पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। BMI ने अपनी ‘इंडिया आउटलुक’ रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में हालात नहीं सुधरे तो भारत के निवेश माहौल और जीडीपी वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, तो भारत की जीडीपी पर 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का असर पड़ सकता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, ऐसे में तेल कीमतों में उछाल सीधे तौर पर आयात बिल और महंगाई को बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च से अनिश्चितता का स्तर और बढ़ सकता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, बीएमआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत पर बरकरार रखी है, जो चालू वित्त वर्ष के अनुमानित 7.9 प्रतिशत से कम है।
तनाव की पृष्ठभूमि में हाल ही में United States और Israel द्वारा Iran पर सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम रास्ता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो तेल कीमतों में तेज उछाल से भारत में महंगाई बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ता खर्च और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और नीति-निर्माताओं के सामने आर्थिक स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
