
विधानसभा चुनाव 2027 की जीत के नाम बनी “टीम अष्टक”, यूपी से आठ चेहरे लिये गये!
BJP’s new team : मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई टीम का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक पूर्ण कालिक नेता बीएल संतोष को फिर एक बार राष्ट्रीय महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी मिली है। टीम बनने से पहले यूपी से जुड़े कुछ लोग रोज उनको भी बदल रहे थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम को एक बार फिर कठोर अनुशासन के लिये प्रतिवद्ध बीएल संतोष के मार्गदर्शन में काम करना पड़ेगा। विधानसभा के चुनाव को देखते हुये राष्ट्रीय टीम में यूपी से 8 लोगों को स्थान दिया गया है। किंतु डॉ महेंद्र सिंह का नाम न होना सबको आश्चर्यचकित किया है। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय संगठन में यूपी से जुड़े आठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर राजनीतिक तौर पर यूपी के दबदबे खासा महत्वपूर्ण बना दिया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से लेकर महामंत्री, सचिव और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष तक यूपी का दबदबा दिखाई दे रहा है। इन आठ बड़े पदों में तीन ओबीसी, तीन अल्पसंख्यक (दो मुस्लिम व एक पारसी) एक ब्राह्मण, और एक दलित को जगह मिली है। इन्हीं आठ लोगों के हिस्से में दो उपाध्यक्ष, दो राष्ट्रीय महामंत्री, दो राष्ट्रीय मंत्री व दो मोर्चा प्रभारी मिले हैं।
पूर्व सांसद रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। राष्ट्रीय संगठन में उपाध्यक्ष का पद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला माना जाता है। ऐसे में यूपी से दो नेताओं को इस स्तर पर जिम्मेदारी मिलना प्रदेश के लिहाज से अहम है। रेखा वर्मा कुर्मी समाज से आती है। बीजेपी का कुर्मी बिरादरी पर जोर काफी है। उन्हें उत्तराखंड में पार्टी की तरफ से संगठन का काम देखने का अनुभव है और पार्टी की पूर्व सांसद के साथ-साथ युवा चेहरा है। समाज के युवाओं में अच्छी पकड़ रखने वाली रेखा वर्मा बहुत जुझारू हैं। प्रो. तारिक मंजूर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रहे हैं।मुस्लिम पसमांदा समाज से आने वाले तारिक मंजूरी के समाज के बुद्धजीवियों में खासी पैठ है। इनके माध्यम से भाजपा मुस्लिम वोटरों को साधने की रणनीति बना कर मुस्लिमों के बीच जायेगी। रहा-सहा कसर अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली पूरा करेंगे। दफ्तर हो या घर, बुके और मिठाई के साथ सदैव तत्पर रहने वाले बासित अली के संपर्क का लोहा बड़े-बड़े मानते हैं।
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धाकड़ स्मृति ईरानी और जुझारू हरीश द्विवेदी बने राष्ट्रीय महामंत्री
नितिन नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश से दो लोगों को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। उनके राष्ट्रीय महामंत्री बनने से गांधी परिवार का टेंशन बढ़ेगा। अमेठी-रायबरेली के अलावा अजय राय (लखनऊ) दिल्ली (सोनिया-राहुल- प्रियंका वाड्रा) के कांग्रेसियों की नींद हराम हो जायेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद रहीं स्मृति ईरानी कभी संघर्ष से मुंह नहीं मोड़ने के लिये जानी जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे पहचान का दबदबा उनके हनक को धार देता है। अपने हनक को पुचकार के रूप में कम और फुफकार के रूप में ज्यादा प्रयोग करने से अड़ियल स्वभाव की मानी जाती हैं। उनके जानने वालों की मानें तो पद के साथ यदि व्यवहार में विनम्रता का समावेश नहीं बढ़ाया तो ईरानी के लिये आसान लक्ष्य भी मुश्किल बन जायेगा। उन्हें यह कत्तई नहीं पसंद है कि कोई उनको हल्के में ले। स्मृति ईरानी हमेशा यह बताने की कोशिश करती हैं कि जिस पद पर वह पहुंची हैं वह ग्लैमर से नहीं परिश्रम से मिला है। जबकि बहुत सारे लोग इसे ग्लैमर का जादू ही मानते हैं। 2024 में अमेठी से ईरानी के चुनाव हारने पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उनके ग्लैमरस छवि पर हमला बोला था। अखिलेश यादव ने संसद में कहा था कि ” आपकी सास-बहू वाली तो हार गयीं”। जवाब में अपने एक्स पर स्मृति ईरानी ने लिखा कि सपा प्रमुख, जिन्हें “राजनीति विरासत में मिली है”, टीवी सीरियल छोड़ कर उन्हें “महिलाओं को सशक्त बनाने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए काम करना चाहिए”।
