
Monsoon Update India : भारत में मानसून का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार को आधिकारिक रूप से केरल में दस्तक दे दी है। हालांकि इस बार मानसून अपने सामान्य समय से लगभग तीन दिन की देरी से पहुंचा है, लेकिन इसके आगमन के साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विभाग ने केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। साथ ही गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
उत्तर भारत की ओर तेजी से बढ़ेगा मानसून
केरल में प्रवेश करने के बाद मानसून धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य भारत के कई क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, दिल्ली और आसपास के राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। लंबे समय से भीषण गर्मी और लू का सामना कर रहे उत्तर भारत के लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में भारी बारिश की चेतावनी
IMD ने अपने ताजा पूर्वानुमान में बताया है कि केरल के कई हिस्सों में अगले कई दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ इलाकों में भी तेज बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं।
आखिर क्यों हुई मानसून के आगमन में देरी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार मानसून के आगमन में देरी के पीछे पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा एक शक्तिशाली तूफान जिम्मेदार है। इस तूफान ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी को अपनी ओर खींच लिया, जिससे मानसून की प्रगति प्रभावित हुई। इसके अलावा लक्षद्वीप क्षेत्र के पास बने चक्रवाती परिसंचरण ने भी मानसून की गति को धीमा कर दिया। यही कारण रहा कि मानसून सामान्य समय से कुछ दिन बाद केरल पहुंच पाया।
अल नीनो का मानसून पर क्या होगा असर?
अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है जिसका सीधा प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ता है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान मानसून कमजोर रहता है और तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जाता है। मौसम एजेंसियों के अनुसार वर्तमान में विकसित हो रहा अल नीनो मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकता है। अनुमान है कि इसकी स्थिति नवंबर तक बनी रह सकती है। यदि ऐसा होता है तो देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है। हालांकि फिलहाल मानसून की शुरुआत सकारात्मक संकेत दे रही है और किसान, कृषि क्षेत्र तथा आम जनता बेहतर बारिश की उम्मीद कर रहे हैं।
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