
Pancreatic cancer medication: पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज को लेकर एक नई रिसर्च ने उम्मीद जगाई है। डाराक्सोनरासिब नाम की दवा ने पहले से इलाज करा चुके मेटास्टेटिक पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा के मरीजों में कीमोथेरेपी की तुलना में बेहतर नतीजे दिखाए हैं। इस अध्ययन के परिणाम प्रतिष्ठित न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन (NEJM) में प्रकाशित हुए हैं।
फेज़ 3 RASolute 302 ट्रायल में 500 मरीजों को शामिल किया गया था। इनमें 248 मरीजों को डाराक्सोनरासिब और 252 मरीजों को डॉक्टरों की पसंद के अनुसार कीमोथेरेपी दी गई। अध्ययन में पाया गया कि RAS G12 म्यूटेशन वाले मरीजों में डाराक्सोनरासिब लेने वालों का मीडियन ओवरऑल सर्वाइवल 13.2 महीने रहा, जबकि कीमोथेरेपी समूह में यह 6.6 महीने था। यानी मृत्यु के जोखिम में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई।
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KRAS/RAS म्यूटेशन को करता है टारगेट
पैंक्रियाटिक कैंसर के मामलों में RAS से जुड़े म्यूटेशन बेहद आम पाए जाते हैं। NEJM के अध्ययन के मुताबिक पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा के 90 प्रतिशत से अधिक ट्यूमर में ऑन्कोजेनिक RAS म्यूटेशन मौजूद होते हैं। डाराक्सोनरासिब एक ओरल RAS(ON) मल्टीसेलेक्टिव इनहिबिटर है, जो सक्रिय RAS प्रोटीन को निशाना बनाता है। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने के लिए मिलने वाले संकेतों को बाधित करना है।
सर्वाइवल के साथ बीमारी बढ़ने की रफ्तार भी हुई कम
अध्ययन में डाराक्सोनरासिब लेने वाले मरीजों में बीमारी के बढ़ने की अवधि भी कीमोथेरेपी की तुलना में ज्यादा रही। RAS G12 समूह में मीडियन प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल 7.3 महीने था, जबकि कीमोथेरेपी समूह में यह 3.5 महीने रहा। पूरे अध्ययन समूह में यह आंकड़ा क्रमशः 7.2 और 3.6 महीने रहा।
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हालांकि, दवा के कुछ साइड इफेक्ट भी सामने आए। Phase 3 अध्ययन में डाराक्सोनरासिब समूह के 61.8 प्रतिशत मरीजों में ग्रेड 3 या उससे अधिक के प्रतिकूल प्रभाव दर्ज किए गए, जबकि कीमोथेरेपी समूह में यह आंकड़ा 69.6 प्रतिशत था। उपचार से जुड़े साइड इफेक्ट के कारण दवा बंद करने वाले मरीजों का अनुपात डाराक्सोनरासिब समूह में 1.2 प्रतिशत और कीमोथेरेपी समूह में 11.2 प्रतिशत रहा।
अभी इसे हर मरीज के लिए इलाज मानना जल्दबाजी
रिसर्च के नतीजे निश्चित रूप से उत्साहजनक हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अध्ययन पहले से इलाज पा चुके मेटास्टेटिक पैंक्रियाटिक कैंसर मरीजों पर किया गया था। इसलिए इसके आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि डाराक्सोनरासिब अभी सभी पैंक्रियाटिक कैंसर मरीजों में पहली लाइन की कीमोथेरेपी की जगह ले चुकी है।
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