तमिलनाडु की सियासत में ‘सिंघम’ का नया दांव और BJP के सामने बड़ी चुनौती

BJP
अजय कुमार                             
अजय कुमार

दक्षिण भारत के सियासी समर में तमिलनाडु इस वक्त एक बेहद दिलचस्प और जटिल मोड़ पर खड़ा है। कर्नाटक कैडर के पूर्व  IPS अधिकारी और तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई की दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकातों ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। चेन्नई एयरपोर्ट पर बिना BJP के झंडे वाली गाड़ी से उतरने से लेकर दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह, BJP अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन मंत्री बीएल संतोष के साथ बंद कमरों में हुई बैठकों तक, हर घटनाक्रम इसी ओर इशारा कर रहा है कि यह रिश्ता अब एक ‘म्युचुअल डिवोर्स’ यानी आपसी सहमति से जुदा होने की कगार पर पहुंच गया है। करीब पांच साल का यह साथ दोनों ही पक्षों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जहां दोनों ने एक-दूसरे को बहुत कुछ दिया, लेकिन अब इस रिश्ते की उम्र पूरी होती दिख रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि अन्नामलाई BJP से कोई दुश्मनी या टकराव मोल लेकर नहीं, बल्कि एक बेहद ‘खूबसूरत मोड़’ पर हंसते-हंसते विदा होना चाहते हैं, ताकि भविष्य में कभी जरूरत पड़ने पर गठबंधन या साथ मिलकर काम करने के विकल्प हमेशा खुले रहें।

ये भी पढ़े

असद के साथ पूरा विपक्ष, सूर्या अकेला क्यों!

राजनीतिक गलियारों और सूत्रों के हवाले से जो खबरें छनकर बाहर आ रही हैं, उनके मुताबिक अन्नामलाई ने दिल्ली दरबार में साफ तौर पर पार्टी से अलग होने की इच्छा जताते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। हालांकि, BJP का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें इतनी आसानी से खोना नहीं चाहता। यही वजह है कि जब अन्नामलाई अमित शाह से मुलाकात के बाद वापस चेन्नई लौटने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट के रास्ते में थे, तब उन्हें फोन करके दोबारा बातचीत के लिए वापस बुला लिया गया। शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि वह प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के अपने फैसले पर एक बार फिर ठंडे दिमाग से विचार करें। BJP की तरफ से उन्हें मनाने के लिए राज्यसभा सीट तक का ऑफर दिया गया, जिसे अन्नामलाई ने बेहद शालीनता से ठुकरा दिया। दरअसल, अन्नामलाई ने हाईकमान के सामने बहुत स्पष्ट तौर पर दो ही विकल्प रखे हैं। पहला विकल्प यह है कि उन्हें पूरी स्वायत्तता, असीमित अधिकार और कम से कम सात साल के एक लंबे कार्यकाल के साथ दोबारा तमिलनाडु BJP की कमान सौंपी जाए। दूसरा विकल्प यह कि अगर पार्टी ऐसा नहीं कर सकती, तो उन्हें गरिमापूर्ण तरीके से अपनी अलग राजनीतिक राह चुनने की आजादी दे दी जाए।

