डेमोग्राफी चेंज के खतरे पर मोदी सरकार का कड़ा प्रहार

Demographic Change
संजय सक्सेना
संजय सक्सेना

Demographic Change भारत के कई राज्यों और जिलों में पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या की बनावट (Demographic Change) में जो असामान्य बदलाव आए हैं, उस पर लगाम लगाने के लिये मोदी सरकार ने कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया हैं। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। गौरतलब हो, घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाला अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। यह बात स्वयं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी कई बार कह चुके हैं। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए 26 मई 2026 को केन्द्र सरकार ने घुसपैठ और अन्य कारणों से हो रहे अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति साल भर में अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप देगी, जिसके बाद मोदी सरकार कई कड़े कदम उठा सकती है। वैसे यह मसला अचानक नहीं उठा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश के सामने जो दृष्टि रखी थी, इस समिति का गठन उसी की कड़ी है। इस घोषणा को 11 सितंबर 2025 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल गई थी। अब नौ महीने बाद इस समिति ने आधिकारिक रूप से काम करना शुरू कर दिया है।

ये भी पढ़े

90 प्रतिशत डिस्काउंट के नाम पर 24 घंटे हो रही ऑनलाइन ठगी

इस उच्च-स्तरीय समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को सौंपी गई है। न्यायमूर्ति नावलेकर की छवि एक निष्पक्ष और अनुभवी विधिवेत्ता की रही है, इसलिए उनके नेतृत्व में इस संवेदनशील विषय की जांच को विश्वसनीयता मिलेगी। समिति में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी), बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त पुलिस सेवा के अधिकारी) और जानी-मानी अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। जनगणना आयुक्त भी इस समिति के सदस्य होंगे तथा गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-1 प्रकोष्ठ) इस समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इस प्रकार यह समिति न्यायिक, प्रशासनिक, पुलिस और आर्थिक के चारों क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक संतुलित समूह है। यह समिति अवैध प्रवासन और दूसरे अस्वाभाविक कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक मूल्यांकन करेगी। यह पता लगाया जाएगा। कि किन जिलों और किन क्षेत्रों में जनसंख्या की धार्मिक अथवा भाषाई संरचना में असामान्य रूप से बदलाव आया है। यह समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या में होने वाले असामान्य बदलावों के स्वरूप की समीक्षा करेगी और इसके लिए एक सुनियोजित तथा समय सीमा वाला समाधान भी प्रस्तुत करेगी।

ये भी पढ़े

डोनाल्ड ट्रंप को बताया गया पूरी तरह स्वस्थ, हेल्थ रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

समिति यह भी खंगालेगी कि अवैध रूप से देश में घुसकर बस जाने वाले लोग कौन हैं, वे किस मार्ग से आते हैं और किस प्रकार उन्हें मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड अथवा राशन कार्ड जैसे सरकारी पहचान के दस्तावेज़ मिल जाते हैं। यह एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पहलू है क्योंकि दस्तावेज़ मिल जाने के बाद ये लोग व्यवस्था के भीतर इस प्रकार घुलमिल जाते हैं कि उन्हें बाहर करना कठिन हो जाता है। समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर यह अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। समिति राज्य सरकारों, सीमा सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियों तथा जनगणना के आंकड़ों से तथ्य एकत्र करेगी। विभिन्न जिलों का दौरा कर वहां के स्थानीय प्रशासन और लोगों से सीधी बातचीत भी इसके कार्य का हिस्सा होगी। रिपोर्ट में न केवल समस्या का विश्लेषण होगा, बल्कि उससे निपटने के ठोस उपाय भी सुझाए जाएंगे जिन्हें सरकार नीति के रूप में लागू कर सके।

ये भी पढ़े

पूर्वांचल में सपा के PDA केखिलाफ बीजेपी का PDV दांव

इस समिति के गठन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पहली बार इस विषय को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे में रखकर देखा जाएगा। अब तक यह मसला केवल राजनीतिक बहसों तक सीमित रहता था, किंतु अब एक न्यायिक और प्रशासनिक जांच के ज़रिए इसके तथ्यात्मक आधार तैयार होंगे। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, उत्तराखंड और झारखंड के कुछ जिलों में जनसंख्या की बनावट में जो बदलाव देखे गए हैं, उनका वैज्ञानिक और तथ्यात्मक अध्ययन पहली बार इतने बड़े स्तर पर होगा। पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी के बाद सीमा क्षेत्रों में हड़कंप की स्थिति है, जो यह दर्शाती है कि यह समस्या कितनी गहरी और व्यापक है। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार उन राज्यों और जिलों को चिह्नित कर सकेगी जहां तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। घुसपैठियों को सरकारी दस्तावेज मिलने की प्रक्रिया में जो खामियां हैं, उन्हें बंद करने के लिए नए नियम बनाए जा सकेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह आवश्यक है कि देश को पता हो कि उसकी सीमाओं के भीतर कौन रह रहा है और किस उद्देश्य से।

ये भी पढ़े

यूपी चुनाव 2027 : मायावती फिर बदल देंगी उत्तर प्रदेश की राजनीति?

