#TheCultureOfLucknow

Untitled 7 copy 11
Analysis Central UP Litreture Politics

लखनऊ तिरछी नज़र: तवायफ़ी सीजफायर, नमाज़ बख्शवाने निकली थी, रोज़े गले पड़े

(एक लघुकथा बकलम मीर मुंशी जी) लखनऊ में नवाब नसीरुद्दीन हैदर का ज़माना चल रहा था। तवायफ़ी, कबूतरबाज़ी, मुर्ग़बाज़ी आदि अपनी चरम पे थी। लखनऊ की हवा में एक अज़ब सी रवानगी थी। इन्ही दिनों लखनऊ में दो रईस नवाब सलमान अली और नवाब शाहरुख ख़ान के बड़े चर्चे थे। दोनों ही बड़े रईस शौकीन […]

Spread the love
Read More