
बेडशीट से फंदा बनाकर नीम के पेड़ पर लटका मिला युवा बंदी
सुल्तानपुर जेल में पॉक्सो के आरोपी की संदिग्ध मौत, 21 वर्षीय कैदी ने की आत्महत्या
पॉक्सो के आरोपी बंदी का शव बैरक के पीछे पेड़ पर संदिग्ध हालत में मिला
Lucknow : कारागार मुख्यालय केवतामन प्रयासों के बाद भी प्रदेश की जेलों में आत्महत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही ही। चार दिन पहले सुल्तानपुर की जिला कारागार में युवा 21 वर्षीय विचाराधीन बंदी ने पेड़ से लटककर जीवनलीला को समाप्त कर लिया। इस घटना से जेल में हड़कंप मच गया।जेल अधिकारियों की सूचना पर जेल पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक घटना बीते सोमवार की रात करीब साढ़े आठ बजे की है। बंदी अमित कुमार उर्फ बड्डे यादव (21) का शव बैरक नंबर-3 के पीछे स्थित नीम के पेड़ के पास मिला। सूत्रों का कहना है कि बंदी ने बेडशीट का इस्तेमाल कर फंदा बनाया था। साथी बंदियों और सुरक्षाकर्मियों की नजर पड़ते ही जेल में हड़कंप मच गया। काफी मशक्कत के बाद सीढ़ी की मदद से शव को नीचे उतारा गया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम के जिला जेल पहुंची। इसके साथ ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
अमित कुमार मूल रूप से बाराबंकी जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र के अहिरन का पुरवा मजरे सुबेहा गांव का रहने वाला था. उसे करीब एक महीने पहले 31 अगस्त को सुल्तानपुर जिला जेल में शिफ्ट किया गया था। अमित को अमेठी जिले के जगदीशपुर थाने की पुलिस ने अपहरण, छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं के मामले में गिरफ्तार किया था। उल्लेखनीय है कि बीते छह माह के प्रदेश की जेलों में करीब एक दर्जन बंदी आत्महत्या की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। उधर एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र का हर बार की तरह इस बार भी फोन नहीं उठा।
बेअसर साबित हुए मुख्यालय के निर्देश!
प्रदेश के कारागार मुख्यालय ने जेलों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए किए गए प्रयास बेअसर ही दिखाई पड़े। मुख्यालय की ओर से बीते दिनों एक आदेश जारी किया गया कि जेलों में अंगौछा, रस्सी, पजामे के नारे और फीते वाले जूतों के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किए जाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही साथ जेल की बैरकों की नियमित तलाशी कराकर इन प्रतिबंधित वस्तुओं को निकलवाने का निर्देश दिया। इन निर्देशों का जेलों पर कोई असर नहीं दिखाई पड़ा। सीतापुर में अंगौछे से बंदी ने फांसी लगाकर जान दे दी थी तो सुल्तानपुर जेल में बेडशीट का फंदे के लिए इस्तेमाल किया और फांसी लगाकर जान दे दी।
नोट: सुल्तानपुर जेल की फोटो के साथ लगाएं।
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