
Transfers दबाव बनवाने वाले को साधारण मोटी रकम देने वालों को मिली कमाऊ जेलें
प्रमुख सचिव कारागार को नहीं दिख रहा तबादलों में मोटी रकम का लेनदेन का खेल
सीएम की सिफारिशी ने एक साल पहले तैनात हुए बागपत जेल अधीक्षक को हटवाया
प्रदेश कारागार विभाग के तबादलों में केंद्र सरकार के कद्दावर मंत्री की सिफारिश के आड़ में बड़ा खेल किया गया है। सत्तारूढ़ पार्टी के कद्दावर मंत्री की सिफारिश वाले अधिकारी को सामान्य जेल पर और मोटी थैली भेंट करने वाले अधिकारियों को कमाऊ जेल पर स्थानांतरित कर दिया गया। तबादलों में मजे की बात यह देखने को मिली कि सीएम की सिफारिश के चलते एक साल पूर्व तैनात किए गए अधिकारी को हटाकर उनके स्थान में सिफारिशी अधीक्षक को तैनात कर दिया गया। प्रमुख सचिव कारागार की निगरानी में किए गए इन तबादलों में सरकार के स्थानांतरण नीति की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। प्रमुख सचिव सब कुछ जानकर अनजान बने हुए है। इन तबादलों को लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
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बीती 30 मई 2026 को प्रमुख सचिव कारागार के निर्देश पर अनु सचिव ममता श्रीवास्तव ने एक दर्जन जेल अधीक्षकों की तबादला सूची जारी की। इसमें इसमें उन्नाव जेल अधीक्षक को वरिष्ठ अधीक्षक की अलीगढ़ जेल पर स्थानांतरित किया गया। इसी प्रकार बीते स्थानांतरण सत्र के बीच में मोटी रकम देकर बांदा से मुरादाबाद जेल गए अधीक्षक आलोक सिंह को मुरादाबाद से सहारनपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है मुरादाबाद जेल में लूट मचाकर अपने कथित गृहजनपद देहरादून में आलीशान होटल/ रिसोर्ट का निर्माण कराया है। रिटायरमेंट के बाद देहरादून में बसने और सहारनपुर जेल में रहकर इस रिसोर्ट का और भव्य स्वरूप देने के लिए उन्होंने मोटी रकम देकर अपना तबादला सहारनपुर जेल पर कराया है। मनमाफिक कमाऊ जेल पर हुआ यह तबादला विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में वर्तमान से में अधीक्षक के कुल 70 पद सृजित है। स्थानांतरण नीति के मुताबिक कुल पदों के सापेक्ष में 10 प्रतिशत के सिर्फ सात अधीक्षकों के तबादले होने चाहिए थे। सूत्र बताते है कि सत्तारूढ़ नेताओं के बेहद करीबी और केंद्र सरकार में एक कद्दावर मंत्री की सिफारिश होने का हवाला देकर स्थानांतरण नीति को दर किनार कर अधिक तबादले कर दिए। बताया गया है कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं के करीबी होने की वजह से अधिकारियों को जब कुछ नहीं मिला तो उन्होंने उस अधिकारी का तबादला बिजनौर जैसी सामान्य जेल पर कर दिया। वही दूसरी ओर मोटी रकम देने वाले मुरादाबाद अधीक्षक को सहारनपुर जेल, उन्नाव के अधीक्षक को वरिष्ठ अधीक्षक वाली अलीगढ़ जेल कर दिया गया। इसी प्रकार एक साल पहले गाजीपुर से सहारनपुर गए अधीक्षक सत्य प्रकाश को सहारनपुर से हटाकर आजमगढ़, बिजनौर में कार्यकाल पूरा कर चुकी अदिति श्रीवास्तव को पश्चिम की कमाऊ कही जाने वाली बागपत जेल पर भेजा गया है। एक साल पहले रामपुर से बागपत जेल पहुंचे प्रशांत मौर्य को उरई जेल स्थांतरित किया गया है। मुख्यालय से बांदा संबद्ध किए गए शशिकांत सिंह को बांदा जेल पर ही समायोजित कर दिया है। ललितपुर से निलंबित मुकेश कुमार को अयोध्या, विजय कुमार राय को बलरामपुर और पवन कुमार त्रिवेदी को केंद्रीय कारागार नैनी से जौनपुर जेल स्थानांतरित किया गया है। सूत्रों का कहना है इन बेतरतीब तरीके से हुए तबादलों में जमकर वसूली की गई है। ट्रांसफर पोस्टिंग के संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया तो इनका फोन ही नहीं उठा।
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तबादला होने के 24 घंटे बाद रोकने का जारी हुआ आदेश!
कारागार विभाग में पैसे का बोलबाला रहा। मुजफ्फरनगर से लखनऊ जिला जेल स्थानांतरित किए गए जेलर नीरज श्रीवास्तव का 24 घंटे में निरस्त कर दिया गया। इसी प्रकार मुरादाबाद के जेलर महेंद्र पाल का स्थानांतरण रोक दिया गया। प्रयागराज जिला जेल में तीन जेलर तैनात कर दिए गए जबकि बगल की नैनी सेंट्रल जेल पर एक भी जेलर तैनात नहीं किया गया। इसी प्रकार तीन से साढ़े तीन साल से एक ही जेल लूट मचाने वाले जेल अधीक्षकों के तबादले नहीं किए गए जबकि एक साल पहले पिछले स्थानांतरण सत्र में नई जेलों पर भेजे गए अधीक्षकों को स्थानांतरित कर दिया गया। आगरा जिला जेल में लूट मचाने को लेकर सुर्खियां बटोरने वाले अधीक्षक हरिओम शर्मा को स्थानांतरित नहीं किया गया। इसी प्रकार झांसी जेल में बंदियों से उगाही और जुआं खिलाने को लेकर चर्चा में रहने वाले अधीक्षक विनोद कुमार को भी नहीं हटाया गया। यह तबादले इस बात को प्रमाणित करते है कि कारागार विभाग में सरकार के स्थानांतरण नीति की जमकर धज्जियां उड़ाई गई है।
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