मध्य प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण केंद्रों की कमी पर सवाल

Madhya Pradesh: किसी परिवार के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि उसका अपना कोई सदस्य दुनिया से चला जाए, लेकिन यदि उसी दुख के बीच उसके अंग कई दूसरी जिंदगियों को बचा सकते हों तों! लेकिन प्रश्न यह है कि क्या हमारे पास उन अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की उचित व्यवस्था है? मध्य प्रदेश में यह सवाल अब केवल स्वास्थ्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नीति, प्रशासनिक क्षमता और जवाबदेही का सवाल बन चुका है। देश में अंगदान को लेकर जागरूकता जरूर बढ़ रही है।

जून 2026 में केंद्र सरकार ने बताया कि देश में पांच लाख से अधिक लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी ने भी अगस्त 2025 में अंगदान का संकल्प लेकर इस अभियान को सार्वजनिक समर्थन दिया था। यानी समाज के प्रभावशाली वर्गों से लेकर आम नागरिकों तक संदेश पहुंच रहा है कि मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है। लेकिन केवल संकल्प पर्याप्त नहीं है। उसके लिए अस्पताल, प्रशिक्षित डॉक्टर, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर, ICU, ग्रीन कॉरिडोर और तेज प्रशासनिक निर्णयों की पूरी श्रृंखला चाहिए।

मध्य प्रदेश की तस्वीर में कुछ सकारात्मक बदलाव जरूर दिखे हैं, लेकिन जरूरत की तुलना में अभी यह प्रयास काफी छोटा है। 2023 में देश में 16,542 अंग प्रत्यारोपण हुए, जबकि मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 1.6 प्रतिशत रही। अगस्त 2025 तक राज्य में पांच कैडेवरिक अंगदान दर्ज किए गए थे और कुल कैडेवरिक ऑर्गन एलोकेशन में भी सुधार के संकेत मिले। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मध्य प्रदेश में बदलाव की क्षमता मौजूद है। जनवरी 2025 में एम्स भोपाल में राज्य का पहला हृदय प्रत्यारोपण हुआ। जबलपुर में ब्रेन-डेड मरीज से प्राप्त अंगों को ग्रीन कॉरिडोर और सरकारी एयर एंबुलेंस की मदद से दूसरे शहरों तक पहुंचाया गया।

ये भी पढें

वैश्विक एजेंडा तय करने में उभरती, मध्यम शक्तियों की अहम भूमिका

अगस्त 2025 में जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में पहली बार कैडेवरिक किडनी ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक हुआ। सितंबर 2026 में एम्स भोपाल से मिले एक कैडेवरिक डोनर के हृदय, लीवर और दोनों किडनी से चार मरीजों को लाभ मिला। ये उदाहरण बताते हैं कि इच्छाशक्ति, विशेषज्ञता और समन्वय हो तो मध्य प्रदेश में भी जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लेकिन दूसरी तरफ एक गंभीर सवाल खड़ा होता है वो यह कि क्या यह व्यवस्था पूरे प्रदेश तक पहुंची है? नवंबर 2025 की रिपोर्टों में विशेषज्ञों ने बताया था कि अंग रिट्रीवल और ट्रांसप्लांट की सुविधाएं मुख्य रूप से भोपाल, इंदौर और जबलपुर तक सीमित हैं तथा अधिकांश जिलों में प्रशिक्षित टीम और आवश्यक ढांचा उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों पर पड़ता है।

आज जरूरत केवल नए ट्रांसप्लांट सेंटर घोषित करने की नहीं, बल्कि एक मजबूत राज्यव्यापी सिस्टम बनाने की है। मध्य प्रदेश में सोट्टो की व्यवस्था मौजूद है और राज्य में अस्पतालों तथा डोनर-रिसिपिएंट डेटा को बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में काम भी हुआ है। अब इसे कागज और पोर्टल से आगे जमीन पर मजबूत करने की जरूरत है। तमिलनाडु और तेलंगाना से यहां बहुत कुछ सीखा जा सकता है। तेलंगाना का जीवनदान मॉडल अंगदान, अस्पतालों के समन्वय, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों की ट्रेनिंग और पारदर्शी अंग आवंटन पर केंद्रित है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जीवनदान के माध्यम से अब तक बड़ी संख्या में किडनी, लीवर, हृदय और फेफड़ों के प्रत्यारोपण संभव हुए हैं। मध्य प्रदेश के लिए मेरा सुझाव स्पष्ट है। सरकार को अगले पांच वर्षों के लिए मध्य प्रदेश ऑर्गन ट्रांसप्लांट मिशन बनाना चाहिए। हर संभाग में कम से कम एक मजबूत सरकारी ट्रांसप्लांट हब विकसित हो, जिला अस्पतालों में ब्रेन-डेथ पहचान और अंग रिट्रीवल की क्षमता बढ़ाई जाए, हर बड़े अस्पताल में प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नियुक्त हों और पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा, एयर एंबुलेंस तथा जिला प्रशासन के बीच एक तय SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू हो।

