
Heart Attack in Women : आज के दौर में फिटनेस को लेकर महिलाओं में जागरूकता तेजी से बढ़ी है। महिलाएं नियमित एक्सरसाइज करती हैं, शारीरिक रूप से एक्टिव रहती हैं और फिट रहने के लिए अपनी डाइट पर भी ध्यान देती हैं। इसके बावजूद कम उम्र में हार्ट से जुड़ी समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि 30 से 40 साल की उम्र में फिट दिखने वाली महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ सकता है? कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल बाहर से फिट दिखना ही दिल को स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। शरीर के अंदर मौजूद कुछ जोखिम कारक लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं और आगे चलकर हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी हो सकते हैं कारण
हृदय रोग को अक्सर बढ़ती उम्र, मोटापे और डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हार्ट अटैक से जुड़ी प्रक्रिया इससे काफी पहले शुरू हो सकती है। हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और कम उम्र में हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास ऐसे जोखिम कारक हैं, जो बाहर से स्वस्थ नजर आने वाली महिलाओं में भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए सिर्फ वजन सामान्य होना या नियमित एक्सरसाइज करना पर्याप्त नहीं है। समय-समय पर जरूरी स्वास्थ्य जांच कराना भी महत्वपूर्ण है।
प्रेग्नेंसी से जुड़ी इन समस्याओं को न करें नजरअंदाज
महिलाओं में हृदय स्वास्थ्य को समझते समय उनके प्रजनन संबंधी इतिहास पर भी ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्री-एक्लेम्पसिया, गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी स्थितियों को डिलीवरी के बाद पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये स्थितियां भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। इसके अलावा PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) से जूझ रही महिलाओं में कुछ मेटाबॉलिक जोखिम कारक भी हो सकते हैं, जिनकी निगरानी जरूरी है।
मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव भी डाल सकते हैं असर
मेनोपॉज के आसपास शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। एस्ट्रोजन ब्लड वेसल्स के कामकाज और लिपिड मेटाबॉलिज्म में भूमिका निभाता है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने पर कोलेस्ट्रॉल में बदलाव, पेट के आसपास फैट बढ़ना और अन्य हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में होने वाले हार्ट अटैक को सिर्फ हार्मोनल बदलावों से जोड़ना सही नहीं है। इसके पीछे अन्य संभावित कारणों की भी चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं
एक बड़ी समस्या यह है कि कई महिलाएं हार्ट अटैक के लक्षणों को यह सोचकर नजरअंदाज कर देती हैं कि वे अभी कम उम्र की हैं या फिट हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक हमेशा तेज सीने के दर्द के रूप में सामने आए, यह जरूरी नहीं है। इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं: सीने में दबाव या भारीपन , सांस फूलना , अचानक या असामान्य थकान , ज्यादा पसीना आना , मितली , पीठ, जबड़े या बांह में दर्द या असहजता इन लक्षणों को सिर्फ गैस, एसिडिटी, चिंता या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
फिटनेस के साथ इन चीजों पर भी रखें नजर
विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं को अपनी फिटनेस के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड ग्लूकोज के स्तर की भी जानकारी रखनी चाहिए। खासकर उन महिलाओं को अधिक सतर्क रहना चाहिए, जिनके परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है। यानी दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज और वजन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। पारिवारिक इतिहास, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और महिलाओं से जुड़े विशेष स्वास्थ्य जोखिमों को भी समय पर समझना और डॉक्टर से चर्चा करना जरूरी है।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
खबरों में अपडेट रहना हमारी आदत है और सबसे आगे रहना मेरा जुनून। अब नया लुक ऐप भी ले आया है। आप सभी से अनुरोध है कि आप इसे अपना प्यार, दुलार और आशीर्वाद दें। आप सभी से निवेदन है कि मेरा न्यूज ऐप अपने अपने फोन में इंस्टॉल कर लीजिए। मैं आप सभी का आभारी रहूंगा…। https://play।google।com/store/apps/details?id=com।app।nayalooknews
यह भी पढें
पुणे में नाबालिग से कथित यौन शोषण, 52 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार
भारतीय रेलवे की नई पहल, LNG से चलेगी ट्रेन; 40% तक कम होगा डीजल खर्च
पुणे में नाबालिग से कथित यौन शोषण, 52 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार
संभल के श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम को मिली बम से उड़ाने की धमकी


2 thoughts on “फिट दिखने वाली महिलाओं को भी क्यों आ रहा हार्ट अटैक? जानें बड़े कारण”
Comments are closed.