हाई-रिस्क मरीजों और गंभीर लक्षण वाले मरीजों में टेस्ट की जरूरत ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर सामान्य बुखार, हल्की खांसी या गले में खराश है और हालत स्थिर है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के तुरंत टेस्ट कराने की जरूरत नहीं हो सकती। लेकिन लक्षण बढ़ रहे हों या मरीज हाई-रिस्क कैटेगरी में आता हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
इन्फ्लुएंजा से गंभीर बीमारी का खतरा कुछ लोगों में ज्यादा रहता है। इनमें शामिल हैं:
- 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग
- छोटे बच्चे, खासकर 2 साल से कम उम्र के
- गर्भवती महिलाएं
- अस्थमा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारी वाले लोग
- कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज
- लंबे समय से फेफड़ों या अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग
इन समूहों में फ्लू के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्दी सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बुखार या खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या दबाव, लगातार चक्कर या भ्रम, बहुत ज्यादा कमजोरी, पेशाब कम होना या लक्षणों का ठीक होकर फिर बिगड़ना जैसे संकेत दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
H1N1 की जांच कैसे होती है?
इन्फ्लुएंजा की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के मुताबिक श्वसन तंत्र के नमूने की जांच करवा सकते हैं। मॉलिक्यूलर टेस्ट, जिसमें RT-PCR शामिल है, इन्फ्लुएंजा वायरस की पहचान के लिए अधिक संवेदनशील परीक्षणों में माना जाता है। हालांकि, कौन सा टेस्ट करवाना है और कब करवाना है, इसका फैसला मरीज की स्थिति देखकर डॉक्टर को करना चाहिए।
क्या यह कोरोना जैसी नई महामारी है?
फिलहाल सिर्फ मामलों में बढ़ोतरी के आधार पर इसे कोरोना जैसी नई महामारी कहना सही नहीं होगा। H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है और इसके मामले मौसम के साथ बढ़-घट सकते हैं। हालांकि, संक्रमण के गंभीर मामलों और मौतों को देखते हुए लापरवाही भी नहीं बरतनी चाहिए।
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