गैस सप्लाई संकट से निपटने के लिए सरकार का बड़ा कदम, ESMA लागू कर तय की प्राथमिकता

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वैश्विक हालात के बीच देश में घरेलू गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। सरकार ने आपात प्रावधानों के तहत  आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम कार्य (ESMA) लागू करते हुए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर तय करने का आदेश जारी किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष और उसमें संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका के कारण वैश्विक एलपीजी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। सरकार ने वर्ष 2026 में प्राकृतिक गैस आपूर्ति को विनियमित करने के लिए एक नया आदेश जारी किया है, जिसका उद्देश्य घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही लागू माना जाएगा।

ESMA एक ऐसा कानून है जिसे भारत में आवश्यक सेवाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी बिना अनुमति हड़ताल नहीं कर सकते, ताकि आम लोगों की जिंदगी पर असर न पड़े। सरकार ने गैस आपूर्ति को चार प्रमुख प्राथमिकता वाले सेक्टरों में बांटा है। पहले प्राथमिकता वाले सेक्टर में घरेलू पाइप्ड गैस (PNG), परिवहन के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG), एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन संचालन से जुड़े आवश्यक ईंधन शामिल हैं। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के लगभग 100 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

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दूसरे सेक्टर में उर्वरक उद्योग को शामिल किया गया है। सरकार के आदेश के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को उनकी पिछले छह महीने की औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही इस गैस का उपयोग केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही किया जा सकेगा और इसकी जानकारी पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ  (PPAC) को देनी होगी। तीसरे सेक्टर में चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक इकाइयों को रखा गया है। इन उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। चौथे सेक्टर में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के तहत आने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता शामिल हैं।

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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि प्राथमिक सेक्टरों की जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक हुआ तो कुछ क्षेत्रों में गैस आपूर्ति कम की जा सकती है। इसमें पेट्रोकेमिकल इकाइयां और कुछ बिजली संयंत्र शामिल हो सकते हैं। तेल शोधन कंपनियों को भी उनकी औसत खपत का लगभग 65 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने की योजना है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में आवश्यक सेवाओं और घरेलू जरूरतों के लिए गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।

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