
मुरादाबाद जेल में दो पदों पर तैनात कर दिए चार जेलर
24 दिन बाद रिटायर होने वाले जेलर का कर दिया तबादला
स्थानांतरण होने के 24 घंटे बाद ही चहेते जेलर का रोका तबादला
Transfer अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन वसूली के चलते इस कदर अंधे हो गए हैं कि इनके लिए न तो सरकार की स्थानांतरण नीति का कोई मायने रह गया है और न ही जेल के नियमों का मतलब रह गया है। AIG प्रशासन ने मोटी रकम लेकर एक जेलर का तबादला 24 घंटे में रोक दिया। वही दूसरी ओर 26 दिन बाद सेवानिवृत होने वाले जेलर का तबादला कर दिया। ऐसा तब किया गया जब स्थानांतरण नीति में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जिस कर्मचारी को दो साल के अंदर सेवानिवृत होना है उसका स्थानांतरण नहीं किया जाए। दिलचस्प बात तो यह है किAIG प्रशासन की बेतहाशा वसूली की वजह वर्तमान समय में दो के बजाए चार जेलर तैनात हो गए हैं। अपने संवर्ग के जेलर को 24 घंटे में जेल पर रोके जाने के आदेश ने एआईजी कारागार प्रशासन के तबादल में खुलेआम किए जा रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। चर्चा है इस बार एआईजी प्रशासन ने पिछले स्थानांतरण सत्र की तरह तबादलों में करोड़ों के वारे न्यारे कर सिर्फ अपनी जेब भरने का काम किया है। उधर विभागीय अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे है।
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मामला प्रदेश की मुरादाबाद जेल का है। मुरादाबाद जेल में जेलर के दो पद है। इसमें एक पर महेंद्र पाल और दूसरे पर सुरेश मिश्रा तैनात थे। एआईजी प्रशासन ने जेलर महेंद्र पाल को लखनऊ जिला कारागार और 30 जून 2026 को सेवानिवृत होने वाले सुरेश मिश्रा को बागपत जेल पर स्थानांतरित कर दिया। इनके स्थान पर बंदायू के जेलर रणंजय सिंह और फतेहपुर के जेलर अनिल कुमार को मुरादाबाद जेल पर स्थानांतरित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण होने की सूचना मिलते ही जेलर महेंद्र पाल थैली लेकर एआईजी कारागार प्रशासन के पास पहुंच गए। एआईजी प्रशासन ने इनका तबादला बदलने के बजाए 24 घंटे के अंदर स्थानांतरण उसी जेल पर रोके जाने का आदेश जारी कर दिया।
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एआईजी कारागार प्रशासन की इस तानाशाही की वजह से वर्तमान समय में मुरादाबाद जेल में जेलर के दो पद है लेकिन जेल पर महेंद्र पाल, सुरेश मिश्रा, रणंजय सिंह और अनिल कुमार चार जेलर तैनात कर दिए गए। एक जेल पर चार जेलरों की तैनाती से जेल की पूरी व्यवस्था अस्त व्यस्त हो गई है। विभाग के तबादलों में एआईजी कारागार प्रशासन की वसूली का बोलबाला रहा। यह तो सिर्फ बानगी है। इसी प्रकार विभाग में मोटी वसूली कर सैकड़ों की संख्या में जेलर और डिप्टी जेलरों के बेतरतीब तरीके से तबादले किए गए है। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग और एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।


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