ये भी पढ़े

डेमोग्राफी चेंज के खतरे पर मोदी सरकार का कड़ा प्रहार

अन्नामलाई का पूरा ध्यान इस वक्त तमिलनाडु की जमीनी हकीकत पर केंद्रित है। उनका तर्क है कि राज्य के मौजूदा सियासी मिजाज में किसी भी शुद्ध राष्ट्रीय पार्टी के लिए बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं बची है। वहां एक ऐसी नई और वैकल्पिक राजनीतिक ताकत की जरूरत है, जो जमीन से जुड़ी हो और तमिल अस्मिता के साथ-साथ तमाम तबकों की चिंताओं को सुनने का माद्दा रखती हो। सूत्रों की मानें तो अन्नामलाई सीधे कोई राजनीतिक दल घोषित करने के बजाय सबसे पहले तमिलनाडु में एक बड़ा गैर-राजनीतिक जनआंदोलन शुरू करने की तैयारी में हैं, जिसका नाम ‘मक्कल शक्ति इयक्कम’ यानी ‘पीपुल्स पावर मूवमेंट’ हो सकता है। यह आंदोलन ‘राष्ट्रवादी तमिल दर्शन’ की बुनियाद पर खड़ा होगा, जिसे बाद में चलकर एक मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक दल का रूप दिया जा सकता है। आगामी सात जून को वह अपने तमाम समर्थकों के साथ एक बड़ी बैठक करने वाले हैं, जिसके बाद उनकी आगे की रणनीति और इस नए सफर का आधिकारिक ऐलान होने की पूरी संभावना है।

ये भी पढ़े

पूर्वांचल में सपा के PDA केखिलाफ बीजेपी का PDV दांव

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे तमिलनाडु के बदलते राजनीतिक समीकरण और हाल ही में उभरा एक नया ‘शून्य’ सबसे बड़ी वजह है। दरअसल, सिनेमा के पर्दे से सियासत के मंच पर आए सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 108 सीटें जीतकर राज्य के दशकों पुराने द्रविड़ समीकरण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। विजय की इस आक्रामक एंट्री ने सत्तारूढ़ DMK और मुख्य विपक्षी दल AIADMK के पारंपरिक वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगाई है। अन्नामलाई को लगता है कि थलपति विजय के इस उभार के बाद द्रविड़ राजनीति का वह पुराना दौर अब खत्म हो चुका है, जहां सिर्फ भाषा और क्षेत्रीयता के पुराने ढर्रे पर चुनाव जीते जाते थे। इस वक्त विजय को काउंटर करने के लिए राज्य में कोई दूसरा बड़ा और जुझारू चेहरा नहीं है। ऐसे में नए प्रयोगों और चेहरों के लिए तमिलनाडु की धरती पर एक बड़ा स्पेस तैयार हुआ है, जिसे अन्नामलाई अपनी शर्तों पर भुनाना चाहते हैं।

ये भी पढ़े

यूपी चुनाव 2027 : मायावती फिर बदल देंगी उत्तर प्रदेश की राजनीति?

BJP के भीतर भी इस बात को लेकर एक गंभीर आत्ममंथन चल रहा है कि अन्नामलाई का जाना पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है। राज्य के कई सीनियर नेताओं का दबी जुबान में मानना है कि दिल्ली में बैठे रणनीतिकार तमिलनाडु के जमीनी मिजाज और चुनावी नब्ज को ठीक से समझने में नाकाम रहे। अगर पार्टी ने अन्नामलाई को पूरी खुली छूट और फैसले लेने की आजादी दी होती, तो आज विजय राज्य में राजनीतिक परिवर्तन के अकेले नायक बनकर नहीं उभरते। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो अन्नामलाई की बेहद आक्रामक और लोकप्रिय ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी भूमि, मेरे लोग) पदयात्रा ने राज्य की राजनीति का नक्शा बदल दिया था। करीब 200 दिनों तक चली और सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को नापने वाली इस यात्रा की बदौलत ही 2021 के चुनाव में महज 3 फीसदी पर सिमटी BJP का वोट शेयर 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 11 फीसदी तक पहुंच गया था। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नामलाई को किनारे करते हुए नैनार नागेंद्रन को कमान सौंप दी, जिसके पीछे AIADMK के साथ गठबंधन की मजबूरियां बताई गईं। नतीजा यह हुआ कि BJP का वोट शेयर 2026 में एक बार फिर गिरकर महज 3 फीसदी पर आ गया। इस पूरी उठापटक ने अन्नामलाई के समर्थकों के भीतर इस भरोसे को और मजबूत कर दिया है कि उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक लोकप्रियता और वजूद, सूबे में BJP की अपनी सांगठनिक ताकत से कहीं ज्यादा बड़ा हो चुका है। यही वजह है कि चुनावी हार के बावजूद अन्नामलाई लगातार सुर्खियों के केंद्र में बने हुए हैं। 2021 में करूर की अरावाकुरिची सीट से विधानसभा चुनाव हारने और 2024 में कोयंबटूर लोकसभा सीट पर शिकस्त मिलने के बाद भी उनकी प्रासंगिकता रत्ती भर कम नहीं हुई है। उनकी साफ-सुथरी छवि, प्रशासनिक अनुभव, सुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख युवाओं और शहरी वोटरों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

