
Lucknow: अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार चंद्र मास की वह अंतिम तिथि है जब आकाश में चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य रहता है और रात में घना अंधेरा होता है। चूंकि यह पितृपक्ष चल रहा है इसलिए इस बार अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या कहा जाएगा। नौ अक्टूबर 2026 को रात 9:35 बजे इसका शुभारंभ होगा और 10 अक्टूबर 2026 को रात 9:19 बजे समापन।
इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही सीध में होते हैं, जिससे चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर नहीं रहता और वह दिखाई नहीं देता। यह कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं और महीने की आखिरी (तीसरी) तिथि होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ‘अमावसु’ नामक पितर देवता के नाम पर इस तिथि का नाम अमावस्या पड़ा है।
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पितृ दोष मुक्ति और तर्पण
अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव माने जाते हैं। इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस दिन भूखे लोगों या ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान देने से पितृ दोष दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। अमावस्या के दिन गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इससे पापों का नाश होता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, काले तिल और छाते का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

आध्यात्मिक और मानसिक साधना
अमावस्या की रात सबसे अंधेरी होती है, इसलिए इस दिन तंत्र साधना, मंत्र जाप और आत्म-निरीक्षण के जरिए मन के अंधकार (नकारात्मक विचारों) को दूर किया जाता है। इस दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से दूर रहकर पूर्ण सात्विक जीवन जीने की सलाह दी जाती है ताकि मानसिक शांति बनी रहे।
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भारत का सबसे बड़ा त्योहार, दीपावली, कार्तिक मास की अमावस्या को ही मनाया जाता है। इस रात दीप जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाया जाता है। जब अमावस्या सोमवार को आती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं, जो सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष होती है। वहीं माघ महीने की मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने का विधान है।
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