हर दौरा मिर्गी नहीं होता, बच्चों में सीजर आने के पीछे छिपी हो सकती हैं ये बीमारियां

Seizures in children

Seizures in children : जब किसी बच्चे को अचानक दौरा पड़ता है तो परिवार के लोग अक्सर इसे मिर्गी (Epilepsy) मान लेते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर दौरा मिर्गी का संकेत नहीं होता। कई बार यह शरीर या दिमाग से जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। ऐसे में सही समय पर कारणों की पहचान करना बेहद जरूरी हो जाता है। आज के समय में बच्चों में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य मिर्गी, विकास में देरी, व्यवहार में बदलाव या पढ़ाई में ध्यान न लगने जैसी समस्याओं के रूप में दिखाई देते हैं। इसलिए माता-पिता को इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।

बच्चों में दौरे पड़ने के प्रमुख कारण

दौरे पड़ने की समस्या कई कारणों से हो सकती है। मिर्गी इसके प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन इसके अलावा भी कई स्वास्थ्य स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं।

 तेज बुखार :   छोटे बच्चों में तेज बुखार के कारण दौरे पड़ना एक सामान्य समस्या है। इसे फेब्राइल सीजर कहा जाता है। यह आमतौर पर छह  महीने से पांच  साल तक के बच्चों में देखा जाता है।

 ब्लड शुगर का कम होना : यदि बच्चे के शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बहुत कम हो जाए तो मस्तिष्क को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे दौरे आने की संभावना बढ़ जाती है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन : सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर के सामान्य कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं। इनका संतुलन बिगड़ने पर दौरे पड़ सकते हैं।

 संक्रमण :  मस्तिष्क या शरीर में गंभीर संक्रमण भी बच्चों में दौरे का कारण बन सकते हैं। मेनिन्जाइटिस और एन्सेफलाइटिस जैसी बीमारियां इसका उदाहरण हैं।

न्यूरोलॉजिकल विकार :  कुछ बच्चों में जन्मजात न्यूरोलॉजिकल समस्याएं या मस्तिष्क के विकास में गड़बड़ी भी बार-बार दौरे पड़ने का कारण बन सकती है।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। यदि बच्चे में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बहुत कम उम्र में दौरे शुरू होना

अचानक झटके लगना

बिना कारण बार-बार गिर जाना

बार-बार नीचे की ओर देखना

इलाज के बाद भी दौरे जारी रहना

उम्र के अनुसार विकास न होना

शरीर में असामान्य हरकतें दिखाई देना

पहले सीखी हुई बातें भूलने लगना

ध्यान लगाने में कठिनाई होना

ये लक्षण सामान्य मिर्गी से अलग किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत हो सकते हैं।

सही समय पर जांच क्यों है जरूरी?

यदि बच्चे को बार-बार दौरे पड़ रहे हैं तो केवल घरेलू उपायों या अनुमान के आधार पर इलाज नहीं करना चाहिए। न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा विस्तृत जांच कराना जरूरी है। आधुनिक चिकित्सा में EEG, MRI और अन्य न्यूरोलॉजिकल जांचों की मदद से दौरे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सकता है। समय पर पहचान होने पर बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।


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