कारागार मुख्यालय के अफसरों से होगी करोड़ों के राजस्व की वसूली!

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मुख्यालय ने फारगो करने वालों को प्रमोशन देकर लगाया करोड़ों का चुना

जांच कमेटी की रिपोर्ट में भी प्रमोशन लेने वालों से रिकवरी का आदेश

शिकायतकर्ता का पटल परिवर्तन और वरिष्ठ अधीक्षक को हटाकर मामला दबाया

फारगो के बाद प्रमोशन लेकर सरकार को करोड़ो के राजस्व का चुना लगाने वाले कर्मियों से वसूली करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। फारगो के बाद प्रमोशन देने वाले कारागार मुख्यालय के अफसरों से वसूली की जायेगी। यह सवाल विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है मुख्यालय के अफसरों ने फारगो कर प्रमोशन लेने वाली एक महिला कर्मी से तो वसूली कर ली किन्तु 31 मई 2026 को सेवानिवृत होने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को वसूली के लिए एक नोटिस तक जारी नहीं किया गया। ऐसा तब किया गया है जब मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने फारगो के बाद चार प्रमोशन लेने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को कमेटी की रिपोर्ट के बाद भी बगैर नोटिस सर्व किए ही सेवानिवृत कर दिया गया। मुख्यालय अफसरों की एक ही मामले में दो तरह की कार्यवाही को लेकर विभाग में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। चर्चा है कि करोड़ो के राजस्व की भरपाई प्रमोशन देने वाले मुख्यालय के अफसरों से होनी चाहिए।

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फारगो कर गलत तरीके से चार प्रमोशन लेने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ मुखर्जी को रिकवरी से बचाने के मुख्यालय के अफसरों ने तमाम हथकंडे अपनाए। मामला सुर्खियों में आने के बाद एआईजी प्रशासन ने इसकी जांच के तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। कमेटी में डीआईजी रामधनी को अध्यक्ष, वरिष्ठ अधीक्षक मुख्यालय शशिकांत सिंह और सहायक लेखाधिकारी शशिकला को सदस्य नामित किया। जांच में फारगो कर प्रमोशन लेने का मामला सच पाए जाने पर मुख्यालय के अधिकारियों ने रिपोर्ट बदलवाने के लिए कमेटी के सदस्यों पर दबाव बनाया। अध्यक्ष और एक सदस्य तो मान गया लेकिन जो सदस्य नहीं माना उसको मुख्यालय से हटाकर बांदा जेल से अटैच कर फाइल को दबा दिया गया। इसी दौरान मामले के शिकायतकर्ता को शांत करने के उसका पटल डिस्पैच से हटाकर मानवाधिकार में भेज दिया गया। इसके बाद भी मामला सुर्खियों में बना रहा। फारगो के बाद चार प्रमोशन लेकर सरकार को करोड़ो रुपए का चुना लगाने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ मुखर्जी और मुख्यालय के प्रमोशन देने वाले अधिकारियों को बचाने की कवायद में जुटे हुए है। सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त इस वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से रिकवरी करना तो दूर की बात कारागार मुख्यालय के अधिकारी इसको संविदा पर रखने की फ़िराक़ में जुटे हैं। जिससे फारगो कर प्रमोशन लेने वाले कार्मिक से वसूली नहीं की जा सके। मामला विभागीय कार्मिकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2002 और 2003 में प्रमोशन फारगो कर प्रमोशन लेने वाले मुख्यालय कार्मिकों की मुख्यालय के ही एक कार्मिक ने आला अफसरों से शिकायत की। शिकायत की जांच के लिए मुख्यालय के विभागाध्यक्ष ने एक कमेटी गठित की। डीआईजी लखनऊ परिक्षेत्र रामधनी की अगुवाई में गठित तीन सदस्यीय कमेटी में वरिष्ठ अधीक्षक शशिकांत सिंह और अकाउंट अफसर शशिकला को शामिल किया गया। सूत्र बताते है कि प्रमोशन फारगो कर प्रमोशन लेने का मामला सत्य पाए जाने पर कमेटी के एक सदस्य ने जब साइन करने से मना किया तो उसे मुख्यालय से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया। यही नहीं प्रमोशन लेने वाले कार्मिक से वसूली नहीं होने पाए इसके लिए शिकायतकर्ता को पटल परिवर्तन कर अच्छे पटल पर भेजकर गलत तरीके से चार प्रमोशन लेने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ मुखर्जी को वसूली से बचाया जा रहा है। इस संबंध में जब एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वह तबादलों में बेतहाशा वसूली जुटे होने के कारण उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

एक को सजा और दूसरे को दिया तोहफा

वर्ष 2002-2003 में कनिष्ठ लिपिक से वरिष्ठ लिपिक पद पर प्रोन्नति पाने वाले करीब दो दर्जन कार्मिकों ने राजधानी लखनऊ में बने रहने के लिए प्रमोशन लेने से इनकार (फारगो) कर दिया था। इन 24 कार्मिकों में चार की मृत्यु हो गई 15 सेवानिवृत हो गए। फारगो के बाद प्रमोशन लेने वाली महिला कर्मी मंजू लता पांडे से वसूली भी की गई। जब फारगो के बाद चार प्रमोशन लेने वाले अमिताभ मुखर्जी 31 मई 2026 को सेवानिवृत हो गए। इनसे कारागार मुख्यालय के अधिकारियों ने एक पैसे की वसूली अभी तक नहीं की गई है। वर्तमान समय मे अमिताभ मुखर्जी के अलावा सुरेश कुमार, अलका जायसवाल, राजेश कुमार और राधेश्याम से वसूली होनी है वह आज मुख्यालय में कार्यरत है। इनसे भी वसूली की जानी चाहिए।

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