
Saharanpur: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। वंदे मातरम को लेकर दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान मसूद ने कहा कि वह वंदे मातरम नहीं गाएंगे, हालांकि इसके सम्मान में खड़े होने की बात उन्होंने कही।
इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने पहले भी वंदे मातरम नहीं गाया और आगे भी इसे गाने का उनका इरादा नहीं है। उन्होंने अपने धार्मिक विश्वास का हवाला देते हुए कहा कि वह अल्लाह के अलावा किसी अन्य की इबादत नहीं कर सकते। मसूद ने यह भी कहा कि संविधान उन्हें अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और किसी को यह अधिकार उनसे छीनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
वंदे मातरम के सम्मान में खड़े होने की कही बात
कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि वह वंदे मातरम का सम्मान करते हैं और इसके सम्मान में खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को किसी गीत या नारे को गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। मसूद ने राष्ट्रगान का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए राष्ट्रगान सर्वोच्च है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम को लेकर राजनीति करने के बजाय लोगों को पहले अपने आचरण पर विचार करना चाहिए।
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उन्होंने यह भी दावा किया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में कांग्रेस के अधिवेशनों में वंदे मातरम गाया जाता था। मसूद ने कहा कि आज जो लोग इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर नजर आ रहे हैं, उनसे पहले राष्ट्रगान को पूरी तरह गाने के लिए भी कहा जाना चाहिए।
बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज
इमरान मसूद के इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां कुछ लोग उनके बयान को धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विरोधी दलों और आलोचकों की ओर से इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के संदर्भ में सवालों के घेरे में रखा जा रहा है।
वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक ऐतिहासिक राष्ट्रगीत है और इसे लेकर समय-समय पर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस होती रही है। इसी वजह से मसूद का ताजा बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
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पहले भी विवादों में रहे हैं इमरान मसूद
इमरान मसूद इससे पहले भी अपने कई बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2025 में भगत सिंह की तुलना हमास से किए जाने वाले कथित बयान को लेकर राजनीतिक विरोध हुआ था। बाद में इस मुद्दे पर उन्हें सफाई देनी पड़ी थी।
इसके अलावा लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट के मामले में आरोपी डॉ. उमर को लेकर दिए गए उनके कथित बयान पर भी विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके एक कथित बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था।
इमरान मसूद वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए एक विवादित बयान को लेकर भी सुर्खियों में आए थे। उस मामले में उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। सहारनपुर में 2014 के सांप्रदायिक तनाव के दौरान भी उनके खिलाफ आरोप लगाए गए थे, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था।
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