
HealthTips : अक्सर माना जाता है कि हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा 40 या 50 साल की उम्र के बाद बढ़ता है। इसी सोच के चलते कई लोग 30 की उम्र में ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी जरूरी जांचों को नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हृदय संबंधी कई जोखिम कारक कम उम्र में ही विकसित हो सकते हैं और लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बने रह सकते हैं। ऐसे में समय-समय पर अपने जरूरी हेल्थ नंबर्स की जानकारी रखना बेहद अहम हो जाता है।
उम्र से ज्यादा जरूरी है जोखिम को समझना
डॉक्टर दीपक संघवी, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और एगिलस डायग्नोस्टिक्स में मुंबई रेफरेंस लैब के प्रमुख, के मुताबिक हार्ट हेल्थ को सिर्फ उम्र के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है, ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, कोलेस्ट्रॉल ज्यादा है, वजन अधिक है, धूम्रपान की आदत है या शारीरिक गतिविधि कम है, तो हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।
खासकर हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर सकता है, जबकि शरीर के अंदर जोखिम कारक बढ़ रहे होते हैं। इसलिए केवल 40 साल की उम्र का इंतजार करना हर व्यक्ति के लिए सही रणनीति नहीं हो सकती।
कौन-कौन सी जांच हैं जरूरी?
दिल की सेहत पर नजर रखने के लिए शुरुआत कुछ सामान्य और आसानी से उपलब्ध जांचों से की जा सकती है।
ब्लड प्रेशर : हाई ब्लड प्रेशर अक्सर बिना किसी लक्षण के रहता है। इसलिए नियमित रूप से इसकी जांच कराना जरूरी है।
ब्लड शुगर : ब्लड शुगर की जांच से डायबिटीज या बढ़े हुए शुगर लेवल का पता लगाने में मदद मिलती है। खासकर परिवार में डायबिटीज का इतिहास या वजन अधिक होने पर इस पर ध्यान देना जरूरी है।
लिपिड प्रोफाइल : इस जांच के जरिए कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे स्तरों की जानकारी मिलती है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर जरूरी नहीं कि कोई लक्षण दिखाई दें।
वजन और कमर का घेरा : सिर्फ वजन ही नहीं, कमर के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी भी स्वास्थ्य जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसलिए वजन और कमर के आकार पर भी नजर रखना जरूरी है।
40 के बाद क्यों बढ़ जाती है चिंता?
उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और वजन बढ़ने जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 40 साल से पहले हर व्यक्ति को हर साल ढेरों मेडिकल टेस्ट कराने चाहिए।
जांच की जरूरत व्यक्ति की उम्र, परिवार के मेडिकल इतिहास, जीवनशैली, वजन और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपनी स्थिति के मुताबिक डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
लक्षणों का इंतजार न करें
हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए बीमारी के लक्षण सामने आने का इंतजार करने के बजाय अपने जरूरी हेल्थ नंबर्स पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे आंकड़ों में होने वाले बदलावों को समय रहते समझने से डॉक्टर को जोखिम का आकलन करने और जरूरत के मुताबिक सलाह देने में मदद मिल सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खान-पान, पर्याप्त नींद, वजन को नियंत्रित रखना और धूम्रपान से दूरी भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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