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पत्रकारिता और बेरोज़गारी का पोस्टमार्टम: सच, संघर्ष और सवाल

  Journalism लखनऊ/बढ़नी। समाज की बुराइयों पर किसी न किसी को पहल करनी ही पड़ती है। क्यों न शुरुआत अपने ही पत्रकार समाज की कमियों पर आत्ममंथन से की जाए। आज शहरों और कस्बों में अखबारों तथा तथाकथित पत्रकारों की बाढ़-सी आ गई है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर “प्रेस” लिखा आसानी से दिखाई देता […]

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लाईलाज बीमारी: बेरोजगारी पर करारा प्रहार

बदलते समय के साथ जहां एक ओर विकास और समृद्धि के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी और आर्थिक असमानता समाज के बड़े हिस्से के लिए एक गंभीर संकट बनती जा रही है। प्रस्तुत रचना इसी विडंबना को उजागर करती है-जहां कुछ वर्ग ऐश्वर्य में डूबा है, वहीं गरीब तबका रोटी और […]

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