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बस्तर दशहरा: 305 साल पुरानी काछन गादी की परंपरा

आज भी राज परिवार मांगता है देवी से अनुमति काछन देवी की आराधना के बाद शुरू होंगे दशहरा के पारंपरिक आयोजन बेल की कांटेदार झूले पर लिटाई जाती है नाबालिग कन्या हेमंत कश्यप Jagdalpur: बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा की परंपराएं आज भी सदियों पुरानी जनजातीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। इसी […]

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Jagdalpur
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माता सीता से जुड़ी है कमरछठ की यह मान्यता, देवधान के चावल से तैयार हुआ था प्रसाद

Jagdalpur: छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और लोक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। इसी बस्तर को प्राचीन काल में दंडकारण्य के नाम से जोड़ा जाता है। कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व से जुड़ी एक लोक मान्यता के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता ने इसी दंडकारण्य क्षेत्र में अपने देवर लक्ष्मण […]

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Bailadila's Nandiraj
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कैलाश की तरह पूजे जाते हैं नंदीराज

3968.8 फुट ऊँचा है बैलाडीला का यह शिखर आसाम में भी यहां आते हैं कोया समाज के प्रकृति उपासक हेमंत कश्यप Bailadila’s Nandiraj : प्रकृति पूजा का संदेश द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने मानव समाज को दिया था। तब से लोग नदी-पहाड़ों की पूजा करते आ रहे हैं। इस संदेश का परिपालन हजारों साल […]

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Religious Traditions of Bastar
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बस्तर में ग्रामदेव के रूप में पूजे जाते हैं शिव और शक्ति, सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवंत

Religious Traditions of Bastar : बस्तर की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की धार्मिक आस्थाएं भी अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण पूरे देश में अलग स्थान रखती हैं। बस्तर के वनांचल में भगवान शिव और शक्ति की आराधना ग्रामदेव के रूप में सदियों से होती आ […]

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