आजकल कम उम्र में ही लोगों की फिटनेस तेजी से गिरती नजर आ रही है। पहले जहां युवा आसानी से घंटों तक काम या एक्सरसाइज कर लेते थे, वहीं अब थोड़ी सी मेहनत करने पर ही सांस फूलने लगती है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। कई लोगों को सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या हल्की एक्सरसाइज करने में भी परेशानी होने लगती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स इस समस्या को एक्सरसाइज इनटॉलरेंस कहते हैं।
एक्सरसाइज इनटॉलरेंस ऐसी स्थिति होती है जब व्यक्ति अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाता। थोड़ी सी मेहनत करने पर ही थकान महसूस होने लगती है और दिल तेजी से धड़कने लगता है। कई मामलों में फेफड़े और दिल सामान्य होते हैं, लेकिन फिर भी शरीर जल्दी थक जाता है। डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कोविड महामारी के दौरान लंबे समय तक घरों में रहने और फिजिकल एक्टिविटी कम होने से लोगों की फिटनेस पर बड़ा असर पड़ा है। इस स्थिति को पोस्ट-कोविड डीकंडीशनिंग भी कहा जाता है। इसके अलावा लगातार बैठकर काम करना, मोटापा, तनाव, धूम्रपान और प्रदूषण भी शरीर की सहनशक्ति को कम कर देते हैं।
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जब शरीर लंबे समय तक एक्टिव नहीं रहता, तो दिल और सांस लेने वाली मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। यही कारण है कि थोड़ी सी मेहनत करते ही सांस फूलने लगती है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। योगगुरु स्वामी रामदेव का कहना है कि नियमित योग और प्राणायाम से शरीर की ताकत और स्टैमिना दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। रोजाना योग करने से फेफड़ों की क्षमता बेहतर होती है और दिल भी मजबूत बनता है।
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अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भस्त्रिका जैसे प्राणायाम सांस से जुड़ी मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके साथ ही रोजाना वॉक, हल्की एक्सरसाइज और संतुलित आहार भी बेहद जरूरी है। अगर आपको बार-बार सांस फूलने या दिल की धड़कन तेज होने की समस्या महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके इस समस्या से बचा जा सकता है और शरीर को फिर से मजबूत बनाया जा सकता है।
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