हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ी, इसे विश्व की प्रमुख भाषा बनाने पर जोर

हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही: मंजुला उपाध्याय

हिंदी दिवस पर ‘प्रेमचंद के स्त्री विमर्श’ पर हुई विचार गोष्ठी

Hindi Diwas : हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को कालीचरण पीजी कॉलेज में हिंदी भाषा की वैश्विक भूमिका और साहित्यकार प्रेमचंद के स्त्री विमर्श पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदी की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता, ज्ञान-विज्ञान, व्यापार, चिकित्सा और जनजीवन में इसके बढ़ते प्रयोग पर चर्चा की। साथ ही हिंदी को विश्व की प्रमुख भाषा बनाने के लिए इसके सरल, सहज और व्यापक प्रयोग पर जोर दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रबंधक इं. वीके मिश्र ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा, “हिंदी हो विश्व की नंबर एक भाषा”। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सामान्य बोलचाल के साथ-साथ ज्ञान-विज्ञान, व्यापार, चिकित्सा और लोकजीवन में हिंदी का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। हिंदी की यही व्यापक उपस्थिति इसे विश्व की नंबर एक भाषा बनाने का मजबूत आधार तैयार कर रही है।

 

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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नवयुग कन्या पीजी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि हिंदी की सर्वसमाज ग्राह्यता और वैश्विक व्यापार में बढ़ता प्रभाव इसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और दैनिक जीवन में अधिक से अधिक प्रयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता जिला सेवायोजन अधिकारी प्रज्ञा त्रिपाठी ने हिंदी को लोकप्रिय और जनभाषा बनाने में साहित्यकार प्रेमचंद के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी सरल, सहज और प्रभावशाली भाषा के माध्यम से हिंदी को आमजन के लिए सर्वग्राह्य बनाया। बदलते समय के बावजूद प्रेमचंद की भाषा, विचार और साहित्य आज भी प्रासंगिक हैं।

संगोष्ठी के विषय ‘हिंदी के वर्तमान स्वरूप में प्रेमचंद के स्त्री विमर्श’ पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. चंद्रमोहन उपाध्याय ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य में महिलाओं के जीवन से जुड़े सामाजिक मुद्दों और कुरीतियों के चित्रण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने बेमेल विवाह, विधवा विवाह और लड़कियों को बेचने जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ अपने साहित्य के माध्यम से प्रभावी आवाज उठाई। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्रभारी प्रो. मनोज कुमार पाण्डेय ने किया। अंत में प्राचार्य प्रो. चंद्रमोहन उपाध्याय ने मंचस्थ अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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