30 लाख लोगों की आजीविका का साधन बना हथकरघा-पावरलूम:योगी

40 हजार हस्तशिल्पियों को बिजली मद में मिला 109 करोड़ रुपये का लाभ, कारीगरों के उत्थान पर जोर

National Handloom Day 2026 : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारीगरों व बुनकरों के उत्थान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यूपी में हथकरघा और पावरलूम से करीब 30 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी है। सरकार ने 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को विद्युत सुविधा के रूप में 109 करोड़ रुपये का लाभ दिया है। सीएम ने हथकरघा उत्पादों को डिजाइन, तकनीक, पैकेजिंग व मार्केटिंग के जरिये वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को उपहार में देने की अपील भी की।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को लोकभवन सभागार में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह-2026 के अवसर पर संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर विशिष्ट कार्यों के लिए बुनकरों को सम्मानित किया और विभिन्न योजनाओं के तहत बुनकरों व लाभार्थियों को चेक भी वितरित किए। सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न उत्पादों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारी विरासत है। ढाई लाख परिवार यानी लगभग 14-15 लाख लोग इस व्यवसाय पर आश्रित हैं। इसमें पावरलूम को भी जोड़ लिया जाए तो यह संख्या लगभग 30 लाख तक पहुंच जाती है। हथकरघा/पावरलूम उद्योग इन 30 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का आधार बना है। इसके जरिए लाखों लोग सरकार पर आश्रित हुए बिना ही अपने कार्यक्रम, उद्योग, रोजगार को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारी सरकार ने तय किया कि इन हस्तशिल्पियों को सम्मान मिलना चाहिए, साथ ही उन्हें हर प्रकार की सुविधा मिलनी चाहिए। इसी क्रम में गत वर्ष हैंडलूम से जुड़े हुए 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को 109 करोड़ रुपये की विद्युत से जुड़ी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

 

हथकरघा उद्योग के लिए सुनहरा अवसर

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा का समय है। इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में हम तभी टिक पाएंगे, जब समय व मांग के अनुरूप डिजाइन व वस्त्र तैयार करेंगे। दुनिया में उत्पादों की मांग को देखते हमारे लिए सुनहरा अवसर भी है। लखनऊ, गोरखपुर, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर समेत सभी क्षेत्र अपने उत्कृष्ट हस्तशिल्प के लिए जाने जाते हैं। हमारे कारीगरों ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मान्यता व पहचान दिलाई है। प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों, कारीगरों व उद्यमियों के उत्थान के लिए हर वक्त साथ खड़ी है।

देश की नई संसद में लगी भदोही की कालीन

मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही में कालीन का क्लस्टर 2017 के पहले मृतप्राय सा हो गया था। लेकिन, आज वहां से दुनिया के बाजारों में सैकड़ों करोड़ रुपये का कालीन एक्सपोर्ट किया जा रहा है। देश की नई संसद में भी भदोही की कालीन लगी थी। देश की संसद में अलग-अलग जगहों पर उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और कारीगरों का सम्मान झलकता दिखाई देता है। भदोही में केंद्र सरकार की मदद से कालीन का एक्सपो सेंटर भी बनाया है। वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना हो चुकी है। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी,डिजाइन, पैकेजिंग, एक्सपोर्ट, मार्केटिंग को और बेहतर बनाने के लिए भी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। जब हम स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देंगे, तो भारत का पैसा भारत में ही लगेगा। इससे हमारे हस्तशिल्पियों के चेहरे पर समृद्धि की खुशहाली आएगी।

प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क की स्थापना

सीएम ने कहा कि वाराणसी में फैसिलिटेशन सेंटर से जुड़े हुए छात्रों को स्कॉलरशिप दी जा रही है। गत वर्ष 450 छात्रों को स्कॉलरशिप दी गई। इसके जरिए डिजाइनिंग, टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग के बारे में अध्ययन कराया जा रहा है। टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती प्रदान करने के लिए लखनऊ में पीएम मित्र पार्क की स्थापना 1000 एकड़ में हो रही है। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र टेक्सटाइल उद्योग ही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं और हर हाथ को काम दिलाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार संत कबीर के नाम पर प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ा रही है।

