
Petrol Diesel Price Cut अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बाद कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम घटाए गए हैं। पाकिस्तान, चीन, नेपाल और म्यांमार जैसे भारत के पड़ोसी देशों में जून महीने से पेट्रोल की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। वहीं भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर देश में ईंधन कब सस्ता होगा। ग्लोबल पेट्रोल प्राइस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में पेट्रोल की औसत कीमत 147.90 रुपये प्रति लीटर से घटकर 145.99 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 108.71 रुपये प्रति लीटर है, जो वैश्विक औसत से लगभग 37 रुपये कम है।
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पड़ोसी देशों में कितने घटे पेट्रोल के दाम?
पाकिस्तान में पेट्रोल की औसत कीमत 139.41 रुपये प्रति लीटर से घटकर 130.82 रुपये प्रति लीटर हो गई है। चीन में पेट्रोल 133.47 रुपये से घटकर 132.81 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है। वहीं नेपाल में पेट्रोल 136.41 रुपये से घटकर 135.86 रुपये और म्यांमार में 142.54 रुपये से घटकर 140.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसके विपरीत बांग्लादेश और श्रीलंका में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। श्रीलंका में पेट्रोल 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो भारत के पड़ोसी देशों में सबसे अधिक है।
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डीजल के मोर्चे पर भी मिला मिश्रित संकेत
डीजल की कीमतों में भी कुछ देशों में राहत देखने को मिली है। पाकिस्तान में डीजल 139.07 रुपये से घटकर 130.48 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चीन और नेपाल में भी डीजल के दाम में मामूली गिरावट आई है। हालांकि श्रीलंका, भूटान और म्यांमार में डीजल महंगा हुआ है।
भारत में क्यों नहीं घट रहे दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के दाम पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि टैक्स, परिवहन लागत और तेल कंपनियों के मार्जिन भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने वैश्विक संकट और युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ईंधन पर करों में कटौती की थी। हालांकि तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण फिलहाल कीमतों में कटौती की संभावना कम दिखाई दे रही है।
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क्या और बढ़ सकते हैं दाम?
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 2.5 रुपये प्रति लीटर तक अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि ऐसा होता है तो हालिया बढ़ोतरी के साथ कुल प्रभाव लगभग 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है।
कब मिल सकती है राहत?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी तब संभव होगी, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 से 80 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में स्थिर हो जाएं और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम हों।


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