भारतीय खाने में हरी मिर्च का खास महत्व होता है। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें खाने के साथ तीखी हरी मिर्च न मिले तो स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन बाजार में मिलने वाली हर हरी मिर्च एक जैसी तीखी नहीं होती। कुछ मिर्च बहुत हल्की होती हैं, जबकि कुछ बेहद तेज होती हैं। अगर आप भी सबसे तीखी हरी मिर्च चुनना चाहते हैं तो कुछ खास बातों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले मिर्च के रंग को ध्यान से देखना चाहिए। आमतौर पर गहरे हरे रंग की मिर्च हल्के हरे या पीलेपन वाली मिर्च से ज्यादा तीखी मानी जाती है। इसका कारण यह है कि गहरे रंग वाली मिर्च अधिक परिपक्व होती है और उसमें तीखापन देने वाला तत्व ज्यादा मात्रा में पाया जाता है।
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मिर्च का आकार भी उसके तीखेपन के बारे में संकेत देता है। पतली और लंबी मिर्चें आमतौर पर ज्यादा तीखी होती हैं, जबकि मोटी और छोटी मिर्च अपेक्षाकृत कम तीखी हो सकती हैं। इसलिए अगर आपको ज्यादा तीखी मिर्च चाहिए तो बाजार में पतली और लंबी मिर्च को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा मिर्च की बनावट भी काफी मायने रखती है। जो मिर्च देखने में चिकनी, चमकदार और ताजी लगती है, वह अक्सर ज्यादा तीखी होती है। ताजी मिर्च में हल्की तेज खुशबू भी आती है, जिससे उसके तीखेपन का अंदाजा लगाया जा सकता है। हरी मिर्च खरीदते समय उसकी ताजगी पर भी ध्यान देना जरूरी है। मुरझाई या सिकुड़ी हुई मिर्च स्वाद में कमजोर हो सकती है। वहीं ताजी और सख्त मिर्च ज्यादा बेहतर मानी जाती है।
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हालांकि तीखी मिर्च खाने के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। मिर्च काटते समय हाथों में जलन से बचने के लिए दस्ताने पहनना बेहतर होता है। अगर दस्ताने उपलब्ध न हों तो मिर्च काटने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। साथ ही मिर्च काटने के तुरंत बाद आंखों या चेहरे को छूने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जलन हो सकती है। इसके अलावा बहुत अधिक मात्रा में तीखी मिर्च का सेवन भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए मिर्च का स्वाद जरूर लें, लेकिन संतुलित मात्रा में ही इसका उपयोग करें।