क्षेत्र में 70 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 और 2017 के पहले भी विकास के ऐसे काम हो सकते थे, लेकिन इसके लिए पिछली सरकारों के पास विजन नहीं था। पिछली सरकारों में हर काम को केवल वोटबैंक के नजरिए से देखा जाता था। ऐसे में गरीबों, कारीगरों व हस्तशिल्पियों का सम्मान पिछड़ जाता था। 2017 से पहले यूपी में बिजली और आवागमन के लिए अच्छी सड़कें तक नहीं थीं। कानून-व्यवस्था इतनी बदहाल थी कि बेटी, व्यापारी, हस्तशिल्पी, कारीगर कोई भी सुरक्षित नहीं था। किंतु आज हथकरघा के क्षेत्र में 70 फीसदी से अधिक महिलाएं कार्य कर रही हैं। यह अद्भुत है। पीएम मोदी जी भी विदेशी दौरों पर यूपी के हस्तशिल्प उत्पादों को विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप प्रदान करते हैं। यह सभी हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान है।

हथकरघा बना सबसे बड़ा कुटीर उद्योग

सीएम ने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट के माध्यम से ब्रांडिंग हुई तो मार्केट भी उपलब्ध हुआ। डबल इंजन की सरकार ने इसको टेक्नोलॉजी, डिजाइन और पैकेजिंग के साथ जोड़ा है। आज 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी में काम कर रही हैं। अब हथकरघा सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। डबल इंजन की सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों को संरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि हस्तशिल्पियों और कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को टेक्नोलॉजी व डिमांड के अनुसार मार्केट से जोड़ें। विश्वकर्मा श्रम सम्मान और पीएम विश्वकर्मा के माध्यम से कारीगर भी टूलकिट व ट्रेनिंग की व्यवस्था का पूरा लाभ उठाएं। संत कबीर और वीरांगना झलकारी बाई पुरस्कार से सम्मानित लोग भी काम में नयापन जारी रखें। मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील की कि वे स्थानीय कारीगरों व हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार उत्पादों को गिफ्ट के रूप में दें। दीपावली, होली, ईद समेत अन्य पर्वों पर उत्तर प्रदेश के उत्पाद भेंट स्वरुप दिखाई देने लगे हैं।

सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद

सीएम ने कहा कि सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों को खरीदने के लिए व्यवस्था बनाई गई है। विभाग तत्काल इस पर काम करें। हॉस्पिटल, होटल, गेस्ट हाउस व अन्य जगहों पर हथकरघा उत्पाद बढ़ेंगे तो यह सोने पर सुहागा हो जाएगा। इससे बुनकरों, कारीगरों समेत उद्योग से जुड़े सभी लोगों की आय भी बढ़ेगी।

स्वदेशी ने तोड़ी थी गुलामी की बेड़ियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, केवल एक दिवस नहीं बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। आज के दिन 7 अगस्त 1905 को आंदोलन को एक नई दिशा मिली थी, जब स्वदेशी ने पदार्पण किया था। स्वदेशी के मंत्र ने उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम पूरे भारत को एकता के सूत्र में जोड़कर गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का काम किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन के लिए खादी व स्वदेशी को ही अपना मंत्र बनाया था। उन्होंने चरखे को आंदोलन का सबसे बड़ा शस्त्र बनाया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने 7 अगस्त की तिथि को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया। यह देश में हथकरघा से जुड़े लाखों उद्यमियों, व्यवसायियों, हस्तशिल्पियों का सम्मान है।

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हस्तकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, मुकेश शर्मा, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल कुमार सागर, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विजयेंद्र पांडियन, विशेष सचिव शेषमणि त्रिपाठी समेत अन्य गण्यमान्य अतिथि उपस्थिति रहे।

मुख्यमंत्री ने बुनकरों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत बुनकरों व लाभार्थियों को सम्मानित करने के साथ चेक भी दिए। इसके साथ ही हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया।

बुनकरों का सम्मान

साड़ी, ब्राकेड एवं ड्रेस मेटेरियल श्रेणी

वाराणसी से जमालुद्दीन को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

सूती दरी, ऊनी दरी, आसनी एवं दरेट श्रेणी

सीतापुर से अकील अमहद को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

बेडशीट, बेड कवर एवं होम फर्निशिंग श्रेणी

बिजनौर से कफील अहमद को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

स्टोल, अंगवस्त्र या अन्य पारंपरिक वस्त्र उत्पाद श्रेणी

वाराणसी से प्यारेलाल को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के तहत बुनकरों का सम्मान

मऊ से सुरेंद्र कुमार – 93 हजार रुपये का चेक
इटावा से सोनी – 93 हजार रुपये का चेक
झांसी से मीरा बाई – 93 हजार रुपये का चेक

मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के लाभार्थी

मुरादाबाद से गुलाम वारिस – 78 हजार रुपये का चेक
बरेली से मो. साजिद अंसारी – 93 हजार रुपये का चेक
मेरठ से जय किशन राजपूत – 93 हजार रुपये का चेक


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