जलवायु परिवर्तन के कारण बिगड़ रही है आपकी नींद

Climate change

Climate change : अगर आपको हाल के महीनों में रात में बार-बार नींद टूटने, बेचैनी महसूस होने या सुबह उठने पर थकान का अनुभव हो रहा है, तो इसकी एक बड़ी वजह बढ़ती गर्मी भी हो सकती है। जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर अब सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की नींद और स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में सामने आया है कि देश के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान और उमस के कारण लोगों की सालाना नींद में दर्जनों घंटों की कमी आ रही है।

हर साल कम हो रही है लोगों की नींद

ग्लोबल क्लाइमेट रिसर्च संगठन क्लाइमेट सेंट्रल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे गर्म और उमस वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग हर साल औसतन 90 घंटे तक कम नींद ले पा रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि रात के समय बढ़ता तापमान शरीर के प्राकृतिक तापमान संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे गहरी और आरामदायक नींद लेना मुश्किल हो जाता है। पर्याप्त नींद न मिलने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। लगातार नींद की कमी तनाव, डिप्रेशन, कमजोर इम्यूनिटी, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।

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दक्षिण भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट में दक्षिण भारत के कई राज्यों को दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जहां गर्म रातों का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इनमें तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना प्रमुख हैं। इन राज्यों में दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। खासतौर पर घनी आबादी वाले शहरों में सीमेंट-कंक्रीट और कम हरियाली के कारण गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे लोगों की नींद प्रभावित होती है।

पुडुचेरी में सबसे ज्यादा नुकसान

पुडुचेरी में रहने वाले लोगों की हर साल औसतन 92 घंटे की नींद कम हो रही है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद आंध्र प्रदेश में यह औसत 88.6 घंटे और केरल में 88.3 घंटे दर्ज किया गया है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रात का तापमान सामान्य से अधिक रहता है तो शरीर को आराम की स्थिति में पहुंचने में अधिक समय लगता है, जिससे नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

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महानगरों में चेन्नई सबसे आगे

देश के प्रमुख महानगरों की बात करें तो चेन्नई सबसे अधिक प्रभावित शहर बनकर सामने आया है। यहां रहने वाले लोगों की हर साल औसतन 93 घंटे की नींद कम हो रही है। इसके बाद मुंबई में करीब 84 घंटे और कोलकाता में लगभग 80 घंटे की औसत कमी दर्ज की गई है। वहीं बेंगलुरु में भी गर्म रातों के कारण अतिरिक्त नींद का नुकसान देखने को मिला है।

कैसे बचें इस समस्या से?

गर्मियों में सोने से पहले कमरे को ठंडा रखने की कोशिश करें, हल्के सूती कपड़े पहनें, पर्याप्त पानी पिएं और सोने से पहले कैफीन या भारी भोजन से बचें। यदि लंबे समय तक नींद की समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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