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गुलदस्ता पत्रकारिता का स्वर्णकाल: खबरें गईं, बुके आ गए!
गुलदस्ता पत्रकारिता का स्वर्णकाल: खबरें गईं, बुके आ गए! भास्कर दुबे पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है। कभी पत्रकार सत्ता से सवाल पूछते थे, अब फूलों की खुशबू के साथ शुभकामनाएं पहुंचाते हैं। वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो आज की पत्रकारिता का सबसे जीवंत, सक्रिय और फलता-फूलता क्षेत्र “गुलदस्ता पत्रकारिता” है। राजधानी के लाल बहादुर […]
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Purvanchal
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर गोरखपुर में गोष्ठी, पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर जोर
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर गोजये ने किया गोष्ठी का आयोजन पत्रकारिता को अन्य स्तंभों से दूरी बनानी होगी: प्रो. अशोक सोशल मीडिया के फैलाव ने पारंपरिक मीडिया का दायरा संकुचित किया: डॉ हर्ष सोशल मीडिया ने विश्वसनीयता का संकट बढ़ाया: प्रो. धर्मव्रत सोशल मीडिया ने पत्रकारिता को बड़ी क्षति पहुंचाई: डॉ. त्रिपाठी पत्रकारिता को अपना […]
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