Health Tips: लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने, भोजन पचाने, ऊर्जा जमा करने और जरूरी प्रोटीन बनाने जैसे कई अहम काम करता है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि शराब पीने से ही लिवर खराब होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। रोजाना खाई जाने वाली कुछ चीजें भी लिवर में फैट जमा होने और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं। इनमें ज्यादा फैट वाला खाना, अधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड प्रमुख हैं।
शरीर की केमिकल फैक्ट्री है लिवर
लिवर को शरीर की केमिकल फैक्ट्री भी कहा जाता है। यह पित्त (Bile) बनाता है, जो शरीर में फैट को पचाने में मदद करता है। इसके अलावा लिवर अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में स्टोर करता है और जरूरत पड़ने पर उसे दोबारा ऊर्जा में बदल देता है।
लिवर शरीर में पहुंचने वाले कई हानिकारक पदार्थों को प्रोसेस करता है। यह खून के थक्के बनाने के लिए जरूरी प्रोटीन तैयार करने, दवाओं को तोड़ने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए लिवर की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
ज्यादा फैट वाला खाना बढ़ा सकता है फैटी लिवर का खतरा
अगर आप रोजाना तली-भुनी चीजें, फास्ट फूड, बर्गर, पिज्जा और ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना खाते हैं, तो सावधान हो जाइए। ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने और मोटापे की स्थिति में लिवर में भी फैट जमा हो सकता है। इससे फैटी लिवर की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। लिवर को स्वस्थ रखने के लिए तली-भुनी चीजों और जंक फूड का सेवन सीमित करना जरूरी है।
ज्यादा चीनी का सेवन भी लिवर के लिए नुकसानदायक
मीठा खाना किसे पसंद नहीं होता, लेकिन जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मिठाइयां, केक और मीठे पेय पदार्थों में मौजूद अतिरिक्त चीनी शरीर में कैलोरी बढ़ाती है। फ्रुक्टोज की अधिक मात्रा, खासकर मीठे पेय पदार्थों के जरिए लेने पर, लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है। लंबे समय तक अधिक चीनी का सेवन मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए मीठे पेय पदार्थों की जगह पानी और बिना अतिरिक्त चीनी वाले पेय को प्राथमिकता देना बेहतर है।
प्रोसेस्ड फूड से भी बिगड़ सकती है लिवर की सेहत
आजकल की व्यस्त जिंदगी में पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट फूड, सॉसेज, प्रोसेस्ड मीट, पेस्ट्री, केक और बेकरी उत्पादों का सेवन बढ़ गया है। इनमें कई बार अधिक नमक, चीनी, खराब फैट और कैलोरी होती हैं। इनका नियमित और अधिक सेवन वजन बढ़ने तथा मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ता है। ध्यान रखें कि हर प्रोसेस्ड फूड सीधे लिवर को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अधिक नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर है।
लिवर खराब होने के पीछे ये कारण भी हो सकते हैं
लिवर की बीमारी केवल खानपान या शराब की वजह से नहीं होती। इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
- हेपेटाइटिस बी और सी: ये वायरल संक्रमण लिवर में सूजन पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
- मोटापा और डायबिटीज: अधिक वजन, टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल लिवर में फैट जमा होने का जोखिम बढ़ाते हैं।
- दवाओं का गलत इस्तेमाल: कुछ दवाएं और हर्बल सप्लीमेंट लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन न करें।
- प्रदूषण और विषैले पदार्थ: कुछ हानिकारक रसायनों और पर्यावरणीय प्रदूषकों के संपर्क में आने से भी लिवर प्रभावित हो सकता है।
आपकी कमर का बढ़ता साइज भी दे सकता है लिवर की बीमारी का संकेत
कमर के आसपास बढ़ती चर्बी को सिर्फ मोटापे की समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। पेट के आसपास जमा अतिरिक्त फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक फैटी लिवर डिजीज के खतरे से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, केवल कमर का साइज देखकर लिवर की बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच करानी पड़ सकती है।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये पांच आदतें
- संतुलित भोजन करें: अपनी डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करें।
- शराब से दूरी बनाएं: शराब लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। इसका सेवन न करना लिवर की सेहत के लिए बेहतर है।
- वजन नियंत्रित रखें: नियमित व्यायाम करें और पेट के आसपास बढ़ती चर्बी को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।
- हेपेटाइटिस से बचाव करें: हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं। हेपेटाइटिस सी के लिए जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज कराएं। हेपेटाइटिस सी का टीका उपलब्ध नहीं है।
- बिना सलाह दवाएं न लें: दर्द निवारक दवाओं, सप्लीमेंट और हर्बल उत्पादों का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।
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