
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर गोजये ने किया गोष्ठी का आयोजन
पत्रकारिता को अन्य स्तंभों से दूरी बनानी होगी: प्रो. अशोक
सोशल मीडिया के फैलाव ने पारंपरिक मीडिया का दायरा संकुचित किया: डॉ हर्ष
सोशल मीडिया ने विश्वसनीयता का संकट बढ़ाया: प्रो. धर्मव्रत
सोशल मीडिया ने पत्रकारिता को बड़ी क्षति पहुंचाई: डॉ. त्रिपाठी
पत्रकारिता को अपना पुनर्मूल्यांकन करना होगा: जगदीश
सकारात्मक सोशल मीडिया की आवश्यकता है: अखिलेश चंद्र
उमेश चन्द्र त्रिपाठी/ मनोज कुमार त्रिपाठी
journalism day पत्रकारिता लोकतंत्र का ऐसा स्तंभ है जिसे अन्य तीन स्तंभों से दूरी बनाकर रखनी होगी। पत्रकार का सबसे बड़ा पुरस्कार पाठकों की विश्वसनीयता होता है। सोशल मीडिया ने पारंपरिक पत्रकारिता को आत्म मंथन के लिए बाध्य कर दिया है। यह विचार विश्व के नामचीन विद्वान प्रोफेसर डॉक्टर अशोक जाह्नवी प्रसाद ने आज व्यक्त किया। वह आज गोरखपुर के एक सभागार में गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित गोष्ठी में बतौर सभा अध्यक्ष बोल रहे थे। प्रोफेसर प्रसाद ने कहा कि संविधान की रक्षा का दायित्व पत्रकारिता पर ही है। डर के मध्य पत्रकारिता नहीं होती। हमें इमरजेंसी में अपने अस्तित्व के लिए लड़ने का मौका मिला था, पर हमने पूरा सबक नहीं सीखा।
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इसके पूर्व आज प्रेस क्लब गोरखपुर के सभी सदस्यों को उन्होंने संकल्पित शपथ दिलाई। इस दौरान गोजए के प्रमुख संरक्षक डॉ एसपी त्रिपाठी को बाबू हरिहर प्रसाद स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से नवाजा गया। विशिष्ट प्रतिभा सम्मान में प्रख्यात समाजसेवी किन्नर प्रेमा मौसी को किन्नर विभूषण सम्मान, प्रसार भारती के अधिकारी डॉक्टर बृजेंद्र नारायण को स्वर्गीय अरविंद शुक्ला स्मृति, शैलेंद्र श्रीवास्तव को स्वर्गीय फूल नारायण धर द्विवेदी स्मृति, विजय उपाध्याय को स्वर्गीय अशोक अज्ञात स्मृति तथा मृत्युंजय उपाध्याय नवल को स्वर्गीय अरुण गोरखपुरी स्मृति साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया गया।
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पारंपरिक पत्रकारिता पर सोशल मीडिया का प्रभाव विषयक गोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए मूर्धन्य पत्रकार डॉ कुमार हर्ष ने कहा बदलाव प्रकृति का नियम है। परंतु बदलाव बेहतरी के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2010 में फेसबुक और ट्विटर के आने के बाद पारंपरिक पत्रकारिता और सोशल मीडिया की प्रतिद्वंदिता खुलकर सामने आ गई। सोशल मीडिया के फैलाव ने पारंपरिक पत्रकारिता के दायरे को संकुचित कर दिया। खबरों की विश्वसनीयता घटी तो खबरों का दायरा भी बढ़ा। उपग्रहट अपने पसंद की खबर पढ़ सकता है। प्रोफेसर डॉ अशोक द्वारा प्रेस क्लब गोरखपुर के सदस्यों को कर्तव्य के लिए संकल्पित शपथ ग्रहण करने के बाद मुख्य अतिथि प्रोफेसर धर्मव्रत तिवारी ने कहा कि पारंपरिक पत्रकारिता में खबरें प्रशासन के पूर्व संपादकों की कड़ी निगरानी में बनती है जबकि सोशल मीडिया में और स्मार्टफोन धारक स्वयं एक फूल यूनिट होता है, जहां विश्वसनीयता का संकट सदैव बना रहता है। सोशल मीडिया के प्रभाव को कम करने के लिए आज तमाम पारंपरिक मीडिया भी सोशल मीडिया के क्षेत्र में पदार्पित हो रहे हैं।
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मुख्य वक्ता डॉक्टर एसपी त्रिपाठी ने कहा कि पारंपरिक पत्रकारिता का प्रत्येक पेज विशेषज्ञों की देखरेख व संपादकों की निगरानी में बनता है। अत: इसमें फेक न्यूज की संभावना बहुत कम होती है।परंतु इंटरनेट पर आधारित सोशल मीडिया ने ए आई के सहयोग से पारंपरिक मीडिया को काफी क्षति पहुंचाई है। आज हमारे जीवन का प्रत्यक्षण गूगल की निगरानी में है। यह एक बड़ा खतरा है। गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रथम कार्यकारिणी के संगठन मंत्री वरिष्ठ पत्रकार शफी आजमी ने संगठन की 41 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने किया। विशिष्ट वक्ता जगदीश लाल ने कहा के सोशल मीडिया एक खतरा है तो पारंपरिक मीडिया को अपना पुनर्मूल्यांकन करना होगा तभी पारंपरिक मीडिया सुरक्षित रहेगी। दैनिक आज के स्थानीय संपादक तथा आज की गोष्ठी के ऑब्जर्वर अखिलेश चंद्र ने कहा कि अगर सोशल मीडिया सकारात्मक रहे तो इससे पारंपरिक पत्रकारिता को काफी सहयोग मिल सकता है।
कार्यक्रम का सफल संचालन आकाशवाणी की उद्घोषिका नूतन मिश्रा ने किया। इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित डॉक्टर सी के सुमन धरा धाम के प्रभारी डॉक्टर सौरभ पांडे, नौतनवां से पधारे वरिष्ठ पत्रकार उमेश चन्द्र त्रिपाठी तथा पांच दशक की पत्रकारिता करने वाले मोहम्मद अनीस खान को उत्तरी एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अंत में वरिष्ठ पत्रकार आशीष श्रीवास्तव के युवा पुत्र शुभम एवं गोरखपुर क्लब के संचालक अतुल श्रीवास्तव के युवा पुत्र अंबरीश श्रीवास्तव के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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