- दाद-खाज-फंगल इन्फेक्शन का रामबाण, आयुष मंत्रालय भी मानता है ‘प्रकृति का अनमोल उपहार’
भारत की मिट्टी में उगने वाला सुनहरा-पीला फूलों वाला पौधा ‘दाद मर्दन’ (वैज्ञानिक नाम: Cassia alata) सदियों से त्वचा रोगों का सबसे भरोसेमंद इलाज रहा है। आयुष मंत्रालय इसे “प्रकृति का अनमोल उपहार” कहता है। गांवों में ‘कैंडल बुश’ या ‘रिंगवर्म बुश’ के नाम से मशहूर यह 1-4 मीटर ऊंचा पौधा दाद, खाज, खुजली, एक्जिमा, फंगल इन्फेक्शन और कीड़े के काटने में रामबाण साबित होता है।
दाद मर्दन की चौड़ी पत्तियां (6-14 जोड़ी) और चमकीले पीले फूल गुच्छों में लगते हैं। पत्तियों में फ्लेवोनॉयड्स, एल्कलॉइड्स, ग्लाइकोसाइड्स और शक्तिशाली एंटी-फंगल तत्व भरपूर होते हैं। आयुर्वेद में इन्हें पीसकर लेप बनाया जाता है। प्रभावित जगह पर दिन में 2-3 बार लगाने से 4-5 दिन में दाद-खाज पूरी तरह गायब हो जाती है। सूखी पत्तियां सालभर सुरक्षित रहती हैं, काढ़ा बनाकर पीने से शरीर डिटॉक्स होता है, पाचन दुरुस्त रहता है।
इसके प्रमुख फायदे:
- एंटी-फंगल: फंगस को जड़ से खत्म करता है।
- एंटी-इन्फ्लेमेटरी: सूजन-जलन तुरंत कम करता है।
- एंटी-बैक्टीरियल: घाव जल्दी भरते हैं।
- एंटीऑक्सीडेंट: त्वचा में निखार लाता है, एजिंग रोकता है।
- पेट साफ करता है, कब्ज-गैस में राहत देता है।
भारत के हर कोने में यह पौधा आसानी से उग जाता है। गांवों में आज भी लोग घर-आंगन में लगाते हैं। बारिश के मौसम में खुद-ब-खुद उग आता है। पत्तियां तोड़कर धो लें, पीसकर लेप बना लें, कोई साइड इफेक्ट नहीं। कीड़े काटने पर तुरंत लगाएं तो जहर नहीं फैलता।
आयुष मंत्रालय की रिपोर्ट में इसे “सुरक्षित और असरदार” बताया गया है। फिर भी पहली बार इस्तेमाल करें तो आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें, खासकर गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे। दाद मर्दन सचमुच प्रकृति का दिया वो खजाना है, जिसे देखकर लगता है – इलाज घर के बाहर ही उग रहा है!
