स्कूल बसों का रंग हमेशा पीला ही क्यों होता है? जानिए इसके पीछे छिपा साइंस

New Delhi: आपने स्कूल बसों को अक्सर पीले रंग में ही देखा होगा। चाहे शहर कोई भी हो या स्कूल कोई भी, ज्यादातर स्कूल बसों का रंग पीला ही नजर आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्कूल बसों को लाल, सफेद, नीले या किसी दूसरे रंग में क्यों नहीं रंगा जाता? क्या इसके पीछे सिर्फ एक परंपरा है या फिर इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह भी है?

दरअसल, स्कूल बसों का पीला रंग बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिक तौर पर पीला रंग दूर से जल्दी दिखाई देता है और खराब मौसम या कम रोशनी की स्थिति में भी इसकी पहचान अपेक्षाकृत आसान रहती है। यही वजह है कि स्कूल बसों के लिए पीले रंग को प्राथमिकता दी गई।

पीला रंग दूर से जल्दी दिखाई देता है

स्कूल बसों के पीले रंग का सबसे बड़ा फायदा इसकी विजिबिलिटी है। पीला रंग सड़क पर दूर से आसानी से नजर आ जाता है। खासकर सुबह-शाम की कम रोशनी, बारिश या धुंध जैसी परिस्थितियों में यह रंग वाहन को पहचानने में मदद करता है। इसका सीधा फायदा यह है कि दूसरे वाहन चालकों को स्कूल बस के बारे में पहले से पता चल सकता है और वे अपनी गति को नियंत्रित कर सकते हैं।

पेरिफेरल विजन में भी मददगार

पीले रंग को चुनने के पीछे इंसानी आंखों की पेरिफेरल विजन, यानी सामने देखते हुए अगल-बगल की चीजों को पहचानने की क्षमता, भी एक महत्वपूर्ण वजह मानी जाती है।सड़क पर वाहन चलाते समय चालक का पूरा ध्यान हमेशा सामने की ओर होता है। ऐसे में बगल से गुजरने वाली पीली बस अपेक्षाकृत जल्दी नजर आ सकती है। इससे चालक को सावधान होने और जरूरत पड़ने पर वाहन की गति कम करने का मौका मिलता है।

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पीला रंग देता है सावधानी का संकेत

पीला रंग ट्रैफिक व्यवस्था में भी सावधानी का संकेत माना जाता है। ट्रैफिक सिग्नल में पीली बत्ती वाहन चालकों को सतर्क रहने और गति नियंत्रित करने का संकेत देती है।स्कूल बस के मामले में भी पीला रंग दूर से ही लोगों का ध्यान खींचता है। इससे सड़क पर दूसरे वाहन चालक स्कूल बस को सामान्य वाहन की तुलना में अलग पहचान पाते हैं और अतिरिक्त सावधानी बरत सकते हैं।

काले अक्षर पीले रंग पर साफ दिखाई देते हैं

स्कूल बसों पर अक्सर काले रंग से ‘SCHOOL BUS’ या अन्य जरूरी जानकारी लिखी होती है। पीले और काले रंग का यह कॉम्बिनेशन दूर से आसानी से पढ़ा और पहचाना जा सकता है।यानी बस का रंग सिर्फ आकर्षण के लिए नहीं, बल्कि उसकी पहचान को स्पष्ट बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

स्कूल बसों का पीला रंग कब से शुरू हुआ?

स्कूल बसों को पीला रंग देने की शुरुआत का इतिहास अमेरिका से जुड़ा है। वर्ष 1939 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रैंक साइर ने स्कूल बसों के रंग और डिजाइन को लेकर एक मानक तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की थी।

उद्देश्य था ऐसा रंग चुनना, जिसे अलग-अलग मौसम और रोशनी की परिस्थितियों में आसानी से पहचाना जा सके। इसके बाद पीले रंग के एक खास शेड को स्कूल बसों के लिए मान्यता मिली और समय के साथ यह व्यवस्था कई देशों में प्रचलित हो गई।

भारत में भी स्कूल बसों के लिए सुरक्षा नियम

भारत में स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर कई नियम और दिशा-निर्देश लागू हैं। स्कूल बसों की पहचान स्पष्ट हो, इसके लिए बस के आगे और पीछे ‘स्कूल बस’ लिखा होना जरूरी होता है। वहीं स्कूल के काम के लिए चलने वाली अन्य बसों पर भी उनकी पहचान से जुड़े संकेत दिए जाते हैं।सुरक्षा के लिहाज से बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी एग्जिट और फर्स्ट एड किट जैसी जरूरी सुविधाएं भी होनी चाहिए।

इसलिए सिर्फ रंग नहीं, सुरक्षा का संकेत है पीला रंग

कुल मिलाकर स्कूल बस का पीला रंग कोई महज परंपरा या डिजाइन का हिस्सा नहीं है। इसके पीछे विजिबिलिटी, सड़क सुरक्षा, इंसानी दृष्टि और वाहन की आसान पहचान जैसे कई कारण जुड़े हुए हैं।यही वजह है कि सड़क पर दूर से नजर आती पीली स्कूल बस वास्तव में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी और पहचान संकेत का काम करती है।

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