हरीश द्विवेदी को भी राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। हरीश द्विवेदी बस्ती से दो बार सांसद रह चुके हैं। उनके पास इससे पहले बिहार प्रदेश में सहप्रभारी, असम के प्रभारी के तौर पर काम करने का अनुभव है। भाजपा में एक प्रदेश से दो-दो राष्ट्रीय महामंत्री बनाया जाना बहुत मायने रखता है।महामंत्री का पद संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में शामिल हैं। कार्यकर्त्ताओं में आसानी से घुल-मिल जाने वाले हरीश द्विवेदी पर राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र जी का अक्षय आशीर्वाद होने के कारण उनके राजनैतिक शत्रुओं का कोप बेअसर हो जाता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग संगठन मंत्री बन कर सार्वजनिक जीवन में आये हरीश द्विवेदी को गोरखपुर और इलाहाबाद विश्वविद्यालयों के परिसरों ने दीक्षित किया है। हद तक जाकर कठिन परिश्रम की क्षमता रखने वाले हरीश द्विवेदी की छवि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधियों में शुमार है। केन्द्र ने उन्हें उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण चेहरा भले बना दिया हो पर अपनी ही यूपी की सरकार में दबाव बना कर शायद ही कोई काम करवा पायेंगे। हरीश द्विवेदी के राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पार्टी के ब्राह्मण कार्यकर्ताओं में बसपा से आये उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, सपा से आये कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आये प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा के राजनैतिक ताकत पर असर पड़ेगा। जी भर कर जिद्दी, सुनना सबका-करना अपना, आलोचनाओं से बिना घबराये, सहनशक्ति को परखते रहने का कौशल भी उनमें कूट-कूट कर भरा है। अपनी पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं से ज्यादा दल बदलुओं को सम्मान देना स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ भी आवाज बनाती है। प्रशासन में भले उनके विरोधियों की चलती हो पर राष्ट्रीय फलक से लेकर जिले में स्थानीय स्तर तक पार्टी पर उन्हीं का कब्जा है। आज की स्थिति में उनके गृह जनपद में तो बिना हरीश द्विवेदी की मर्जी के जिला कार्यकारिणी में भी स्थान मिलना मुमकिन नहीं है। उन पर यह भी आरोप है हरीश द्विवेदी अपने आस-पास किसी स्वजातीय कार्यकर्ता के उत्थान को लेकर सजग रहते हैं।
बीजेपी ने सचिव पद पर भी यूपी को दी जगह
राष्ट्रीय सचिवों की सूची में उत्तर प्रदेश से दो लोगों को शामिल किया गया है। डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव “मौर्य” को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। संगीता यादव गोरखपुर से आती हैं और राज्यसभा सदस्य हैं। 2017 में विधायक बनीं, 2022 में टिकट कट गया तो पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। उनके बनने से पिछड़ा (यादव-मौर्य) और महिला तीन-तीन कोटे की पूर्ति होती दिख रही है। वह योगी सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुकी हैं। पूर्वांचल को साधने के लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने गोरख पुर की महिला यादव को आगे किया है।भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व टीम गुजरात अभी तक गोरखपुर और पूर्वांचल से उन्हीं को आगे बढ़ाया है जो खुद को योगी विरोधी बताने में कामयाब रहे। राष्ट्रीय संगठन में जगह पाये डॉ राधामोहन दास अग्रवाल, केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व यूपी भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी भी गोरखपुर से थे। इनमें से कोई योगी आदित्यनाथ का करीबी नहीं कहा जाता है। हर कोई योगी विरोधी बन कर हवा में अपना अस्तित्व बनाने में जी जॉन से जुटा लेकिन जमीन पर योगी के सामने कोई दूर-दूर तक नहीं टिकता। राष्ट्रीय मंत्री बने भोला सिंह बुलंदशहर से तीसरी बार के सांसद हैं। दलित समाज के खटिक बिरादरी से आते हैं। जाति के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलितों में मजबूत पकड़ रखते हैं। पश्चिम के फल बाजारों में मुस्लिमों के दबदबे से खटिक ही लड़ता है। मार्शल (लड़ाकू) कौम है जो डरते नहीं। ऐसे में खटिक समाज का नेता टीम में आना दलितों में बड़ा संदेश देने के लिए है। यक्ष प्रश्न यह है कि नये और युवा के नाम पर जिस तरह से अनुभवी नेताओं से परहेज किया गया है क्या यह नेतृत्व पर भी लागू होगा? इस तरह राष्ट्रीय टीम के गठन में अलग-अलग स्तरों पर यूपी के विभिन्न जातियों के नेताओं को स्थान दिया गया है।
दो महत्वपूर्ण मोर्चों में भी यूपी का नेतृत्व
BJP की नई टीम में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय मोर्चों तक भी पहुंचा है। ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी अमरपाल मौर्य को दी गई है। अमरपाल मौर्य कुशवाहा बिरादरी से आते हैं राज्यसभा सदस्य हैं। अच्छे संगठनकर्ता होने के साथ-साथ मौर्य वोटो में अच्छी पकड़ है।पार्टी के पूर्व महामंत्री संगठन केएन गोविंदाचार्य और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की पाठशाला से निकल कर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के राजनैतिक कॉलेज से डिग्री प्राप्त अमरपाल मौर्य पूरे प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों में सीधा संपर्क रखते हैं। केशव मौर्य का उन पर अटूट विश्वास होने के साथ मृदुभाषी और परिश्रमी होने के कारण वह नेतृत्व की निगाह में आये हैं। प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से आने वाले अमरपाल मौर्य के समायोजन से काशी और अवध क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है। अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर कुंवर बासित अली को जिम्मेदारी मिली है। यदि मैं गलत न साबित हुआ तो यह कह सकता हूँ कि आतिथ्य लेने और देने दोनों में अव्वल होने के कारण बासित अली जल्द ही राष्ट्रीय नेताओं की निगाह में फिट हो जायेंगे। जिस तरह राष्ट्रीय संगठन के साथ-साथ पार्टी के महत्वपूर्ण मोर्चों में भी उत्तर प्रदेश के नेताओं को जगह मिली है उससे लगता है कि यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण यूपी से ली गयी “टीम अष्टक” दिल्ली पहुंच कर हर दिन कामयाबी की कहानी लिखेगी।
नई टीम में मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े जिम्मेदारी वाले हिस्से में भी यूपी के शिवानंद द्विवेदी को मीडिया और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी दी गई है। सूची में उनका स्थान दिल्ली बताया गया है। लेकिन वह रहने वाले उत्तर प्रदेश के हैं। इस तरह संगठन के राजनीतिक पदों के साथ-साथ मीडिया और सोशल मीडिया के स्तर पर भी उत्तर प्रदेश से जुड़ा कनेक्शन दिखाई देता है। आज के दौर में चुनावी राजनीति में संगठन के साथ डिजिटल और सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में इस जिम्मेदारी में यूपी से जुड़े व्यक्ति की मौजूदगी को भी 2027 के चुनाव के संदर्भ में देखा जा सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी के प्रभारी बन कर आये उड़ीसा के बैजयंत पांडा को फिर उपाध्यक्ष बनाया गया है। चुनाव के दौरान इन्हें भी उड़ीसा के एक लोकसभा सीट पर प्रत्याशी बना दिया गया तो यह यूपी का चुनाव बीच मझधार में छोड़ कर चले गये। केंद्र ने उनके बाद आज तक कोई स्थाई प्रभारी भी यूपी में नहीं तैनात किया।
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