बंगाल से केरल तक खत्म हुआ लाल किला,भारतीय राजनीति में नया दौर शुरू

Untitled 19 copy
  • पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने बदला भारतीय राजनीति का वैचारिक नक्शा

यशोदा श्रीवास्तव

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा वैचारिक बदलाव दर्ज कर दिया है। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के बाद अब केरल से भी वामपंथी राजनीति की विदाई ने यह संकेत दे दिया है कि भारत में कम्युनिस्ट विचारधारा अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले पड़ोसी देश नेपाल में भी कम्युनिस्ट राजनीति का प्रभाव तेजी से कमजोर हुआ और अब भारत में भी इसका आखिरी मजबूत किला ढहता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक-दो चुनावी हार को किसी विचारधारा का अंत नहीं कहा जा सकता, लेकिन जब दशकों तक वामपंथ के गढ़ रहे पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और अब केरल में भी जनता ने दूसरी राजनीतिक शक्तियों को स्वीकार कर लिया है, तो यह साफ संकेत है कि वामपंथी राजनीति की वापसी अब बेहद कठिन हो गई है।

बंगाल से शुरू हुई थी गिरावट

पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों के पतन का श्रेय काफी हद तक ममता बनर्जी को दिया जाता है। कांग्रेस से राजनीति शुरू करने वाली ममता बनर्जी ने 1997 में तृणमूल कांग्रेस का गठन कर वामपंथ के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया। उनका लक्ष्य सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं था, बल्कि बंगाल से कम्युनिस्ट राजनीति का सफाया करना भी था। 2011 में ममता बनर्जी ने 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर कर इतिहास रच दिया। तब से बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल गई। हालांकि अब भाजपा ने उसी बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर कर नई राजनीतिक कहानी लिख दी है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि भाजपा और ममता बनर्जी के रिश्तों में कभी पूरी तरह दूरी नहीं आई। एनडीए सरकार में शामिल रहने से लेकर कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अप्रत्यक्ष समर्थन तक, दोनों के बीच राजनीतिक समीकरण समय-समय पर दिखाई देते रहे।

नेपाल से भारत तक कमजोर हुआ वामपंथ

नेपाल लंबे समय तक कम्युनिस्ट राजनीति का मजबूत केंद्र माना जाता था। लेकिन वहां भी नई राजनीतिक ताकतों के उभरने के बाद वामपंथी दलों का प्रभाव तेजी से घटा। अब भारत में भी यही तस्वीर दिखाई दे रही है। कभी बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा जैसे राज्यों में मजबूत पकड़ रखने वाले वामपंथी दल आज सीमित सीटों तक सिमट गए हैं। बिहार में वाम दलों के सिर्फ तीन विधायक हैं, झारखंड में दो और पश्चिम बंगाल में केवल एक विधायक बचा है। त्रिपुरा में भी वामपंथ अब विपक्ष की सीमित ताकत बनकर रह गया है।

ये भी पढ़े

योगी काबीना का बहुप्रतीक्षित विस्तार आज, ये छह नए मंत्री ले सकते हैं शपथ

केरल में भी ढहा आखिरी किला

भारत में वामपंथी राजनीति की शुरुआत केरल से मानी जाती है, जहां 1957 में पहली बार कम्युनिस्ट सरकार बनी थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में वामपंथ ने लंबे समय तक सत्ता संभाली। लेकिन अब केरल में भी सत्ता परिवर्तन ने यह साफ कर दिया है कि वामपंथ का आखिरी बड़ा आधार भी कमजोर पड़ चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में केरल की राजनीति कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबले तक सीमित हो सकती है। ऐसे में वाम दलों के लिए अपनी खोई जमीन वापस पाना आसान नहीं होगा।

वैचारिक बदलाव का संकेत

इन चुनाव परिणामों को सिर्फ सत्ता परिवर्तन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भारत की बदलती राजनीतिक सोच और वैचारिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। देश की राजनीति अब नए सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी विमर्श की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां वामपंथी विचारधारा का प्रभाव लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।


नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

Spread the love

Dialogue between students and officials
Education Uttar Pradesh

IAS-IPS-IFS अफसर छात्रों को देंगे करियर गाइडेंस

Dialogue between students and officials : उत्तर प्रदेश में इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से योगी सरकार ने नई पहल शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रदेश में तैनात युवा IAS, IPS और IFS अधिकारी हर महीने कम से कम एक […]

Spread the love
Read More
Crime News homeslider

एक पिता की दुर्दांत कहानी सुनकर दहल गई दिल्ली

पैर छुए, फिर किया वार, पिता ने किया प्रैग्नेंट बेटी का कत्ल DelhiCrime news : राजधानी दिल्ली से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, दक्षिणी दिल्ली में रहने वाली 18 वर्षीय गर्भवती युवती की उसके पिता ने कथित तौर पर हत्या कर दी और शव को आगरा के पास चंबल नदी में […]

Spread the love
Read More
Emraan Hashmi
Entertainment Uttar Pradesh

इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ के गानों पर सईद कादरी का बड़ा खुलासा

‘आवारापन 2’ में पुराने गानों का जादू Aawarapan 2: इमरान हाशमी की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘आवारापन 2’ रिलीज से पहले ही चर्चा में है। साल 2007 में आई ‘आवारापन’ अपनी कहानी के साथ-साथ दमदार म्यूजिक के लिए भी याद की जाती है। फिल्म के गाने ‘तो फिर आओ’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता’ आज भी संगीत […]

Spread the love
Read More