
AI से बनाया नकली मगरमच्छ का फोटो, असली समझकर मचा हड़कंप
Singapore : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से तस्वीर बनाना आज बेहद आसान हो गया है। लेकिन अगर किसी AI से बनाई गई तस्वीर को असली बताकर साझा किया जाए और उससे सरकारी एजेंसियों का पूरा तंत्र सक्रिय हो जाए, तो मामला गंभीर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है। सिंगापुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने पांडन रिजर्वायर में मगरमच्छ दिखाई देने की फर्जी AI तस्वीर अपने साथी को भेज दी। तस्वीर को असली समझकर अधिकारियों ने मगरमच्छ की तलाश शुरू कर दी और जलाशय में पानी से जुड़ी गतिविधियां भी रोक दी गईं।
मामला 30 वर्षीय ये लिन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त को उसने पांडन रिजर्वायर में मगरमच्छ होने का दावा करते हुए AI से तैयार की गई तस्वीर अपने एक सहयोगी को भेजी। तस्वीर सामने आने के बाद इसकी सूचना सिंगापुर की राष्ट्रीय जल एजेंसी PUB तक पहुंची। एजेंसी ने तस्वीर की वास्तविकता जांचने के लिए कई AI डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके नतीजे निर्णायक नहीं रहे। सुरक्षा को देखते हुए अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।
इसके बाद PUB और नेशनल पार्क्स बोर्ड (NParks) ने इलाके में मगरमच्छ की तलाश और उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई और जलाशय में होने वाली गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। रोइंग और कैनोइंग से जुड़ी संस्थाओं को भी पानी में गतिविधियां स्थगित करने के निर्देश दिए गए। यानी एक तस्वीर के आधार पर सरकारी एजेंसियों और खेल संगठनों को सुरक्षा संबंधी कदम उठाने पड़े।
अगले दिन सामने आया तस्वीर का सच
जांच आगे बढ़ी तो 21 अगस्त को अधिकारियों ने पुष्टि की कि मगरमच्छ की तस्वीर असली नहीं थी। इसके बाद तलाशी अभियान बंद कर दिया गया और जल गतिविधियां फिर से शुरू कर दी गईं। PUB ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि तस्वीर AI की मदद से बनाई गई थी और इसे ये लिन ने अपने सहयोगी को भेजा था।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, ये लिन ने कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन से AI से बनाई गई तस्वीरों और Gemini AI ऐप की लॉग हिस्ट्री को भी डिलीट कर दिया था। इसी कार्रवाई को न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप से जोड़ा गया है।
दो आरोप, जेल और जुर्माने का प्रावधान
ये लिन के खिलाफ झूठा संदेश पहुंचाने और न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। पहले आरोप में दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, 10 हजार सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप में अधिकतम सात साल की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
ये लिन ने अदालत में बताया है कि वह आरोपों को स्वीकार करने का इरादा रखता है। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर 2026 को होनी है। फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम सजा नहीं सुनाई है।
यह घटना AI से तैयार तस्वीरों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक अहम उदाहरण है। तकनीक से बनाई गई तस्वीर वास्तविक जैसी दिखाई दे सकती है, लेकिन उसे असली घटना के तौर पर पेश करने से लोगों में भ्रम पैदा होने के साथ-साथ सरकारी संसाधनों का भी इस्तेमाल हो सकता है। सिंगापुर पुलिस ने लोगों से ऐसी फर्जी या डिजिटल रूप से बदली गई तस्वीरों को वास्तविक बताकर सरकारी एजेंसियों के साथ साझा न करने की अपील की है।
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