मोदी के गले मिलने पर तंज, राहुल बताएं कांग्रेस की विदेश नीति

Congress
अजय कुमार
अजय कुमार

राहुल गांधी के ताजा बयान को सिर्फ राजनीतिक मजाक मानकर आगे बढ़ जाना आसान है। दिल्ली के मावलंकर हॉल में रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन पर राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तंज कसते हुए कहा कि पता नहीं उनके दिमाग में यह बात कहां से आ गई कि गले पड़ना ही विदेश नीति है। फिर उन्होंने संदीप दीक्षित को बुलाकर गले लगाया। दीक्षित ने जॉर्जिया मेलोनी का नाम लेकर सवाल किया कि कहीं उन्हें मेलोनी समझकर तो नहीं पकड़ा गया। सवाल यह है कि क्या भारत की विदेश नीति जैसी गंभीर बहस को ऐसे मजाक में बदलना कांग्रेस के हित में है।राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। विपक्ष का काम ही सरकार से सवाल पूछना है। लेकिन विदेश नीति की आलोचना और व्यक्तिगत कटाक्ष में फर्क होता है।

ये भी पढें

दूक से रैंप तक, बस्तर की बेटियों ने बदल दी नक्सलवाद की तस्वीर

जब मुद्दा अमेरिका, ईरान, चीन, रूस, यूरोप, खाड़ी और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत के रिश्तों का हो, तब बहस इस बात पर होनी चाहिए कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हित कितने सुरक्षित किए। सवाल होना चाहिए कि व्यापार कितना बढ़ा, निवेश कितना आया, ऊर्जा सुरक्षा कितनी मजबूत हुई, सीमा पर चीन को कितना दबाव महसूस हुआ और संकट के समय भारत की कूटनीतिक उपयोगिता कितनी बढ़ी। गले की तस्वीर इन सवालों का विकल्प नहीं। सरकार की आलोचना करते समय कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि उसकी अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताएं क्या होंगी। पड़ोसी देशों के साथ संबंध, हिंद महासागर में भारत की भूमिका, रक्षा खरीद और वैश्विक संस्थाओं में भारत की आवाज, इन सभी पर पार्टी को स्पष्ट रुख रखना होगा। यह बहस का हिस्सा बने।

राहुल के तंज का जवाब इतिहास भी देता है। 1983 में दिल्ली में सातवें गुटनिरपेक्ष सम्मेलन के दौरान क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अचानक गले लगा लिया था। यह 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों वाला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था। कास्त्रो ने इंदिरा गांधी को बहन कहकर संबोधित किया और सम्मेलन की अध्यक्षता का हथौड़ा उन्हें सौंपा। इसलिए किसी विदेशी नेता से गले मिलना अपने आप में विदेश नीति की कमजोरी का प्रमाण नहीं हो सकता। असली सवाल यह है कि उस रिश्ते के पीछे रणनीतिक हित क्या थे। विडंबना यह भी है कि राहुल गांधी खुद 2018 में संसद में नरेंद्र मोदी को अचानक गले लगा चुके हैं।

ये भी पढें

संसद में हंगामा ही सिर्फ मकसद नहीं होना चाहिए

इसलिए आज गले लगाने को विदेश नीति का मजाक बनाते समय कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास का भी ध्यान रखना चाहिए। राजनीति में प्रतीक महत्वपूर्ण होते हैं। प्रतीक तभी असरदार होते हैं जब उनके पीछे नीति और परिणाम हों।सरकार के पक्ष में आंकड़े भी मौजूद हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार 2025-26 तक भारत के नौ मुक्त व्यापार समझौते 38 देशों तक पहुंच चुके थे। इनमें मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से जुड़े समझौते शामिल हैं। 2026 में यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता पूरी होने की घोषणा हुई और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आई। कांग्रेस को पूछना चाहिए कि इन समझौतों से भारतीय किसान, छोटे उद्योग, निर्यातक और रोजगार बाजार को वास्तविक लाभ कितना मिला। यही अंतर विपक्ष की ताकत बन सकता है। रोजगार, निर्यात और निवेश के वास्तविक परिणामों पर जिला और क्षेत्रवार अध्ययन किया जाए तो बहस ज्यादा विश्वसनीय होगी।

