हाइब्रिड बीजों से सरसों की खेती को मिलेगी नई ताकत, जानें किसानों के अनुभव

हाइब्रिड बीजों से बढ़ सकती है सरसों की पैदावार, राजस्थान और हरियाणा के किसानों को मिल सकते हैं बेहतर नतीजे

New Delhi : अक्टूबर 2026। सरसों की बुवाई का सीजन नजदीक आते ही किसानों के लिए बेहतर बीजों का चयन और वैज्ञानिक तरीके से खेती करना अहम हो गया है। फिक्की और सीसीएस एनआईएएम की नई रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान और हरियाणा में सरसों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए हाइब्रिड बीजों को अपनाने और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर ध्यान देने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए खेती का रकबा बढ़ाने के बजाय प्रति हेक्टेयर पैदावार में सुधार करना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

राजस्थान में घटी सरसों की उत्पादकता

‘भारत के सरसों क्षेत्र की क्षमता का दोहन: प्रौद्योगिकी, उत्पादकता और किसान समृद्धि’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में राजस्थान और हरियाणा की उत्पादकता के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार, राजस्थान में सरसों की औसत पैदावार 2021-22 में 1,716 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में घटकर 1,552 किलोग्राम रह गई। इसके विपरीत, हरियाणा में इसी अवधि के दौरान उत्पादकता 1,914 किलोग्राम से बढ़कर 2,146 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पहुंच गई।

ये आंकड़े बताते हैं कि बेहतर बीजों के चयन, फसल प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादकता सुधारने की संभावनाओं पर काम करना जरूरी है।

किसानों ने बताए हाइब्रिड बीजों के फायदे

राजस्थान के कई किसानों ने हाइब्रिड सरसों की खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। वजीरपुर तहसील के डूंगरी गांव के एक किसान के मुताबिक, वह पिछले दस वर्षों से हाइब्रिड सरसों उगा रहे हैं। इससे होने वाली अतिरिक्त कमाई उनके बच्चों की पढ़ाई और स्कूल फीस में मदद करती है। किसान ने बताया कि पिछले साल खेत के एक हिस्से में नया हाइब्रिड बीज लगाने पर उन्हें 8 से 10 क्विंटल अतिरिक्त उपज मिली।

वहीं, फागी तहसील के कंवरपुरा गांव के एक किसान ने 40 बीघा में हाइब्रिड सरसों की खेती से प्रति बीघा करीब 80 किलोग्राम अतिरिक्त पैदावार मिलने की बात कही। उनके अनुसार, बढ़ी हुई आमदनी से वह मल्टीक्रॉप थ्रेशर खरीद सके, जिसका इस्तेमाल अब आसपास के किसानों को सेवाएं देने के लिए भी किया जा रहा है।

जालौर के कुछ किसानों ने हाइब्रिड बीजों को ओरोबैंकी जैसे परजीवी खरपतवार के प्रबंधन में उपयोगी बताया। बूंदी में किसानों ने सरसों में तेल की मात्रा को एक अहम पहलू बताया है।

100 किसानों के सर्वे में सामने आए आंकड़े

फिक्की-सीसीएस एनआईएएम के अध्ययन में राजस्थान के अलवर और श्रीगंगानगर तथा हरियाणा के रेवाड़ी के 100 किसानों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीगंगानगर में हाइब्रिड बीज अपनाने की दर करीब 48-50 प्रतिशत, अलवर में 65-70 प्रतिशत और रेवाड़ी में 75-80 प्रतिशत रही।

सर्वेक्षण में शामिल किसानों ने अनुमान लगाया कि नई तकनीकों और बेहतर खेती-पद्धतियों को अपनाने से उनकी कृषि आय में औसतन 12.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि फसल का नुकसान 23 प्रतिशत तक कम हुआ। ये आंकड़े सर्वे में शामिल किसानों के आकलन पर आधारित हैं।

वैज्ञानिक खेती और प्रशिक्षण पर जोर

रिपोर्ट में किसानों को सही बीज चुनने में मदद देने के लिए जिला स्तर पर खेतों में प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की सिफारिश की गई है। इससे किसान पैदावार, तेल की मात्रा, फसल पकने का समय, खेती की लागत और संभावित मुनाफे के आधार पर अलग-अलग बीजों की तुलना कर सकेंगे।

इसके अलावा, वैज्ञानिक बीजोपचार, समय पर बुवाई, संतुलित खाद का इस्तेमाल, उचित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और कीटों व रोगों का एकीकृत प्रबंधन भी जरूरी बताया गया है।

सरसों की खेती किसानों की आजीविका के साथ खाद्य तेल की घरेलू उपलब्धता के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती और बाजार से मजबूत जुड़ाव किसानों की उत्पादकता तथा आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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