सरकार के इस कदम पर राजनीतिक प्रतिक्रिया मिली जुली रही। कुछ राजनीतिक दलों ने इसे कानून और सुरक्षा का मामला बताते हुए सख्ती की मांग की, जबकि मानवाधिकार समूह और सामाजिक कार्यकर्ता मानवीय दृष्टिकोण, दस्तावेज़ों की सुलभता और रोजगार सृजन पर जोर दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने 26 मई 2026 को देश में घुसपैठ और अन्य कारणों से हो रहे अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव की जांच के लिए समिति का गठन किया है। मोदी सरकार के इस कदम की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और एआईएमआईएम के नेताओं ने तीखी आलोचना की है। उनका आरोप है कि यह समिति मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है और इसका उपयोग बड़े पैमाने पर मताधिकार छीनने या हिरासत का आधार तैयार करने के लिए किया जाएगा। विपक्षी नेताओं ने असम के NRC अनुभव का हवाला देते हुए इसे एक चुनावी हथियार करार दिया। इन नेताओं का कहना है कि यह समिति ऐसे समय गठित हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा था और भाजपा ने इसी मुद्दे पर तृणमूल सरकार को हराकर पूर्ण बहुमत हासिल किया।

ये भी पढ़े

UP में भी मुस्लिम लीग के साथ चुनाव लड़ सकती कांग्रेस

कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस समिति के व्यापक जनादेश पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी शब्दावली भारतीय कानून में परिभाषित नहीं है, जिससे इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता बता रहा है तो विपक्ष इसे आगामी चुनावों से जोड़कर देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या के जड़ में अक्सर रोजगार, भूमि-अधिकार और शिक्षा की कमी होती है, जिन्हें दूर किए बिना केवल प्रवासन नियंत्रण से स्थाई समाधान नहीं निकलेगा। केंद्र ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे त्वरित वेरिफिकेशन अभियान चलाएँ, स्थानीय प्रशासन को संसाधन उपलब्ध कराएं और सांस्कृतिक संस्थाओं की रक्षा के उपाय अपनाएँ। अधिकारियों का कहना है कि समाधान में पारदर्शिता, न्याय और समावेशन पर बल होगा ताकि सामाजिक रंजिश और हिंसा की आशंका को रोका जा सके। संक्षेप में कहें तो यह समिति उस बड़े प्रश्न का उत्तर खोजने की कोशिश है जो वर्षों से अनुत्तरित रहा है कि आखिर कौन, कहां से, कैसे और किसकी मिलीभगत से देश की जनसंख्या की बनावट को बदल रहा है। इसका उत्तर जब सामने आएगा, तभी इस समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

Spread the love

2 thoughts on “डेमोग्राफी चेंज के खतरे पर मोदी सरकार का कड़ा प्रहार

Comments are closed.

Sitapur Jailer
homeslider Uttar Pradesh

प्रदेश की तीन जेलों में सब्जी की आपूर्ति करने वाली जेल में सब्जी का संकट

बीज खरीद के लिए मुख्यालय ने आवंटित किए थे करीब डेढ़ लाख रुपए Sitapur Jailer जेलों में घटनाओं पर कार्यवाही नहीं होने से अधिकारी इस कदर बेलगाम हो गए कि उन्हें अब न तो शासन और न ही मुख्यालय का कोई खौफ रह गया है। प्रदेश की तीन जेलों को सब्जी की आपूर्ति करने वाली […]

Spread the love
Read More
BSF BGB
Central UP homeslider

BSF-BGB सीमा प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर बनी साझा रणनीति

BSF-BGB भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा प्रबंधन एवं सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सीमा सुरक्षा बल (BSF) तथा बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के मध्य 57वीं महानिदेशक स्तरीय सीमा समन्वय वार्ता आठ से 11 जून 2026 तक BSF मुख्यालय, नई दिल्ली में सफलतापूर्वक सम्पन्न […]

Spread the love
Read More
RBI
Business homeslider

RBI का बड़ा एक्शन: मुंबई के इस सहकारी बैंक पर छह महीने की प्रतिबंध

RBI भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुंबई स्थित मोगावीरा सहकारी बैंक पर कड़ा कदम उठाया है। बैंक की वित्तीय स्थिति में लगातार गिरावट और नियामकीय चिंताओं को देखते हुए RBI ने उस पर कई प्रतिबंध लगा दिए हैं। ये पाबंदियां 12 जून से लागू हो चुकी […]

Spread the love
Read More