Netanyahu attacks Iran: इजरायल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में है। इजरायली मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख रोमन गोफमैन चुनाव से ठीक पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना चाहते थे। टाइम्स ऑफ इजरायल के हवाले से चैनल 12 की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रस्तावित अभियान का इजरायल के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने विरोध किया था।
अधिकारियों को आशंका थी कि चुनाव से ठीक पहले ईरान पर हमला करने से क्षेत्र में तनाव बेहद गंभीर हो सकता है। इससे इजरायल को एक बड़े सैन्य टकराव में उलझना पड़ सकता था और देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती थी। इसके बावजूद सैन्य अभियान की तैयारियां जारी थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक इजरायली सुरक्षा ऑपरेटिव से हुई गलती के कारण अमेरिका को इस गुप्त योजना की जानकारी मिल गई। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया और प्रस्तावित ऑपरेशन को रुकवा दिया। दूसरी तरफ, नेतन्याहू के कार्यालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इजरायली चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने का कोई एजेंडा नहीं था।
सेना प्रमुख और नेतन्याहू के बीच भी हुआ था टकराव
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब इजरायली मीडिया में नेतन्याहू और सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेदों की खबरें सामने आ रही थीं। चैनल 12 की एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, 25 अक्टूबर को नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ इयाल जमीर के बीच सैन्य आदेश को लेकर तीखी बहस हुई थी। बताया गया कि जमीर ने आदेश को तत्काल लागू करने का विरोध किया था। उन्होंने इस पर और विचार-विमर्श करने के साथ प्रधानमंत्री से लिखित मंजूरी देने की मांग भी की थी।
सैन्य अधिकारियों को डर था कि इस संवेदनशील समय में ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है। यह आशंका भी जताई गई कि राजनीतिक नेतृत्व चुनावी लाभ के लिए ईरान के मुद्दे का इस्तेमाल करना चाहता है। हालांकि, नेतन्याहू ने एक टीवी इंटरव्यू में सेना प्रमुख के साथ किसी भी तरह के विवाद की खबरों को बकवास बताया था। बाद की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज की सैन्य कार्रवाई की मांग का विरोध करने वाले शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों में जमीर अकेले थे।
ईरान से बातचीत के पक्ष में अमेरिका, नेतन्याहू चाहते थे सैन्य कार्रवाई
ईरान के खिलाफ संभावित इजरायली हमले की योजना ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मध्यस्थता से तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह सैन्य विकल्प को खुला रखते हुए भी बातचीत को और समय देना चाहते हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप से अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद ईरान के खिलाफ युद्ध दोबारा शुरू करने का आग्रह किया था। वहीं, ट्रंप चाहते थे कि इजरायल तेहरान के साथ चल रही बातचीत में किसी तरह की बाधा न डाले। नेतन्याहू को आशंका है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समझौता हो जाता है, तो इससे ईरान पर बना अंतरराष्ट्रीय दबाव कम हो सकता है।
ट्रंप बोले- ईरान को मात दे दी, बातचीत जारी है
हाल ही में व्हाइट हाउस के बाहर ईरान को लेकर पूछे गए सवाल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान को मात दे दी है और स्थिति उनके नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। ट्रंप ने अपने पुराने दावे को दोहराते हुए कहा कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो आज इजरायल और पश्चिम एशिया का अस्तित्व खतरे में होता।
दूसरी बार अमेरिका ने रोका इजरायल का बड़ा हमला
रिपोर्टों के मुताबिक, यह दूसरा मौका है जब वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ इजरायल के बड़े सैन्य हमले को रोकने में भूमिका निभाई है। इससे पहले फाइनेंशियल टाइम्स ने भी दावा किया था कि ट्रंप ने 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले एक अन्य व्यापक इजरायली सैन्य अभियान का विरोध किया था।
इन घटनाक्रमों से साफ है कि ईरान को लेकर इजरायल और अमेरिका के बीच रणनीतिक प्राथमिकताओं में अंतर बना हुआ है। जहां नेतन्याहू ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में हैं, वहीं ट्रंप फिलहाल कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान तलाशने को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं।
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