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गुलदस्ता पत्रकारिता का स्वर्णकाल: खबरें गईं, बुके आ गए!
गुलदस्ता पत्रकारिता का स्वर्णकाल: खबरें गईं, बुके आ गए! भास्कर दुबे पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है। कभी पत्रकार सत्ता से सवाल पूछते थे, अब फूलों की खुशबू के साथ शुभकामनाएं पहुंचाते हैं। वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो आज की पत्रकारिता का सबसे जीवंत, सक्रिय और फलता-फूलता क्षेत्र “गुलदस्ता पत्रकारिता” है। राजधानी के लाल बहादुर […]
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