ईरान-अमेरिका संकट पर राहुल का हमला भी इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि भारत के पास ईरान और अमेरिका दोनों से संबंध होने के कारण मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अवसर था और पाकिस्तान ने वह जगह ले ली। दोनों पक्षों की स्वीकार्यता, गोपनीय संपर्क और क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका निर्णायक होती है। जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म करने को लेकर बनी समझ का भारत ने स्वागत किया और बातचीत से स्थायी समझौते की उम्मीद जताई। इसलिए भारत ने कुछ किया ही नहीं कहना तथ्य को सरल बना देना होगा।फिर भी कांग्रेस का सवाल पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। भारत के पास ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी है और रूस के साथ दशकों पुराना रक्षा रिश्ता है। विपक्ष पूछ सकता है कि क्या नई दिल्ली ने इन संबंधों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया। क्या भारत पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अपने नागरिकों, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए पर्याप्त रणनीति बना पाया।

क्या पाकिस्तान की सक्रियता ने भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के सामने नई चुनौती पैदा की। इन सवालों के जवाब दस्तावेज मांगते हैं।यही अंतर राहुल गांधी की राजनीति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 99 सीटों तक पहुंची, जबकि 2019 में उसके पास 52 सीटें थीं। भाजपा 2024 में 240 सीटों पर रही, जबकि 2019 में उसने 303 सीटें जीती थीं। यानी कांग्रेस ने वापसी की है और भाजपा का पूर्ण बहुमत घटा है। लेकिन 99 से सरकार तक पहुंचने के लिए सिर्फ मोदी विरोध काफी नहीं होगा। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में संगठन और स्थानीय नेतृत्व मजबूत करना होगा।

ये भी पढें

गोमूत्र से कमाई मॉडल या चुनावी चमक

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा ने दिखाया कि वे व्यक्तिगत हमलों से अलग सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़ सकते हैं। बेरोजगारी, महंगाई, असमानता, शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे कारोबार की समस्याएं ऐसी जमीन हैं जहां कांग्रेस सरकार को लगातार घेर सकती है। लेकिन इसके लिए कांग्रेस को अपना आर्थिक मॉडल भी बताना होगा। रोजगार कैसे पैदा होंगे, निजी निवेश और कल्याणकारी योजनाओं में संतुलन कैसे बनेगा, किसानों और एमएसएमई को वैश्विक व्यापार से कैसे जोड़ा जाएगा और चीन के मुकाबले विनिर्माण क्षमता कैसे बढ़ेगी, इन सवालों पर स्पष्ट उत्तर चाहिए।कांग्रेस की दूसरी समस्या राजनीतिक भाषा है। लगातार प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने से समर्थकों में उत्साह पैदा हो सकता है, लेकिन व्यापक मतदाता वर्ग हमेशा इससे प्रभावित नहीं होता। 2019 में चौकीदार चोर है जैसे अभियान ने अपेक्षित परिणाम नहीं दिए। भाजपा ने उस हमले को मोदी की व्यक्तिगत छवि के खिलाफ अभियान बताकर अपने पक्ष में इस्तेमाल किया। नीतियों की कमजोरी साबित करना ज्यादा प्रभावी होता है।

