बहुत गहरी और सच्ची कविता

Poem NayaLook
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी

धीरे धीरे मैने जीवन जान लिया।
रंग बदलती दुनियां को पहचान लिया।।

सत्ता बदली शासन बदली… बदल गए इंसान।
जिसको देव समझ बैठा था वे निकले हैवान।।

घोर निराशा हुई मगर पहचान लिया।
सब कुछ मेरा भ्रम था मैने जान लिया।।

साधु वेष धारण कर रावण आया था।
जनक नंदिनी ने भी धोखा खाया था।।

अबलाये़ं अब भी न सुरक्षित हो पाईं।
चीर हरण की घटना हर युग मे छाई।।

अब द्रोपदी भला क्या संबल पायेगी।
कौन बढ़ाये चीर? कृष्ण ला पायेगी।।

सत्ता का सिंहासन ही शोषक होगा।
फिर किसके प्रति न्याय मिलेगा?क्या होगा।।

अंधे युग मे सारे राजा अंधे हैं।
सत्य सुशाशन.. ये सब इनके धंधे हैं।।

राम नाम का सत्य भला ये क्या जाने?
सत्ता लोलुप ,सिंहासन ही सच मानें।।

ये भी पढ़े

CRPF में चयन के बाद बेटा जब अपनी फुटपाथ पर काम करने वाली मां के पास पहुंचा तो सभी हो गए भावुक

ये भी पढ़े

हीरोपंती दिखाने वाले अनुज चौधरी पर FIR का आदेश, कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

ये भी पढ़े

कर्नाटकः अब DGP साहब भी अश्लील… एक वीडियो के चक्कर में ऐसे फंसे,

39a246e6 652d 4f1b a64e 84866e10c7a2
Litreture

ब्रह्मऋषि विश्वामित्र : त्रिवेणी कला संगम में भव्य नाट्य मंचन

नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों की गहराई को रंगमंच के माध्यम से प्रस्तुत करने की दिशा में आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन एक भव्य नाट्य प्रस्तुति ‘ब्रह्मऋषि विश्वामित्र’ लेकर आ रहा है।दिल्ली के प्रतिष्ठित त्रिवेणी कला संगम के ओपन थिएटर में आयोजित यह नाटक एक ऐसे असाधारण चरित्र की कथा है, जिसने राजसी […]

Read More
Untitled 7 copy 11
Analysis Central UP Litreture Politics

तिरछी नज़र: तवायफ़ी सीजफायर, नमाज़ बख्शवाने निकली थी, रोज़े गले पड़े

(एक लघुकथा बकलम मीर मुंशी जी) लखनऊ में नवाब नसीरुद्दीन हैदर का ज़माना चल रहा था। तवायफ़ी, कबूतरबाज़ी, मुर्ग़बाज़ी आदि अपनी चरम पे थी। लखनऊ की हवा में एक अज़ब सी रवानगी थी। इन्ही दिनों लखनऊ में दो रईस नवाब सलमान अली और नवाब शाहरुख ख़ान के बड़े चर्चे थे। दोनों ही बड़े रईस शौकीन […]

Read More
Untitled 3 copy
homeslider Litreture

लाईलाज बीमारी: बेरोजगारी पर करारा प्रहार

बदलते समय के साथ जहां एक ओर विकास और समृद्धि के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी और आर्थिक असमानता समाज के बड़े हिस्से के लिए एक गंभीर संकट बनती जा रही है। प्रस्तुत रचना इसी विडंबना को उजागर करती है-जहां कुछ वर्ग ऐश्वर्य में डूबा है, वहीं गरीब तबका रोटी और […]

Read More