नवलपरासी निर्वाचन क्षेत्र संख्या–एक…जीत को दोहराने की कोशिश में उद्योगपति विनोद कुमार चौधरी

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  • साख बचाने की दौड़ में हृदयेश त्रिपाठी, बाजी मारने के दांव में लगे हैं विक्रम खनाल
  • चतुष्कोणीय मुकाबला फंसे दिग्गज राजनेता

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू/नवलपरासी। भारतीय सीमा से सटे नेपाल के पश्चिम नवलपरासी निर्वाचन क्षेत्र संख्या 1 से प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन–2079 में नेपाली कांग्रेस से निर्वाचित उद्योगपति विनोद कुमार चौधरी एक बार फिर सांसद बनने की तैयारी के साथ चुनावी प्रचार में जुटे हुए हैं। चौधरी जब मतदाताओं के बीच जाकर दोबारा जीत दर्ज करने की कोशिश कर रहे हैं, तभी उन्हें जसपा के हृदयेश त्रिपाठी और अपनी ही पार्टी कांग्रेस छोड़कर अब रास्वपा से उम्मीदवार बने विक्रम खनाल कड़ी चुनौती दे रहे हैं। सांसद रहते हुए सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, सुस्ता के विद्युतीकरण, पुल निर्माण जैसे विकास कार्यों की सूची गिनाते हुए चौधरी मतदाताओं के पास पहुंच रहे हैं। हालांकि, कुछ मतदाता उनके द्वारा चुनाव के समय किए गए सभी वादे पूरे न होने की शिकायत भी कर रहे हैं। इस पर चौधरी का कहना है कि कार्यकाल पूरा होने से पहले ही संसद भंग हो गई थी, इसलिए अब उन्हें एक बार और मौका दिया जाए ताकि वे सभी अधूरे वादे पूरे कर सकें। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी हृदयेश त्रिपाठी और विक्रम खनाल का आरोप है कि चौधरी सांसद रहते हुए अपने वादों के अनुरूप काम नहीं कर पाए, जबकि उन्होंने अपने-अपने कार्यकाल में क्षेत्र का विकास किया है। दोनों का साझा नारा है “बाहरी नहीं, अपने गांव-ठांव के उम्मीदवार को वोट दीजिए।

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साख वापस पाने की कोशिश में त्रिपाठी

इस निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार चुनाव जीत चुके हृदयेश त्रिपाठी अपनी खोई हुई सीट वापस पाने की कोशिश में हैं। वर्ष 2048 से अब तक हुए सभी सात चुनावों में उम्मीदवार रहे त्रिपाठी इस बार आठवीं बार जसपा से चुनाव मैदान में उतरे हैं। नेपाल की राजनीति के चतुर खिलाड़ी माने जाने वाले त्रिपाठी ने 2048, 2051, 2056, 2064 और 2074 में जीत हासिल की थी, जबकि 2070 के संविधान सभा और 2079 के प्रतिनिधि सभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। दोनों ही बार वे नेपाली कांग्रेस से हारे। पिछले चुनाव में उन्हें विनोद चौधरी से हार मिली थी। राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने में माहिर त्रिपाठी ने 2074 में एमाले के चुनाव चिह्न से चुनाव जीत लिया था। 2079 में जब चौधरी कांग्रेस के उम्मीदवार बने, तब उन्हें हराने के लिए त्रिपाठी ने अलग रणनीति अपनाई और अपनी पार्टी जनता प्रगतिशील पार्टी (जप्रपा) के चुनाव चिह्न पर एमाले के समर्थन से चुनाव लड़ा। इसके बावजूद वे 7,191 मतों से हार गए। उस चुनाव में चौधरी को 29,519 और त्रिपाठी को 22,328 मत मिले थे। अब चार मधेशवादी दलों के एकीकरण से बनी जसपा नेपाल से उम्मीदवार बने त्रिपाठी के लिए अंकगणित अनुकूल नहीं दिखता। 2079 में ये चारों दल समानुपातिक में मिलकर केवल 4,273 मत ही जुटा पाए थे। स्थानीय निकायों में भी नेपाली कांग्रेस की स्थिति मजबूत है, जिससे त्रिपाठी की राह आसान नहीं मानी जा रही।

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नई ताकत के सहारे जीत की उम्मीद में खनाल

चौधरी के लिए एक और बड़ी चुनौती विक्रम खनाल हैं, जो कांग्रेस से टिकट न मिलने के बाद नामांकन से ठीक एक दिन पहले रास्वपा में शामिल होकर उम्मीदवार बने। कांग्रेस के लुम्बिनी प्रदेश महामंत्री रह चुके खनाल पर पार्टी ने चौधरी को हराने की कोशिश का आरोप लगाकर कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में कार्रवाई वापस ले ली गई, लेकिन अंततः खनाल रास्वपा से ही चुनाव लड़ रहे हैं। वे 2070 में कांग्रेस से संविधान सभा सदस्य चुने गए थे और 2074 में प्रदेश सभा चुनाव हार गए थे। कांग्रेस से असंतुष्ट मतदाताओं और रास्वपा की बढ़ती चर्चा के सहारे खनाल जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सहानुभूति पाना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा। पिछले चुनाव में रास्वपा तीसरे स्थान पर रही थी। उसके उम्मीदवार को 12,499 मत मिले थे और समानुपातिक में 10,718 मत प्राप्त हुए थे, जो जीत के लिए पर्याप्त नहीं माने जा रहे।

अंकगणित में एमाले दूसरे स्थान पर

भले ही चर्चा चौधरी, त्रिपाठी और खनाल की हो, लेकिन अंकगणित के हिसाब से एमाले दूसरी सबसे बड़ी शक्ति है। इस बार पार्टी ने राम प्रसाद पाण्डे को उम्मीदवार बनाया है। 2079 के समानुपातिक मतों में कांग्रेस पहले (23,515) और एमाले दूसरे (17,172) स्थान पर था। इसके बाद रास्वपा, जनमत पार्टी और अन्य दल रहे।

अन्य उम्मीदवार : इस क्षेत्र में कुल 26 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 11 स्वतंत्र भी शामिल हैं। प्रमुख दलों के अलावा मंगोल नेशनल ऑर्गनाइजेशन, जनमत पार्टी, राष्ट्रीय जनमोर्चा, राप्रपा, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी समेत कई दलों के उम्मीदवार चुनावी दौड़ में हैं। जिले में कुल 2,54,157 मतदाता हैं, जबकि निर्वाचन क्षेत्र नंबर 1 में 1,23,080 मतदाता मतदान करेंगे।

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