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पत्रकारिता और बेरोज़गारी का पोस्टमार्टम: सच, संघर्ष और सवाल

  Journalism लखनऊ/बढ़नी। समाज की बुराइयों पर किसी न किसी को पहल करनी ही पड़ती है। क्यों न शुरुआत अपने ही पत्रकार समाज की कमियों पर आत्ममंथन से की जाए। आज शहरों और कस्बों में अखबारों तथा तथाकथित पत्रकारों की बाढ़-सी आ गई है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर “प्रेस” लिखा आसानी से दिखाई देता […]

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