मेलोनी वाले प्रसंग ने कांग्रेस को इसी कारण नुकसान पहुंचाया। इटली की प्रधानमंत्री किसी भारतीय दल की आंतरिक राजनीति की पात्र नहीं हैं। मोदी और मेलोनी की मुलाकातों पर राजनीतिक सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन निजी संकेत वाला मजाक अंतरराष्ट्रीय संबंधों को हल्का करता है। भाजपा को इससे राजनीतिक हमला करने का मौका मिला और कांग्रेस का मूल सवाल पीछे चला गया।राहुल गांधी के सामने अब 2029 की लड़ाई की तैयारी का लंबा समय है। उन्हें तय करना होगा कि उनकी राजनीति मोदी विरोध की रहेगी या कांग्रेस के पुनर्निर्माण की। 2024 ने दिखाया कि भाजपा अजेय नहीं है, लेकिन कांग्रेस भी अभी सत्ता की स्वाभाविक दावेदार नहीं बनी है। विपक्ष का नेता तभी प्रधानमंत्री पद का गंभीर विकल्प बनता है जब उसके पास सरकार की आलोचना के साथ शासन की विश्वसनीय योजना हो।राहुल गांधी जितनी ऊर्जा प्रधानमंत्री के मजाक में लगाते हैं, अगर उतनी ही ऊर्जा कांग्रेस के संगठन, नीति और नेतृत्व को मजबूत करने में लगाएं तो तस्वीर बदल सकती है। जनता को यह सुनना है कि मोदी गलत क्यों हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा यह जानना है कि कांग्रेस सही क्या करेगी। 2029 की असली लड़ाई इसी जवाब पर होगी।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

नागपंचमी विशेष : शिव, शेष, वासुकी और तक्षक की ही है सृष्टि

बीएल संतोष के चाबुक पर चलेगी नितिन नबीन की गाड़ी!

आंदोलित छात्रों के दबाव में CM ने लिया फैसला

*तारापीठ में बिदेशिनी होटल में आग, 2 बच्चों समेत 8 मरे*

शासन ने किए 18 IASअफसरों के तबादले

E20 विवाद के बीच E10 पेट्रोल की वापसी की चर्चा, CEA की सलाह से छिड़ी नई बहस

किसानों के लिए CM विजय का बड़ा ऐलान, 75 हजार रुपये तक का सहकारी कृषि ऋण होगा माफ

Spread the love

One thought on “मोदी के गले मिलने पर तंज, राहुल बताएं कांग्रेस की विदेश नीति”

Comments are closed.

Untitled 21 copy
homeslider Religion

पुत्र की आयु, बल और यश के लिए मां का का तप पर्व जीउतिया

सतपुतिया जैसे सात स्वस्थ, आयुवान, बलवान, यशस्वी पुत्रों की कामना Jivitputrika Vrat: सतपुतिया जैसे सात स्वस्थ, आयुवान, बलवान, यशस्वी पुत्रों की कामना के साथ माता की तपस्या का पर्व है जिउतिया। इसीलिए इस व्रत का आधार आहार भी सतपुतिया ही है। भगवान भास्कर की तीक्ष्णतम रश्मियों के साथ आयोजित यह वार्षिक लोक तप पर्व वस्तुतः […]

Spread the love
Read More
Pitru Paksha 2026
homeslider Religion

श्राद्ध के दिन भोजन को लेकर क्या है सही नियम? प्रेमानंद महाराज ने बताया

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। श्राद्ध से जुड़े कई नियमों को लेकर लोगों के मन में […]

Spread the love
Read More
Nautanwa
homeslider Uttar Pradesh

गांधी जयंती पर नौतनवां में शान से लहराया 105 फीट ऊंचा तिरंगा

उमेश चन्द्र त्रिपाठी Nautanwa: नौतनवां नगर के छपवा स्थित शहीद स्थल के पास स्थापित किये गए सबसे ऊंचे 105 फीट तिरंगे झंडे को आज गांधी जयंती के अवसर पर नौतनवां नगर पालिका अध्यक्ष बृजेश मणि त्रिपाठी फहराकर नगर का मान व सम्मान बढ़ाया। ये भी पढें गांधी जयंती पर CM योगी ने बापू को किया […]

Spread the love
Read More