ये भी पढें

UP Rajya Sabha: आठ उम्मीदवारों की सूची में BJP की सोशल इंजीनियरिंग

इसके साथ निजी अस्पतालों को भी इस मिशन का साझेदार बनाया जाना चाहिए। इंदौर में ही कई अस्पतालों में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों का नेटवर्क मौजूद है और सरकारी तथा निजी संस्थानों में ट्रांसप्लांट गतिविधियां चल रही हैं। इस मौजूदा क्षमता को राज्यव्यापी नेटवर्क में बदला जा सकता है। राजनीतिक भाषा में देखें तो किसी भी नीति की सफलता तीन चीजों से तय होती है एक तो है स्पष्ट लक्ष्य, दूसरा जिम्मेदार अधिकारी और तीसरा मापने योग्य परिणाम।

इसलिए सरकार को हर वर्ष सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि कितने अस्पताल अधिकृत हुए, कितने ब्रेन-डेथ मामलों की पहचान हुई, कितने अंगदान हुए, कितने प्रत्यारोपण हुए और कितने मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं। अंगदान केवल संवेदना का विषय नहीं है। यह शासन की उस क्षमता की परीक्षा है जिसमें एक कठिन परिस्थिति को जीवन बचाने के अवसर में बदला जाता है। मध्य प्रदेश में अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि अंगदान के लिए लोगों को कैसे प्रेरित करें; सवाल यह होना चाहिए कि जो लोग अंगदान का संकल्प ले रहे हैं, उनके संकल्प को जीवन में बदलने के लिए हमारी व्यवस्था कितनी तैयार है। यही वह बिंदु है जहां से प्रशासनिक जवाबदेही शुरू होती है।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

ये भी पढें

वैश्विक एजेंडा तय करने में उभरती, मध्यम शक्तियों की अहम भूमिका

ज्ञानेश की गिरफ़्तारी चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बहाली के लिए ज़रूरी- शाहनवाज़ आलम

न्यूमोनिक प्लेग का बढ़ा खतरा? जानें कैसे फैलता है संक्रमण और बचाव के तरीके

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर कहां लुप्त हो जाती हैं? जानिए रहस्य

परंपराओं और संस्कारों को आगे बढ़ाना हमारा दायित्वः योगी

 

 

Spread the love

Madhya Pradesh Politics

अपना दल (एस) ने तेज किया संगठन विस्तार, पदाधिकारियों को सौंपी जिला कमान

Bhopal: अपना दल (एस) ने मध्य प्रदेश में संगठन विस्तार की तैयारियां तेज कर दी हैं। दल के संगठन प्रमुख और यूपी कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के निर्देशन पर राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर. बी. सिंह पटेल के मार्गदर्शन में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों […]

Spread the love
Read More
New Delhi
Health International

तीन वैज्ञानिकों को मिला मेडिसिन का नोबेल

New Delhi: साल 2026 के नोबेल पुरस्कार इन फिजियोलॉजी या मेडिसिन का ऐलान कर दिया गया है। इस साल यह प्रतिष्ठित सम्मान तीन वैज्ञानिकों कार्ल डाइसरॉथ , पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को दिया गया है। तीनों वैज्ञानिकों को लाइट-गेटेड आयन चैनल और ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़े उनके महत्वपूर्ण शोध के लिए सम्मानित किया गया है। […]

Spread the love
Read More
Health

न्यूमोनिक प्लेग का बढ़ा खतरा? जानें कैसे फैलता है संक्रमण और बचाव के तरीके

Pneumonic plague: रूस में 28 वर्षीय एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद प्लेग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्मचारी के ऐसे बैक्टीरिया के संपर्क में आने की बात सामने आई थी, जो प्लेग का कारण बनता है। इसके बाद उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को आइसोलेट […]

Spread the love
Read More