ये भी पढ़े

UP में भी मुस्लिम लीग के साथ चुनाव लड़ सकती कांग्रेस

हालांकि, BJP जैसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी का ‘ठप्पा’ हटने के बाद अपनी नई स्वतंत्र पहचान बनाना अन्नामलाई के लिए किसी बड़े स्टार्ट-अप को शुरू करने जैसा ही जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण काम है। भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहां राष्ट्रीय दलों से अलग होकर क्षेत्रीय दल बनाने वाले कद्दावर नेता बाद में अपनी अलग पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष करते दिखे। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का उदाहरण सबके सामने है, जो BJP से अलग होकर सालों तक पदयात्राएं करते रहे लेकिन अंततः जनता के बीच से अपनी पुरानी छवि नहीं मिटा पाए और वापस BJP में ही अपनी पार्टी का विलय करना पड़ा। अन्नामलाई के सामने भी यही सबसे बड़ा खतरा है कि क्या वह खुद पर लगे BJP के रंग को उतारकर जनता को यह समझा पाएंगे कि उनका नया आंदोलन वाकई अलग और पूरी तरह तमिल अस्मिता को समर्पित है। बहरहाल, 41 वर्षीय युवा और ऊर्जावान अन्नामलाई के पास खोने के लिए कुछ नहीं है और समय उनके पक्ष में है। वह इस पूरी विदाई को मशहूर शायर बशीर बद्र के उस फलसफे की तरह जीना चाहते हैं, जिसमें कहा गया है कि ‘दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों।’ अब देखना यह होगा कि 7 जून को चेन्नई की धरती से वह कौन सा नया राजनीतिक शंखनाद करते हैं।

Spread the love

Jail
Crime News homeslider Raj Dharm UP Uttar Pradesh

AIG जेल की वसूली करने वाले बाबुओं का नहीं होता पटल परिवर्तन!

प्रदेश की जेलों के साथ ध्वस्त की कारागार मुख्यालय की व्यवस्था कानपुर परिक्षेत्र के बाबू को सौंप दिया जेल मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार Jail कारागार मुख्यालय में तैनात अपर महानिरीक्षक कारागार (AIG) प्रशासन ने प्रदेश की जेलों की ही नहीं कारागार मुख्यालय की व्यवस्थाओं को भी ध्वस्त कर दिया है। वसूली के चक्कर में एआईजी […]

Spread the love
Read More
TMC Crisis and Controversy
Politics

सत्ता की क्रूरता और राजनीति का यथार्थ

  शश्वत तिवारी TMC Crisis and Controversy : सत्ता कितनी क्रूर और बेरहम होती है, उसका पता तृणमूल नेताओं के रवैये से चलता है। खराब समय की पहली बरसात भी नहीं झेल पाई तृणमूल कांग्रेस। एक वक्त पर संघर्ष की पार्टी थी, लेकिन अब पार्टी अपने वजूद के लिए ही संघर्ष कर रही है। जिन्होंने […]

Spread the love
Read More
North-East AFSPA Update
Politics

AFSPA को लेकर अमित शाह का बड़ा दावा, नॉर्थ-ईस्ट से हटने के संकेत

North-East AFSPA Update: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अगले वर्ष तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरा नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट (AFSPA) के दायरे से बाहर हो सकता है। उन्होंने यह बयान असम-नागालैंड सीमा पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां केंद्र, असम सरकार और नागालैंड सरकार के […]

Spread the love
Read More