मानसून में डाइट का रखें खास ध्यान, आयुर्वेद ने बताए क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज

 Monsoon Diet :  मानसून के दौरान वातावरण में बढ़ी नमी, जलभराव और गंदगी के कारण संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर पड़ती है और वात व पित्त दोष के असंतुलित होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में खानपान में सावधानी बरतना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। इससे पाचन तंत्र बेहतर रहता है और मौसमी संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

मानसून में इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा

बारिश के मौसम में मलेरिया, डेंगू, सर्दी-जुकाम, दस्त, पेचिश, हैजा, फूड पॉइजनिंग, कोलाइटिस, त्वचा संक्रमण, दाद-खुजली, गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इसलिए भोजन और पेयजल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार क्या खाएं

आशा आयुर्वेद की चिकित्सक डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार मानसून में हल्का, गर्म और ताजा भोजन सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में पुराने अनाज जैसे गेहूं, जौ, शाली और साठी चावल तथा मक्का का सेवन लाभकारी होता है। इसके अलावा आहार में हरी मूंग दाल, अरहर दाल, खिचड़ी, लौकी, तोरई, भिंडी, टमाटर, सरसों और पुदीने की चटनी को शामिल किया जा सकता है। दही और लस्सी का सेवन भी सीमित मात्रा में किया जा सकता है, यदि पाचन ठीक हो।

फल और सब्जियों का करें सही चुनाव

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सेब, केला, अनार, नाशपाती, पके हुए जामुन और देसी आम का सेवन फायदेमंद माना जाता है। वहीं मौसमी और ताजी सब्जियों का सूप भी पाचन के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

पानी पीने में न करें लापरवाही

बारिश के मौसम में जल स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए केवल उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए। दूषित पानी के सेवन से हैजा, फूड पॉइजनिंग और अन्य जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या करें परहेज

आयुर्वेद के अनुसार मानसून के दौरान बासी भोजन, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, अत्यधिक तला-भुना, बहुत ठंडा और अस्वच्छ भोजन खाने से बचना चाहिए। साथ ही भोजन हमेशा ताजा और स्वच्छ वातावरण में तैयार किया हुआ ही खाना चाहिए।


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