भारत में कैंसर से कैसे बचें? जानिए समय पर पहचान और बचाव के तीन सबसे असरदार तरीके

Cancer Prevention

Cancer Prevention :  भारत में कैंसर तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। आधुनिक इलाज, बेहतर अस्पताल और नई तकनीकों के बावजूद हर साल लाखों लोग कैंसर से अपनी जान गंवा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अधिकांश मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी अंतिम या गंभीर चरण में पहुंच चुकी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कैंसर की समय पर पहचान हो जाए और जागरूकता बढ़े, तो बड़ी संख्या में मौतों को रोका जा सकता है।

भारत में कैंसर का बढ़ता खतरा

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में लगभग 15.33 लाख नए कैंसर मरीज सामने आए, जबकि 8.74 लाख लोगों की मौत इस बीमारी से हुई। 2015 से 2024 के बीच कैंसर के मामलों में करीब 10.4 प्रतिशत और मौतों में 28.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर नौ में से एक भारतीय को जीवन में कभी न कभी कैंसर होने का खतरा रहता है। पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में यह जोखिम और भी अधिक है।

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देर से इलाज सबसे बड़ी चुनौती

दिल्ली के एक्शन कैंसर हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. जे. बी. शर्मा के अनुसार, भारत में 70 प्रतिशत से अधिक मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब कैंसर काफी बढ़ चुका होता है। इस स्थिति में इलाज महंगा होने के साथ-साथ सफल होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है। वे बताते हैं कि कैंसर केवल स्वास्थ्य संकट नहीं है, बल्कि आर्थिक संकट भी बन जाता है। इलाज के भारी खर्च के कारण बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं।

भारत कैंसर से कैसे जीत सकता है?

 स्कूल स्तर से शुरू हो स्वास्थ्य शिक्षा

विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर की रोकथाम बचपन से ही शुरू होनी चाहिए। स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, नशे से दूरी और टीकाकरण जैसी आदतों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। इससे भविष्य में कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

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 अपनाएं ‘तीन सप्ताह’ का नियम

यदि शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

जैसे—

  • लगातार खांसी
  • बिना कारण वजन घटना
  • शरीर में गांठ
  • लगातार दर्द
  • असामान्य रक्तस्राव
  • लंबे समय तक घाव का न भरना

इन लक्षणों की समय रहते जांच कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद कर सकती है।

 नई तकनीक से होगी जल्दी पहचान

अब चिकित्सा विज्ञान में मल्टी-कैंसर अर्ली डिटेक्शन (MCED) जैसी तकनीक विकसित हो रही है। यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसके जरिए एक ही सैंपल से कई प्रकार के कैंसर के शुरुआती संकेतों की पहचान संभव हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक बड़े स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग को आसान बना सकती है। हालांकि, इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले और वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता है।

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